Pravasi Bharatiya Divas: जानिए प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की पूरी कहानी, क्या है गांधीजी और अटलजी से कनेक्शन

9 जनवरी 1915 को गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे थे। उन्होंने विदेश से स्वदेश लौटकर देश में आजादी की लौ जगाई थी।

Pravasi Bharatiya Diwas Know the whole story of celebrating Pravasi Bharatiya Diwas

साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसके पीछे का कारण थे महात्मा गांधी, जानिए कैसे? इसके पीछे एक छोटी सी कहानी है।

दरअसल, 18वीं शताब्दी में गुजराती व्‍यापारियों ने केन्‍या, युगांडा, ज़िम्बाब्वे, ज़ाम्‍बिया, दक्षिण अफ्रीका में व्यापार करने की सोची और विदेश पहुंच गए। इन्‍हीं में से एक व्‍यापारी दादा अब्‍दुल्‍ला सेठ के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में मोहनदास करमचंद गांधी मई, 1893 में दक्षिण अफ्रीका के नटाल प्रांत में पहुंचे। तब उन्होंने वहां रंगभेद को लेकर हिंसा और भेदभाव को देखा। तब रंगभेद नीति के विरोध में उनका संघर्ष और प्रवासी भारतीय समुदाय के सम्‍मान की उनकी लड़ाई सर्वविदित है। अहिंसा और सत्‍याग्रह जैसे विरोध के बिलकुल नए और अनजान तरीकों से वह अपने मिशन में कामयाब हुए। इसके बाद 9 जनवरी 1915 को गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे। उनके लगभग 22 साल के संघर्षमय विदेश प्रवास से प्रेरणा लेकर ही उनके स्वदेश वापसी के दिन को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस बार देश के सबसे स्वच्छ शहर मध्य प्रदेश के इंदौर में 8 जनवरी से 10 जनवरी तक भारतीय प्रवासी दिवस का आयोजन किया गया है। जिसमें आज यानि 9 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत की। इस 17वें प्रवासी भारतीय सम्‍मेलन में दुनिया भर के 70 देशों के 3500 से ज्‍यादा प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। वहीं प्रवासी सम्मेलन के तीसरे दिन 10 जनवरी को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 प्रवासी भारतीयों को सम्मानित करेंगी। इसमें भूटान के शिक्षाविद, ब्रूनेई के डॉक्टर, इथियोपिया के सिविल सोसायटी एक्टिविस्ट शामिल हैं। विदेश मंत्री एस.जयशंकर की अध्यक्षता वाली समिति ने इन विदेशी हस्तियों को चुना है।

कब शुरू हुआ प्रवासी भारतीय दिवस मनाना?
साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसके बाद 2003 में पहली बार प्रवासी भारतीय दिवस मनाया गया था। वहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसकी संकल्पना लक्ष्मीमल सिंघवी समिति ने साल 1995 में ही की थी। वहीं साल 2015 में प्रवासी भारतीय दिवस को संशोधित किया गया और तब से हर दो साल बाद इस दिन को मनाया जाने लगा। यहां आपको बता दें कि साल 2020 कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी थी। जिसके कारण साल 2021 में प्रवासी भारतीय दिवस को वर्चुअल मोड में आयोजित किया गया था। लेकिन, इस साल 2023 में यानि 17वां प्रवासी भारतीय दिवस इंदौर में मनाया जा रहा है।

हर बार होती है एक थीम
साल 2003 से साल 2015 तक हर साल 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता था। लेकिन, साल 2015 में इसमें संशोधन किया गया और अब हर दो साल में इसे एक बार मनाने का फैसला लिया गया। तभी से प्रवासी भारतीय दिवस की हर दो साल में एक विशेष थीम होती है। इसी थीम पर यह खास दिन मनाया जाता है।
वर्ष 2015 में प्रवासी भारतीय दिवस की थीम 'अपना भारत अपना गौरव' तय की गई। तब यह सम्मेलन गुजरात के गांधीनगर में मनाया गया था। यह 13वां सम्मेलन था। साल 2017 में प्रवासी भारतीय दिवस की थीम 'प्रवासी भारतीय-संबंधों के नए आयाम' तय की गई। तब यह सम्मेलन कर्नाटक के बेंगलुरु में मनाया गया था। उस साल 30 देशों के लगभग 8000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वहीं इस समागम के मुख्य अतिथि पुर्तगाल के प्रधानमंत्री डॉ. एंटोनियो कोस्टा थे। साल 2019 यानि 15वां सम्मेलन की थीम 'नये भारत के निर्माण में प्रवासी भारतीयों की भूमिका' तय की गई थी। तब यह आयोजन उत्तर प्रदेश के वाराणसी में किया गया था। इस साल मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जुगन्नाथ मुख्य अतिथि थे और नॉर्वे की संसद के सदस्य हिमांशु गुलाटी विशेष अतिथि थे। साल 2021 में 16वां सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। जिसका विषय था 'आत्मनिर्भर भारत में योगदान'। दरअसल कोरोना के कारण यह वर्चुअल सम्मेलन था। वहीं इस साल 2023 में इस सम्मेलन की थीम है- 'प्रवासी: अमृत काल में भारत की प्रगति के विश्वसनीय भागीदार'।

तीन देशों के राष्ट्रपति होंगे शामिल
इस 17वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली और सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी विशिष्ट अतिथि होंगे। जबकि ऑस्ट्रेलिया की संसद सदस्य जनेटा मैस्करेनहास भी यूथ प्रवासी सम्मेलन में सम्मानित अतिथि हैं।

'पधारो म्हारा घर' अभियान की पहल
इस बार मध्य प्रदेश में यह सम्मेलन किया जा रहा है। इसके लिए एक अलग अभियान चलाया गया था। दरअल प्रवासी भारतीय सम्मेलन के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण के द्वारा 'पधारों म्हारा घर अभियान' की पहल 'अतिथि देवो भव' की तर्ज पर की गई है। इसके तहत शहर के करीब 75 परिवारों द्वारा अपने घरों में प्रवासियों के लिए ठहरने हेतु अपनी सहमति दी गई है। ऐसा पहली बार किया जा रहा है। दरअसल राज्य सरकार इंदौर आने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए स्वागत सत्कार में कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहती। इसके लिए अनूठे प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रवासी भारतीय दिवस से भारत को क्या फायदा?
एक आंकड़े के मुताबिक दुनियाभर के 100 से ज्यादा देशों में 3.2 करोड़ से ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते हैं। पिछले 28 साल के अंदर विदेश जाकर बसने वाले भारतीयों की संख्या में 346% का इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा भारतीय नागरिक अमेरिका में बस गए हैं। दुनियाभर में प्रवासी भारतीयों का काफी दबदबा है। 70 से ज्यादा भारतीय मूल के नेता हैं, जिन्होंने दुनिया के अलग-अलग देशों में ऊंचे पदों को हासिल किया है। वहीं दुनियाभर में रहने वाले प्रवासी भारतीय अपने देश की मदद करने में भी पीछे नहीं हटते हैं। पिछले साल यानी 2022 की बात करें तो प्रवासी भारतीयों ने सबसे ज्यादा 100 अरब डॉलर भारत में भेजे। अपने देश विदेशी मुद्रा भेजने के मामले में प्रवासी भारतीय सबसे आगे हैं।

प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की खास वजहें

  • विदेश में विशेष उपलब्धियां हासिल करने वाले भारतीयों को सम्मानित करना।
  • एक ऐसा मंच तैयार करना, जिससे प्रवासी भारतीय और देशवासियों के बीच नेटवर्क बन सके।
  • देश के युवाओं को विदेश में रह रहे भारतीयों से जोड़ा जा सके।
  • प्रवासी भारतीय दिवस के मुख्य उद्देश्यों में निवेश के अवसर बढ़ाना भी है।
  • देशवासियों और प्रवासी भारतीयों को जोड़कर लाभकारी रणनीति तैयार की जा सके।
  • दुनियाभर में भारत की ताकत और पहचान का एहसास कराना।

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