Jalore Seat: जालोर सीट पर अशोक गहलोत के पुत्र वैभव का राजनैतिक भविष्य दांव पर
Jalore Seat: 18वीं लोकसभा का चुनाव देश की अनेक राजनीतिक हस्तियों का भविष्य तय करेगा। इस सूची में राजस्थान से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत का नाम सबसे ऊपर है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे वैभव ने 2019 में लोकसभा का चुनाव जोधपुर से लड़ा था।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार और मुख्यमंत्री पिता के बावजूद भी वैभव चुनाव नहीं जीत पाए। भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत ने वैभव को 2 लाख 70 हजार 114 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस बार अशोक गहलोत ने अपने सिपाहसलारों के सुझाव पर अपने पुत्र को जालोर-सिरोही से चुनाव लड़ाने को प्राथमिकता दी। इस चुनाव की हार-जीत ही वैभव के राजनीतिक भविष्य का निर्धारण भी करेगी। वहीं अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हैं। हालांकि गत चार लोकसभा चुनावों में इस सीट पर बीजेपी का ही कब्जा है।

चार बार बूटासिंह चुने गए सांसद
आजादी के बाद शुरू हुए लोकसभा चुनाव में 1952 में भवानी सिंह स्वतंत्र उम्मीदवार, 1957 में सूरज रतन दमानी कांग्रेस से, 1962 में हरीश चंद्र माथुर कांग्रेस से, 1967 में देवकी नंदन पाटोदिया स्वतंत्र पार्टी से, 1971 में नरेंद्र कुमार सांघी कांग्रेस से, 1977 में हुकम राम जनता पार्टी से, 1980 में विरदाराम फुलवारियां कांग्रेस (आई) से, 1984 में बूटासिंह कांग्रेस से, 1989 में कैलाश मेघवाल भाजपा से, 1991 में बूटासिंह कांग्रेस से, 1996 में परसाराम मेघवाल कांग्रेस से, 1998 में बूटासिंह निर्दलीय, 1999 में बूटासिंह कांग्रेस से तथा 2004 में बंगारू सुशीला भाजपा से चुनाव जीती।
यह एक महत्त्वपूर्ण तथ्य है कि पंजाब के रहने वाले बूटा सिंह चार बार राजस्थान के इस संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए। वहीं तेलुगु भाषी बंगारू सुशीला आंध्र प्रदेश से राजस्थान आकर चुनाव जीत गई। वह भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण की पत्नी थीं।
अब तक एससी वर्ग के लिए आरक्षित रही यह सीट परिसीमन के बाद 2009 में सामान्य हो गई। वर्ष 2009 से लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के देवजी भाई पटेल लगातार तीन बार सांसद चुने गए। वर्ष 2019 में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में बीजेपी के देवजी पटेल को 7 लाख 72 हजार 833 तथा कांग्रेस के रतन देवासी को 5 लाख 11 हजार 723 मत मिले। भाजपा प्रत्याशी पटेल 2 लाख 61 हजार 110 वोटो से जीते थे।
विधानसभा चुनाव में हारने पर कटा पटेल का टिकट
नवंबर 2023 में सम्पन्न राजस्थान विधानसभा चुनाव में सांसद देवजी भाई पटेल को सांचौर विधानसभा से चुनाव में उतारा गया। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के ही नेता जीवाराम चौधरी ने विरोध कर दिया और वे निर्दलीय मैदान में उतर गए। जिसके चलते देवजी भाई पटेल तीसरे नंबर पर चले गए और उनकी जमानत जब्त हो गई। निर्दलीय जीवाराम चौधरी को 95518, कांग्रेस के सुखाराम विश्नोई को 90847, भाजपा के देवजी पटेल को 30535 तथा बसपा के शमशेर अली को 26108 मत मिले।
इस हार के कारण लोकसभा चुनाव में तीन बार के सांसद देवजी पटेल का टिकट काट दिया गया और उनके स्थान पर सिरोही जिले के वाडेली निवासी प्रगतिशील किसान लुम्बाराम चौधरी को टिकट दिया गया। लुम्बाराम शुरू से ही बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। सिरोही पंचायत समिति के एक बार प्रधान, जिला परिषद सदस्य व दो बार सिरोही बीजेपी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2015 के जिला परिषद के चुनाव में इनके बेटे कानाराम चौधरी को सिरोही जिला परिषद में उप प्रमुख बनाया गया था।
लुम्बाराम और वैभव के बीच मुकाबला लेकिन अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा दांव पर
लोकसभा चुनाव में जालोर-सिरोही संसदीय क्षेत्र से भाजपा के लुंबाराम चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के बीच सीधा मुकाबला है। हालांकि लोकसभा की आठ विधानसभाओं में से चार पर भाजपा काबिज है। आठ में से जालोर जिले की पांच विधानसभाएं है, जिसमें आहोर विधानसभा से भाजपा के छगन सिंह राजपुरोहित, जालोर (एससी) से भाजपा के जोगेश्वर गर्ग, भीनमाल से कांग्रेस के समरजीत सिंह, सांचौर से निर्दलीय जीवाराम चौधरी तथा रानीवाड़ा विधानसभा से कांग्रेस के रतन देवासी विधायक हैं।
वहीं इस लोकसभा क्षेत्र में सिरोही जिले की तीन विधानसभाएं शामिल है। जिसमें सिरोही से भाजपा के ओटाराम देवासी, पिंडवाड़ा-आबू (एसटी) से भाजपा के समाराम गरासिया व रेवदर (एससी) सीट से कांग्रेस के मोतीराम कोली एमएलए हैं। लोकसभा चुनाव के परिणाम क्या रहेंगे यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन यह तय है कि चुनाव जहां एक और वैभव गहलोत के राजनैतिक भविष्य का निर्धारण करेंगे। यदि अपने मार्गदर्शक पिता अशोक गहलोत की सभी कोशिशें के बावजूद अगर यह चुनाव भी वैभव हार जाते हैं तो उनका राजनीतिक भविष्य एक बार फिर सवालों के घेरे में आ जाएगा।












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