Jodhpur: कई बार राजघराने के सदस्यों को चुना जोधपुर की जनता ने, लेकिन अशोक गहलोत सबसे ज्यादा बार जीते
देश में 18वीं लोकसभा के 543 सदस्यों के चुनाव के लिए 19 अप्रैल से 1 जून तक सात चरणों में मतदान होंगे और नतीजे 4 जून को घोषित किए जाएँगे। इन लोकसभा सीटों में राजस्थान की एक सीट ऐसी है जहां से एक राज घराने के पति, पत्नी और बेटी तीनों सांसद चुने गए।
वर्तमान में इस सीट पर गजेंद्र सिंह शेखावत सांसद है और वे केंद्र सरकार में जल शक्ति मंत्री है। हम बात कर रहे हैं मारवाड़ के सबसे बड़े शहर जोधपुर के संसदीय क्षेत्र की। आईए जानते हैं जोधपुर के राज परिवार के सदस्यों ने कब-कब चुनाव जीता और और वर्तमान में इस लोकसभा क्षेत्र की स्थिति क्या है।

पहला चुनाव महाराजा हनवंत सिंह ने जीता, लेकिन समर्थक जश्न नहीं मना पाए
आजादी के बाद 1952 में संपन्न हुए पहले लोकसभा के चुनाव में जोधपुर के युवा महाराजा हनवंत सिंह ने जोधपुर लोकसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ा। चुनाव के दौरान उनका नारा था, ''म्हे थांसू दूर नहीं'' उन्होंने जनता को संदेश दिया कि राजशाही के बाद लोकशाही में भी मैं आपसे दूर नही रहूंगा। यही वजह थी कि उनकी भारी जीत हुई।
25 जनवरी 1952 को मतगणना हो रही थी। मतगणना के दौरान अपनी बढ़त से खुश होकर 26 जनवरी को महाराजा हनुवंत सिंह अपने समर्थक ठाकुर माधोसिंह दीवान से मिलने चार्टर प्लेन से जालोर रवाना हुए। दुर्भाग्य से उनका विमान जवाई बांध के पास क्रेश हो गया और इस हादसे में उनकी मृत्यु हो गई। जब 29 जनवरी को परिणाम आए तो वे लोकसभा का चुनाव भारी मतों से जीते। लेकिन हनवंत सिंह की मात्र 29 वर्ष की आयु में अकाल मृत्यु के कारण जोधपुर की जनता जीत का जश्न नहीं मना सकी।
इस सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े महाराजा हनवंत सिंह को एक लाख 40 हजार मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के उम्मीदवार नूर मोहम्मद यासीन केवल 38017 वोट ही हासिल कर सके। उनके निधन के बाद देश में लोकसभा का पहला उपचुनाव हुआ, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी जसवंत सिंह मेहता विजयी रहे।
अब तक 18 चुनावों में कांग्रेस आठ, भाजपा पांच और चार बार निर्दलीय विजयी
जोधपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव सहित 18 चुनावों में कांग्रेस आठ बार जीती है। वहीं भाजपा पांच और चार बार निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे हैं। इस सीट पर राज परिवार के तीन सदस्य भी संंसद तक पहुंचे हैं। इनमें पति-पत्नी व बेटी शामिल हैं। इसमें सबसे पहले 1952 में महाराजा हनवंत सिंह, फिर 1971 में इनकी पत्नी कृष्णा कुमारी और बाद में इनकी बेटी चन्द्रेश कुमारी कटोच वर्ष 2009 में सांसद चुनी गई।
इस सीट पर सर्वाधिक जीत का रेकॉर्ड पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम है। वे यहां से पांच बार जीते। इन्होंने सबसे पहले चुनाव 1980 में लड़ा था। इसके बाद 1984 में भी जीते। लेकिन 1989 चुनाव में जसवंत सिंह जसोल से हार गए। बाद में उन्होंने जीत की हैट्रिक भी लगाई। वे वर्ष 1991, 1996 व 1998 में लगातार तीन बार जीते। इसके अलावा यहां से दो-दो बार जसवंत राज मेहता, जसवंत सिंह विश्नोई और वर्तमान सासंद गजेन्द्र सिंह शेखावत भी सांसद रहे हैं।
अब तक इन्होंने किया प्रतिनिधित्व
आजादी के बाद हुए लोकसभा चुनाव में वर्ष 1951-52 में हनुवंत सिंह (निर्दलीय), 1952 में जसवन्त राज मेहता स्वतंत्र (उपचुनाव), 1957 में जसवन्तराज मेहता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, 1962 में लक्ष्मीमल्ल सिंघवी (स्वतंत्र), 1967 में नरेंद्र कुमार सांघी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, 1971 में कृष्णा कुमारी (स्वतंत्र), 1977 में रणछोड़दास गट्टाणी जनता पार्टी, 1980 में अशोक गहलोत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई), 1984 में अशोक गहलोत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, 1989 में जसवन्त सिंह जसोल भारतीय जनता पार्टी, 1991 में अशोक गहलोत कांग्रेस, 1996 में अशोक गहलोत कांग्रेस, 1998 में अशोक गहलोत कांग्रेस, 1999 में जसवन्त विश्नोई भाजपा, 2004 में जसवन्त विश्नोई भाजपा, 2009 में चंद्रेश कुमारी कटोच कांग्रेस, 2014 में गजेंद्र सिंह शेखावत भाजपा व 2019 में गजेन्द्र सिंह शेखावत भाजपा से चुनाव जीत चुके हैं।
2019 में शेखावत ने मुख्यमंत्री के बेटे को हराया, इस बार उचियारड़ा से मुकाबला
छात्र संघ चुनावों से राजनीति में आए गजेंद्र सिंह शेखावत ने 1992 में सर्वप्रथम जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव जीता। बाद में स्वदेशी जागरण मंच और सीमा जन कल्याण समिति से जुड़े रहे। वर्ष 2014 में भाजपा के बैनर तले शेखावत ने लोकसभा चुनाव में राज परिवार की चंद्रेश कुमारी कटोच को पराजित किया।
वर्ष 2019 में भी मोदी लहर में हुए चुनाव में शेखावत का मुकाबला तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत से हुआ। उन्होंने वैभव को 2 लाख 70 हजार 114 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। बीजेपी ने इस बार फिर 2024 में गजेंद्र सिंह शेखावत पर भरोसा जताया है। वे हैट्रिक लगाने के लिए चुनावी मैदान में है। इस बार शेखावत का मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार करणसिंह उचियारड़ा से है। इस सीट की खासियत यह भी है कि यहां से जीतने वाले चार सांसदों अशोक गहलोत, जसवंतसिंह जसोल, चन्द्रेश कुमारी व गजेन्द्र सिंह शेखावत को केन्द्र में मंत्री पद मिला है।
लोकसभा की आठ में से सात विधानसभा पर भाजपा का कब्जा
वर्तमान में जोधपुर संसदीय क्षेत्र में भाजपा का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। नवंबर 2023 में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की आठ विधानसभाओं में से सात पर भाजपा काबिज है। सिर्फ एक सरदारपुरा सीट पर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधायक हैं। इसके अलावा जोधपुर शहर से अतुल भंसाली, सूरसागर से देवेंद्र जोशी, लूणी से जोगाराम पटेल, शेरगढ़ से बाबूसिंह राठौड़, लोहावट से गजेंद्र सिंह खींवसर, फलौदी से पब्बाराम विश्नोई व पोकरण से प्रताप पुरी सहित सभी भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं।
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