Pakistan Visa For Indians: जानें भारत से सिख और हिन्दू तीर्थयात्रियों के पाकिस्तान जाने के नियम
भारत और पाकिस्तान के बीच तय प्रोटोकॉल में जो प्रावधान हैं उनके अनुसार दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के यहां स्थित धार्मिक स्थलों की तीर्थयात्रा करने आ सकते हैं।

Pakistan Visa For Indians: सिक्ख गुरु श्री अर्जन देव के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित होने वाले वार्षिक उत्सव में भाग लेने के लिए भारत के 215 सिख तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान ने वीजा जारी किया है। सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान की अपनी यात्रा के दौरान गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब और गुरुद्वारा करतारपुर साहिब सहित कई पवित्र स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। साथ ही सभी यात्री 8-17 जून के दौरान आयोजित होने वाले महोत्सव में भी भाग लेंगे।
इस मामले पर पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से मंगलवार (6 जून) को एक बयान में कहा गया कि वीजा जारी करना 1974 के धार्मिक स्थलों की यात्राओं पर द्विपक्षीय प्रोटोकॉल को पूरी तरह से लागू करने की पाकिस्तान सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। हर साल, बड़ी संख्या में भारतीय यात्री विभिन्न धार्मिक उत्सवों पर पाकिस्तान जाते हैं।
क्या है 1974 का द्विपक्षीय प्रोटोकॉल?
भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत दोनों देश ऐसे तीर्थस्थलों की यात्रा की सुविधा हेतु निम्नलिखित सिद्धांतों पर सहमत हुए थे।
● धर्म या संप्रदाय के आधार पर बिना भेदभाव के एक देश से दूसरे देश में तीर्थयात्रा की अनुमति दी जाएगी।
● तीर्थयात्रियों की जो सहमति से बनी हुई सूची को समय-समय पर आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।
● प्रोटोकॉल के तहत भारतीय पक्ष में पांच मुस्लिम तीर्थस्थल और पाकिस्तानी पक्ष में 15 तीर्थस्थल शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश गुरुद्वारे हैं।
● प्रतिवर्ष एक देश से दूसरे देश में 20 दलों को यात्रा की अनुमति दी जा सकती है। इस संख्या को समय-समय पर संशोधित किया जा सकता है।
● यह सुनिश्चित करने के लिये हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिये कि सहमत सूची में उल्लिखित धार्मिक पूजा स्थलों का उचित रखरखाव हो और उनकी पवित्रता बनी रहे।
● ऐसे आगंतुकों/विजिटर्स को विजिटर कैटेगरी (Visitor Category) का वीजा दिया जाएगा।
भारत में प्रोटोकॉल द्वारा कवर किये गये स्थानों की सूची
● अजमेर शरीफ दरगाह, अजमेर, राजस्थान में सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती को समर्पित
● दिल्ली में सूफी संत निजामुद्दीन औलिया को समर्पित निजामुद्दीन दरगाह
● अमीर खुसरो, दिल्ली में सूफी संगीतकार अमीर खुसरो को समर्पित
● सरहिंद शरीफ, सरहिंद, पंजाब, भारत में मुजद्दिद अल्फ सानी
● हरिद्वार के पास सूफी संत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर को समर्पित कलयार शरीफ
पाकिस्तान में प्रोटोकॉल द्वारा कवर किये गये स्थानों की सूची
● हयात पिताफी, घोटकी में शादानी दरबार
● लाहौर में कटासराज धाम
● ननकाना साहिब के गुरुद्वारे
● गुरुद्वारा पंजा साहिब, हसन अब्दाल
● रणजीत सिंह की समाधि, लाहौर
● गुरुद्वारा डेरा साहिब, लाहौर
● गुरुद्वारा जन्म स्थान, ननकाना साहिब
● गुरुद्वारा दीवान खाना, लाहौर
● गुरुद्वारा शहीद गंज, सिंघानिया, लाहौर
● गुरुद्वारा भाई तारा सिंह, लाहौर
● छठे गुरु का गुरुद्वारा, मोजांग, लाहौर
● गुरु राम दास की जन्मस्थली, लाहौर
● गुरुद्वारा चेवीन पादशाही, मोजंग, लाहौर
● दाता गंज बख्श की दरगाह, लाहौर
● मीरपुर मथेलो, सिंध
पाकिस्तान में स्थित नानकदेव जी का तीर्थस्थान
पाकिस्तान में अनेक ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं, जहां पूरे साल उत्सवों का आयोजन होता रहता है। साथ ही गुरुनानक देव ने जीवन के अंतिम लगभग 16 वर्ष पाकिस्तान (तत्कालीन पंजाब क्षेत्र) में बिताए थे और गुरु ग्रंथ साहिब की अनेक वाणियों को संकलित किया था।
सिखों के लिहाज से करतारपुर का गुरुद्वारा दरबार साहिब बहुत पवित्र है। दरअसल, गुरु नानक देव जी ने यहीं अपनी देह का त्याग किया था। विभाजन के बाद यह गुरुद्वारा पाकिस्तान में चला गया। अतः भारत से बड़ी संख्या में सिखों का वहां आना-जाना लगा रहता था। मगर बीते सालों में पाकिस्तान से बनते-बिगड़ते रिश्तों के बीच करतारपुर जाने के लिये एक विशेष गलियारा बनाया गया है।
क्या है करतारपुर कॉरिडोर?
करतारपुर कॉरिडोर एक ऐतिहासिक स्थल को धार्मिक और आध्यात्मिक आधार पर भारत और पकिस्तान को जोड़ता है। इसके तहत आप बिना वीजा के भी पाकिस्तान जा सकते हैं कुछ शर्तों के साथ। दरअसल इस कॉरिडोर का निर्माण इसलिए किया गया था ताकि भारत के श्रद्धालु करतारपुर में गुरुद्वारे के दर्शन कर सकें, जो कि भारत-पाकिस्तान सीमा से लगभग 4.7 किमी दूर बना है।
करतारपुर कॉरिडोर बनाने के प्रस्ताव पहली बार 1999 में दोनों देशों के तत्कालीन नेताओं स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ के बीच चर्चा हुई थी। लेकिन, 26 नवंबर 2018 को भारत की ओर से और 28 नवंबर 2018 को पाकिस्तान की ओर से आधारशिला रखी गई थी। इस कॉरिडोर को 2019 में पूरा किया गया था और तीर्थयात्रियों के लिए 12 नवंबर 2019 को गुरु नानक की 550वीं जयंती मनाने के लिए खोला गया था। हालांकि 16 मार्च 2020 को कोरोना फैलने पर इस कॉरिडोर को बंद करना पड़ा था। वहीं नवंबर 2021 में इसे दोबारा खोल दिया गया।
करतारपुर कॉरिडोर को लेकर दोनों देशों के बीच समझौते?
● कोई भी भारतीय किसी भी धर्म या मजहब को मानने वाला हो, उसे इस यात्रा के लिए वीजा की जरूरत नहीं होगी।
● यात्रियों के लिए पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ईटीए) की जरूरत होगी।
● यह कॉरिडोर पूरे साल खुला रहेगा।
● भारतीय विदेश मंत्रालय यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की लिस्ट 10 दिन पहले पाकिस्तान को देगा।
● हर श्रद्धालु को 20 अमेरिकी डॉलर पाकिस्तान को देने होंगे।
● एक दिन में पांच हजार लोग इस कॉरिडोर के जरिए दर्शन के लिए जा सकेंगे।
● श्रद्धालुओं को इस यात्रा के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। आवेदकों के मेल और मैसेज के जरिए चार दिन पहले उनके आवेदन के कन्फर्मेशन की जानकारी दी जाएगी।
भारत-पाकिस्तान के रिश्ते कब हुए बेहद खराब?
भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद से ही रिश्ते तनावपूर्ण ही रहे हैं। अभीतक भारत और पाकिस्तान चार बार (1948, 1965, 1971 और 1999) में आमने-सामने आ चुके हैं। यही नहीं दर्जनों बार युद्ध जैसे हालात भी बने लेकिन किन्ही कारणों से वे टल गये। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक पूरी तरह से व्यापारिक, सांस्कृतिक रिश्ते कभी नहीं टूटे।
मगर 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा आत्मघाती हमला किया गया, जिसमें 40 भारतीय जवान शहीद हो गये। इस घटना के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को 1996 में दिया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लिया और वहां से आयात होने वाली चीजों पर कस्टम ड्यूटी 200 प्रतिशत तक बढ़ा दी।
इसके बाद भारत ने 5 अगस्त 2019 में जम्मू और कश्मीर में लागू संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया। जिससे पाकिस्तान तिलमिला उठा और राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ कई तीखे बयान दिये। उस वक्त पाकिस्तान सरकार ने भारत का दर्जा घटाकर अपने कारोबारी रिश्ते बंद कर दिये।
इसके बाद धीरे-धीरे भारत और पाकिस्तान के बीच तल्खी बढ़ती गयी और सारे रिश्ते टूटते चले गये। यहां तक कि पाकिस्तान ने तो दोनों देशों के बीच चलने वाली समझौता और थार एक्सप्रेस को रद्द कर दिया था।












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