Students Suicide: IIT, IIM और NIT में पांच साल में 61 छात्रों ने की आत्महत्या, जानें क्या कारण रहे?
आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों में अकादमिक तनाव, पारिवारिक कलह, व्यक्तिगत कारण, मानसिक स्वास्थ्य व अन्य के कारण छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के मामले बढ़े हैं।

Students Suicide: मद्रास आईआईटी से पीएचडी कर रहे एक छात्र सचिन कुमार जैन ने 31 मार्च 2023 को आत्महत्या कर ली। छात्र ने अपने कमरे में ही फांसी लगाकर जान दे दी। उसने खुदकुशी करने के कुछ घंटे पहले अपने व्हाट्सअप पर स्टेटस लगाया था, 'माफ करना, मैं अच्छा नहीं हूं'। यह 32 वर्षीय छात्र पश्चिम बंगाल का रहने वाला था।
गौरतलब है कि आईआईटी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या के मामले बीते कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़े हैं।
इसे लेकर 15 मार्च 2023 को राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद एल. हनुमंथैया ने आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम समेत उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर केंद्र से सवाल पूछा था। इसके जवाब में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने पिछले 2018 से 2023 के बीच छात्रों की आत्महत्या के आंकड़ा पेश किया था। केंद्र के मुताबिक इन बड़े संस्थानों में इस अवधि के दौरान आत्महत्या के 61 मामले दर्ज किये गये थे।
कब-कब कितने छात्रों ने की आत्महत्या?
साल 2018 के बाद से अब तक आईआईटी में 33 छात्रों ने आत्महत्या की। वहीं एनआईटी में 24 छात्रों और आईआईएम में चार छात्रों ने आत्महत्या की है। साल-दर-साल आंकड़ा निकाले तो आईआईटी में 2018 में 7, 2019 में 8, 2020 में 3, 2021 में 4, 2022 में 8 और 2023 में अभीतक 3 छात्रों ने आत्महत्या की।
एनआईटी में 2018 में 3, 2019 में 8, 2020 में 1, 2021 में 2, 2022 में 7 और 2023 में 3 छात्रों ने आत्महत्या की। जबकि आईआईएम में 2018 में 1, 2019 में कोई नहीं, 2020 में 1, 2021 में 1, 2022 में एक छात्र ने आत्महत्या की है।
कुलमिलाकर इन तीनों संस्थानों के सभी कैम्पस में 2018 में आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या 11 रही। जबकि 2019 में 16, 2020 में पांच, 2021 में सात और 2022 में सर्वाधिक 16 छात्रों ने आत्महत्या कर ली। वहीं 2023 में अबतक ऐसे 6 मामले सामने आ चुके हैं।
आत्महत्या की वजह क्या है?
संसद में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुभाष सरकार के लिखित जवाब के अनुसार अकादमिक तनाव, पारिवारिक कारण, व्यक्तिगत कारण, मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे आदि छात्रों के आत्महत्या करने के कारण रहे हैं। आइये कुछ घटनाओं (केस स्टडीज) के माध्यम से समझते हैं कि आखिर छात्रों में आत्महत्या जैसे प्रवृतियां क्यों बढ़ रही हैं।
पेपर में बैक लगने के कारण
यह मामला दिसंबर 2022 का है। जब धनबाद के आईआईटी आईएसएम एक छात्र प्रवीण ने आत्महत्या कर ली। प्रवीण आईआईटी धनबाद में इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन विभाग का छात्र था। घटना वाले दिन प्रवीण के दोस्तों ने उसे फिल्म देखने चलने को कहा लेकिन उसने मना कर दिया। उसके बाद जब उसके दोस्त रूम पर लौटे तो प्रवीण को लटका हुआ पाया। शुरूआती जांच में यह पता चला कि प्रवीण ने साल 2018 में बीटेक में नामांकन लिया था। अप्रैल 22 तक पास आउट होना था। लेकिन, एक पेपर में बैक लग गया। इसलिए समर सेमेस्टर में उसने कैंपस में आकर इसकी पढ़ाई भी की थी फिर भी उसे बैक लग गया। वर्तमान में वह उसी पेपर की पढ़ाई के लिए कैंपस में था। शायद पेपर में बैक लगने से वह काफी निराश था।
भेदभाव से परेशान स्टूडेंट ने की आत्महत्या
12 फरवरी 2023 को 18 साल के दर्शन सोलंकी ने IIT-बॉम्बे के हॉस्टल से कूदकर आत्महत्या कर ली। जबकि उसके तीन महीने पहले ही उसका तकनीकी संस्थान में एडमिशन हुआ था। आत्महत्या की बात सुन घरवालों ने बताया कि दर्शन सोलंकी कॉलेज में बाकी बच्चों से परेशान था। दर्शन की बहन जाह्नवी ने दावा किया, शुरुआत में सब कुछ ठीक था लेकिन जब उन्हें (कॉलेज के दूसरे छात्र) पता चला कि दर्शन एक दलित समुदाय से है तो उसका उत्पीड़न शुरू हो गया। अन्य छात्र उसे बुली (तंग करना, धमकाना) किया करते थे।
पढ़ाई का दवाब नहीं झेल पाया यह छात्र
14 मार्च 2023 को आईआईटी-मद्रास के 20 वर्षीय छात्र वैपुक पुष्पक श्री साई ने आत्महत्या कर ली। तीसरे वर्ष का छात्र साई, आंध्र प्रदेश का निवासी था। वह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी कर रहा था। आत्महत्या की शुरुआती जांच के बाद अधिकारियों ने बताया कि पुष्पक साई पिछले एक हफ्ते से क्लास में नहीं आ रहा था। उसके तीन रूममेट्स ने उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन वो किसी से कुछ नहीं कहता। वहीं 14 मार्च (मंगलवार) को उसके रूममेट्स जब क्लास से लौटे तो दरवाजा अंदर से बंद था। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने दरवाजा तोड़कर देखा कि साई ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस अधिकारियों ने अपनी जांच में पाया कि पुष्पक साई पढ़ाई का दबाव झेल नहीं पा रहा था। वह पेपर में भी अच्छा नहीं कर पा रहा था। इस कारण वो निराश था।
आईआईटी ने आत्महत्या को रोकने के क्या उपाय निकाले?
गौर करने वाली बात यह है कि बड़े संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या का मामला बढ़ना चिंता का विषय है। वैसे कई आईआईटी ने ऐसे मामले रोकने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। आईआईटी दिल्ली ने स्टूडेंट्स को आत्महत्या करने से रोकने के लिए अपने पाठ्यक्रम में ही बदलाव कर दिया है। आईआईटी दिल्ली का कहना है कि अगर पाठ्यक्रम का बोझ कम कर दिया जाए तो स्टूडेंट्स पर दबाव कम हो जाएगा।
आईटीआईटी बॉम्बे ने काउंसलिंग और मेंटोरशिप प्रोग्राम शुरू किया है। आईआईटी बॉम्बे में शुरू किये गये प्रोग्राम्स के तहत अगर किसी छात्र के कम अंक या बैक लग जाता है तो उसे तुरंत काउंसलिंग दी जाती है। साथ ही यहां एक मेंटल हेल्थ सेंटर भी खोला गया है।
आईआईटी गुवाहाटी में सेंटर फॉर वेलबिइंग शुरू किया गया है। यहां कम ग्रेड और बैक वाले छात्र की जानकारी डीन के साथ ही वेलफेयर बोर्ड को भेज दी जाती है। ताकि ऐसे छात्रों से वे सीधे बात कर उनकी मानसिक अवस्था पर काम कर सकें।
आईआईटी खड़गपुर ने तो छात्रों को पढ़ाई से तनाव कम करने के लिए अलग ही तरीका निकाला है। यहां हर शाम एक घंटे के लिए लाइट्स बंद कर दी जाती हैं ताकि स्टूडेंट्स लैपटॉप और इंटरनेट से कुछ समय निजात पा सकें। इस दौरान उन्हें बाहर निकलने और एक-दूसरे के साथ समय बिताने को कहा जाता है।
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