Positive India: बेटी ही विकास की जननी है इसलिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
Positive India में आज बात करेंगे "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" अभियान की, जिसके तहत देश के हर आंगन की 'रोशनी' को जगमगाने की कसम भारत सरकार ने खायी है। बीते कुछ वक्त में लोग जागरूक हुए हैं और उन्हें बेटी की अहमियत और उसके पढे़-लिखे होने की जरूरत समझ में आयी है।

इसकी वजह से अब ज्यादातर लोग भारत में बेटी के जन्म पर मातम नहीं मना रहे हैं। हालांकि ऐसे समझदार लोगों की अब भी देश में कमी है, लेकिन फिर भी अब लोग इस मामले की गंभीरता को समझ रहे हैं।
आईये जानते हैं क्या है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ..अभियान?
- भारत सरकार की ओर से इस अभियान के तहत लोगों को बताना है कि बेटी है तो आपका कल है, इसलिए देश के 100 जिलों में इस योजना की शुरुआत हुई हैं जिसमें हरियाणा के 12 जिले शामिल हैं।
- क्योंकि हरियाणा, राजस्थान बेटियों की कमियों से जूझ रहा है, इसलिए भारत सरकार ने अपनी योजना की शुरुआत के लिए हरियाणा को चुना था।
- इस अभियान के तहत बेटी को कोख में मारने से रोका जायेगा।
- बेटियों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उन्हें पढ़ाया जायेगा।
- इसके लिए बेटियों की स्कूल फीस को माफ किया जायेगा।
- सरकार ने इस अभियान के लिए प्रचार अभियान लागू किये हैं।
इस बारे में सरकार ने लोगों से सुझाव पूछे जिसके बाद सरकार ने इस अभियान की नींव खड़ी की है।
लोगों ने क्या सुझाव दिये..
- मध्यमवर्गीय और गरीब लड़कियों के लिए शिक्षा फ्री होनी चाहिए।
- महंगी हो चुकी शिक्षा भी बेटियों के ना पढ़ने की वजह है।
- सरकार को हर लड़की को सस्ती या नि:शुल्क शिक्षा देनी चाहिए।
- अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार लड़कियों की पढ़ाई लिखाई पर होने वाले खर्च को कम कर देना चाहिए।
- लड़कियां ज्यादा काबिल बनेंगी तो लोग कन्या भ्रूण हत्या की ओर काम प्रेरित होंगे।
- लड़कियों को जुडो-कराटे आदि सिखाने के लिए सरकार को योजना बनानी चाहिए।
- स्कूलों में सेल्फ डिफेंस के कोर्स शुरू किये जाने चाहिये।
- बीमार होने पर लड़कियों के मुफ्त इलाज़ भी होना चाहिए।
- जिसके बाद सरकार ने यह खाका तैयार किया है
सरकारी खाका
- बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के मद्देनजर सरकार की ओर से की योजनाएं लागू हुई हैं।
- आर्थिक रूप ये बेटियों को मजबूत करने के लिए 'हरियाणा कन्या कोष' स्थापित किया गया है, जिसमें कोई भी व्यक्ति या संस्था स्वेच्छा से दान दे सकता है।
- इन पैसों का प्रयोग लड़की की पढाई और शादी में होगा।
- लिंगानुपात सुधार के लिए टास्क फोर्स कमेटी गठित की गई है।
- केन्द्र सरकार व राज्य सरकर द्वारा बेटियों के लिए 'सुकन्या समृद्धि खाता योजना' की भी शुरूआत की गईहै ताकि मां-बाप बच्ची के नाम पर निवेश करें।
- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च, 2015 से प्रदेश में 'आपकी बेटी-हमारी बेटी' योजना शुरू की गई है जिसके तहत 22 जनवरी, 2015 को या उसके बाद पैदा हुई अनुसूचित जाति और गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की पहली बेटी के जन्म पर 21,000 रुपये लड़की के नाम बैंक में जमा करवाए जाएंगे।
- इसके अलावा इस अभियान से सरकार देश की नामचीन चेहरों को जोड़ रही है जिसके जरिये लोग ज्यादा से ज्यादा इस बारे में जागरूक हों।
सफलता
हालांकि बीजेपी के केन्द्र में आने के बाद तो यह अभियान पूरे देश में लागू हो गया है, लेकिन इस अभियान को गुजरात सरकार काफी लंबे वक्त से चला रही है और वो इसमें सफल भी हुई है क्योंकि इस अभियान से जहां लड़कियों की संख्या और प्रगति दोनों में बढ़ोत्तरी हुई है।
पॉजीटिव इंडिया
अगर वाकई में जिस तरह से इस अभिृयान को प्रचार प्रसार मिल रहा है, तो वो दिन दूर नहीं जब हर घर में बेटी के जन्म पर लड्डू बांटे जायेंगे और हर मां बच्चे को जन्म देने से पहले किसी मेंटल ट्रामा से नहीं गुजरेगी। हर आंगन में मासूम कली मुस्कुरायेगी क्योंकि किसी बेटी के बाप की गर्दन नीचे नहीं होगी। लेकिन यह सब आसान नहीं है क्योंकि इस अभियान को सफल करने के लिए लोगों की मानसिकता बदलनी काफी जरूरी है इसलिए आईये सरकार की इस मुहिम में हम आप मन और तन से पूरा साथ दें ...आईये हम लोगों को बताये कि बेटी ही विकास की जननी है ..और बेटी है तो कल है..इसलिए बेटी बचाओ..कल बचाओ..।












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