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2000 Rupee Note: क्या है 2000 रुपये के नोट का चलन कम होने की कहानी, संसद में क्यों गूंजा यह मुद्दा?

यह सच है कि 2000 रुपए के नए नोट नहीं छप रहे हैं लेकिन जो अरबों नोट पहले ही छप कर जनता के पास पहुंच गए थे, वे कहां गायब हो गए? क्या भ्रष्टाचार बढ़ाने में 2000 का नोट सहायक सिद्ध हुआ है?

RBI 2000 rupee note availability issue resonate in Parliament?

2000 Rupee Note: 12 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन, राज्यसभा में बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी ने 2000 रुपये के नोट का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि जब एक हजार का नोट बंद हो गया, तो 2000 रुपये के नोट का भी कोई औचित्य नहीं है। कालाधन को बंद करना है तो इस नोट को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2000 का नोट अब बाजार में नहीं दिख रहा है। अफवाह है कि ये लीगल टेंडर नहीं रहा। सरकार को अब इसके बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

भाजपा सांसद सुशील मोदी के बयान से जहां विपक्ष को बैठे-बैठे सरकार पर निशाना साधने का एक मुद्दा मिल गया, वहीं यह चर्चा भी जोरों पर चल पड़ी कि क्या सच में 2000 का नोट बंद हो गया है? दरअसल, अब बाजारों में यह गुलाबी रंग का बड़ा नोट न के बराबर दिखाई देता है। एटीएम और बैंकों में दो हजार के नोट की किल्लत सामने आ रही है। आईये, जानते हैं आखिर क्या है पूरा मामला। उससे पहले, आप भी जरा दिमाग पर जोर डालिए आखिरी बार आपने 2 हजार के नोट का छुट्टा कब करवाया था?

कांग्रेस ने कसा तंज

सुशील मोदी के इस बयान पर बिहार कांग्रेस के नेता राजेश राठौड़ ने कहा कि अब नोटबंदी को भाजपा सांसद भी विफल बता रहे हैं। नोटबंदी को भ्रष्टाचार और आतंकवाद पर लगाम लगाने की बाद कहकर की गई थी पर यह सफल नहीं रहा। केंद्र बताए कि आखिर नोट कहां चले गए?

वहीं पिछले महीने 8 नवंबर को नोटबंदी के छह साल पूरा होने पर कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि 8 नवंबर 2016 का दिन सबको याद होगा। आज भारत की अर्थव्यवस्था को नष्ट करने के फैसले की छठी बरसी है। नोटबंदी के 50 दिन के बाद आज तक सरकार ने नोटबंदी का नाम तक नहीं लिया है। हिंदुस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी ऑर्गेनाइज्ड लूट 8 नवबंर 2016 को नोटबंदी के माध्यम से सरकार ने की।

आखिर कहां गए 2000 रुपये के नोट?

दरअसल, 8 नवबंर 2016 में नोटबंदी के बाद पुराने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट बंद कर दिए गए थे और नए 500 रुपये और 2000 रुपये के नोट लागू किए गए थे। सरकार का मानना था कि 1000 रुपये की नोट की भरपाई 2000 रुपये के नोट से हो जाएगी पर शायद ऐसा नहीं हो पाया और बाजार में लोग 2000 के नोट लेने से हिचकते रहे। वहीं आपको यह बता दें कि साल 2017-18 के दौरान बाजार में 2000 के 33,630 लाख नोट चलन में थे। इनका कुल मूल्य 6.72 लाख करोड़ रुपये था।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2017 को सर्कुलेशन वाले नोट की कुल वैल्यू में 2000 रुपये के नोट की हिस्सेदारी 50.2 फीसदी थी। वहीं, 31 मार्च 2022 को सर्कुलेशन वाले कुल नोट की वैल्यू में 2000 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी घटकर 13.8 फीसदी थी। यहां यह स्पष्ट कर दें कि रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट को बंद नहीं किया है। हां, सरकार की ओर से ये बताया गया है कि इसकी छपाई नहीं की जा रही है लेकिन नोट बंद करने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है।

RBI ने बताई मुख्य वजह

रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में इसे लेकर स्पष्ट जानकारी दी है। वित्त वर्ष 2019-20, वित्त वर्ष 2020-21 और वित्त वर्ष 2021-22 में 2000 रुपये के एक भी नोट नहीं छापे गए हैं। इस वजह से बाजार में 2000 रुपये के नोट का सर्कुलेशन कम हो गया है।

क्या है सरकार का बयान

वर्तमान में, केंद्र सरकार का कोई अधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है लेकिन साल 2021 में भी जब नोटों की कमी पर सवाल उठे थे तब इस पूरे मामले पर तत्कालीन वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में यह जानकारी दी थी कि पिछले दो साल से 2000 रुपये के एक भी नोट की छपाई नहीं हुई है। इसलिए 2000 के नोटों की कमी हुई है। साल 2019 में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भी अपने बयान में कहा था कि अनुमानित जरूरतों के मुताबिक नोटों की छपाई की योजना बनती है। सिस्टम में कुल सर्कुलेशन के 35% 2000 रुपये के नोट हैं। यह मात्रा पर्याप्त से अधिक है।

2000 के नोटों से सच में होगी परेशानी?

जो बात भाजपा के सांसद सुशील मोदी ने उठाई है उस पर गौर करें तो सच में अधिक वैल्यू वाले नोटों से ब्लैक मनी बढ़ जाती है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। NIA (National Investigative Agency) भी कई बार बता चुका है कि पाकिस्तान से 2,000 रुपये के जाली नोट बड़ी संख्या में भारतीय मार्केट में पहुंचाए जा रहे हैं। इन नोटों की पहचान करना भी आसान नहीं है। वहीं इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और फाइनैंशल इंटेलिजेंस यूनिट ने भी सरकार को गैर कानूनी गतिविधियों के लिए 2,000 रुपये के नोटों को जमा किए जाने का चलन बढ़ने की रिपोर्ट दी थी।

जबकि इनकम टैक्स के जितने भी छापे हुए हैं, वहां जब्त किए गए नोटों में अधिकतर 2,000 रुपये के ही नोट होते हैं। इससे ये साबित होता है कि टैक्स चोरी, आर्थिक अपराधों में 2000 के नोटों का चलन ज्यादा है। हालांकि, यहां ये बात भी सोचने योग्य है कि नोटबंदी के समय 1,000 रुपये के नोट की जगह 2,000 रुपये का नोट लाने की बात पर विपक्ष ने कहा था कि इससे करप्शन और बढ़ सकता है।

बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में छोटे नोट

वैसे दुनियाभर के बड़ी इकोनॉमी वाले देशों की बात करें तो वहां छोटे मूल्य के नोट ही मिलते हैं। जैसे अमेरिका में अधिकतम नोट 100 डॉलर का है, चीन में 100 युआन, कनाडा में 100 कनाडा डॉलर, यूरोपीय संघ में 200 यूरो। वहां 1000 के डॉलर या करेंसी नहीं चलती है। जबकि पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे कमजोर इकोनॉमी वाले देशों में उच्चतम मूल्य का नोट 5000 का है। वहीं इंडोनेशिया में तो 1 लाख रुपया का भी नोट उपलब्ध है।

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