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Emmanuel Macron: मैक्रों के मन में भारत के लिए सॉफ्ट कॉर्नर, जानें फ्रांस के राष्ट्रपति के जीवन से जुड़े पहलू

Emmanuel Macron: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों गुरुवार को भारत के दो-दिवसीय दौरे की शुरुआत राजस्थान की राजधानी जयपुर से करेंगे।

वह जयपुर में करीब छह घंटे रुकने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आमेर का किला, हवा महल और खगोलीय वेधशाला जंतर मंतर जाएंगे।

Emmanuel Macron

मैक्रों 26 जनवरी को नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर होने जा रहे 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। दोनों देशों के बीच 1948 में कूटनीतिक रिश्ते स्थापित होने के बाद मैक्रों इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होने वाले फ्रांस के छठे नेता होंगे।

गणतंत्र दिवस परेड में फ्रांस का 95-सदस्यीय मार्चिंग दस्ता और 33-सदस्यीय बैंड दस्ता भी शामिल हो रहा है। फ्रांस की वायु सेना के दो राफेल लड़ाकू विमान और एक एयरबस ए 330 मल्टी-रोल टैंकर परिवहन विमान भी इस भव्य समारोह में शामिल होंगे।

पीएम मोदी के साथ मैक्रों की पुरानी दोस्ती

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जयपुर में पीएम मोदी के साथ एक रोड शो में भी हिस्सा लेंगे। इसके बाद दोनों नेता भारत-फ्रांस के बीच द्विपक्षीय संबंधों और विभिन्न भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर होटल ताज रामबाग पैलेस में व्यापक बातचीत करेंगे।

इस दौरान डिजिटल क्षेत्र, रक्षा, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और भारतीय छात्रों के लिए वीजा मानदंडों को आसान बनाने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग बढ़ाने, लाल सागर में मौजूदा हालात का मिलकर सामना करने, हमास-इजराइल संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मसले पर चर्चा की गुंजाइश है। पिछले साल 14 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस में आयोजित 'बैस्टिल' दिवस परेड में सम्मानित अतिथि थे। वैश्विक राजनीति में दोनों नेताओं की दोस्ती की मिसाल दी जाती है।

मैक्रों ने 25 साल बड़ी टीचर से की लव मैरिज

फ्रांस के राष्ट्रपति का पूरा नाम इमैनुएल जँ-मिशेल फ़्रेडरिक मैक्रों है। उनका जन्म 21 दिसम्बर 1977 को उत्तरी फ्रांस के अमिएँ शहर में हुआ था। उनके पिता जीन-मिशेल मैक्रॉन यूनिवर्सिटी ऑफ पिकार्डी में न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर हैं और उनकी मां फ़्रॉस्वा मैक्रों एक फिजिशियन हैं।

मैक्रों का परिवार गैर-धार्मिक था, लेकिन 12वें साल में उन्होंने अपनी इच्छा से बपतिस्मा कराया। इमैनुएल मैक्रों की शुरुआती शिक्षा अमिएँ शहर में ही हुई। परिवार ने उच्च शिक्षा के लिए उन्हें पेरिस भेज दिया, क्योंकि उन्होंने अपनी शिक्षिका ब्रिजित ऑज़िएर ट्रोगनेक्स के साथ अंतरंग संबंध बना लिए थे। हालांकि, बाद में इमैनुएल ने 2007 में उनसे शादी कर ली। दोनों की उम्र में 25 सालों का फासला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक उन दोनों की मुलाकात एक थिएटर वर्कशॉप के दौरान हुई थी। 15 वर्षीय इमैनुएल वहां एक छात्र थे और 39 वर्षीय ब्रिगिट उनकी टीचर थी। दोनों के पैरेंट्स ने इन दोनों को अलग करने का भरसक प्रयास किया था, लेकिन आखिर में दोनों ने शादी कर ही ली।

राष्ट्रपति बनने से पहले मैक्रों ने कई क्षेत्रों में आजमाया हाथ

मैक्रों ने पेरिस-नांतेयर यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने पेरिस के मशहूर राजनीतिक अध्ययन संस्थान से सार्वजनिक सेवाओं में डिग्री हासिल की और राष्ट्रीय प्रशासन महाविद्यालय में वरिष्ठ सिविल सेवा के लिए प्रशिक्षण लेकर ग्रैजुएट हुए।

मैक्रों ने साल 2004 से 2008 तक फ़्रांसीसी अर्थव्यवस्था मंत्रालय में वित्त महानिरीक्षक का पद संभाला। 2008 में उन्होंने 50 हजार यूरो देकर खुद को सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से मुक्त किया। इसके बाद रॉथ्सचाइल्ड एंड कंपनी में इनवेस्टमेंट बैंकर की नौकरी करने लगे। इसका मतलब फ्रांस में सक्रिय राजनेता और राष्ट्रपति बनने से पहले मैक्रों एक सीनियर सिविल सर्वेंट और इनवेस्टमेंट बैंकर रह चुके हैं।

39 साल की उम्र में फ्रांस के सबसे युवा राष्ट्रपति बने इमैनुएल मैक्रों

इमेनुएल मैक्रों ने पेशेवर काम के साथ ही राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत भी कर दी थी। 2006 से 2009 तक फ्रांस की समाजवादी पार्टी के सदस्य मैक्रों को फ़्रांस्वा ऑलांद की पहली सरकार (2014-2016) में एलिज़े महल के उपमहासचिव का पद मिला था। पीएम मैनुएल वाल्स मंत्रिमंडल में भी उन्हें जगह मिली थी।

मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मैक्रों ने 2016 में ऑन मार्श नाम की निर्दलीय पार्टी बनाकर सेंट्रिस्ट यानी केंद्रवादी या मध्यमार्गी राजनीतिक आंदोलन की स्थापना की। साल 2017 में इस उदारतावादी और प्रगतिवादी पार्टी की ओर से ही राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार बने और 23 अप्रैल 2017 में चुनाव के पहले चरण में उन्हें सबसे अधिक वोट मिले और वे दूसरे चरण के लिए चुने गए। 7 मई को हुए दूसरे चरण में उन्होंने प्रतिद्वंद्वी मरीन ले पेन को हराया और 39 साल में फ्रांस के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति बने।

फ्रांस में मिला व्यापक समर्थन

इमैनुएल मैक्रों की पार्टी को फ्रांस के कई गुटों का समर्थन मिला। वामपंथियों के साथ ही केंद्रवादियों और दक्षिणपंथी राजनेताओं ने उनके समर्थन में आवाज बुलंद की। पेरिस की मस्जिदों ने भी मैक्रों को वोट देने के लिए मुसलमानों से आग्रह किया। कई विदेशी राजनेताओं ने भी मैक्रों की जमकर तारीफ की। इनमें यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जँ-क्लॉद जुंकर, जर्मन प्रधानमंत्री एंजेला मर्केल और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा शामिल थे।

साल 2022 में इमैनुएल मैक्रों मरीन ले पेन को फिर से हराकर दोबारा फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गए। अपने दोनों ही कार्यकाल में बिजनेस फ्रेंडली योजनाओं के लिए मैक्रों को जाना जाता है। इमैनुएल मैक्रों ने श्रम कानूनों, टैक्स, पेंशन और नवीकरणीय ऊर्जा में सुधार के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं.

इमैनुएल मैक्रों को मई 2017 में लीजन ऑफ ऑनर के राष्ट्रीय आदेश के ग्रैंड मास्टर और ग्रैंड क्रॉस से नवाजा गया। इसके अलावा मई 2017 में ही उन्हें ग्रैंड मास्टर और ग्रैंड क्रॉस ऑफ नेशनल ऑर्डर ऑफ मेरिट भी दिया गया। वहीं, जुलाई 2021 में इटालियन रिपब्लिक के ऑर्डर ऑफ मेरिट के कॉलर के साथ नाइट ग्रैंड क्रॉस अवार्ड से सम्मानित किया गया।

मैक्रों के मन में भारत के लिए सॉफ्ट कॉर्नर

भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने के लिए पीएम मोदी के न्योते पर गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि बनकर आए इमैनुएल मैक्रों भारत को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं। भारत के लिए उनके इस सकारात्मक रुख के लिए दोनों देशों की इकोनॉमी प्रमुख कारण है। भारत की इकोनॉमी 4 ट्रिलियन डॉलर के मुहाने पर खड़ी है, जबकि यूरोप के सबसे बड़े देशों में शुमार फ्रांस की इकोनॉमी 3.05 ट्रिलियन डॉलर है।

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