Thieves on Salary: सैलरी पर चोर, और किराये पर भिखारी
काम चोरी का और वेतन 15,000, है ना मजेदार खबर। पर यह हकीकत है। हाल ही में ओडिसा के पुलिस अधिकारियों ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो लड़कों को नौकरी पर रखकर मोबाइल फोन की चोरी कराते थे। ये केवल मोबाइल ही नहीं चुराते थे, बल्कि उसके सिम कार्ड का उपयोग करके खातों से पैसे भी निकाल लेते थे।
बेरोजगारों को अपराध की दुनिया में धकेलने का यह अलग ही तरीका है। कुछ महीने पहले बेंगलुरु में कुछ ऐसी महिला भिखारियों को पकड़ा गया, जो दुखियारी माँ बनकर भीख मांगने के लिए बच्चे किराये पर ले कर आती थीं।

पहाड़ी गिरोह चलाता था थीफ एमपलॉयमेंट ब्यूरो
ओडिसा पुलिस ने 3 दिसंबर को जिन 8 लोगों को गिरफ्तार किया, वे सभी पेशेवर तरीके से काम करने वाले अपराधी हैं। ये 'पहाड़ी गिरोह' के नाम से अपना काला धंधा चला रहे थे। पहाड़ी गिरोह बाकायदा चोरी करने के लिए लड़कों को नौकरी पर रखता था। उनकी "काबिलियत" के अनुसार उन्हें 10,000 से 15,000 रुपये प्रति माह की सैलरी देता था।
इनके प्रशिक्षित चोर भीड़ बनाकर सार्वजनिक स्थानों से लोगों के मोबाइल फोन चोरी कर लेते थे और फिर गिरोह के सरगना सिम से बैंक की जानकारी निकाल कर खाते से पैसे गायब कर देते थे। कई बार सिम कार्ड का उपयोग करके पीड़ितों के खातों से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर भी कर देते थे। यह पहाड़ी गिरोह पुलिस के रडार पर तब आया जब एक व्यक्ति ने पुलिस स्टेशन में यह मामला दर्ज कराया कि उसके खाते से किसी ने धोखे से 14 लाख रुपये निकाल लिए हैं।
कई राज्यों में सक्रिय है गिरोह
ओडिसा पुलिस के अनुसार पहाड़ी गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है। इनके चोर कर्मचारी बस अड्डों, व्यस्त बाजारों और त्योहारों की भीड़ में समूह बनाकर घुस जाते हैं और लोगों के मोबाइल फोन चुरा लेते हैं और फिर चोरी के मोबाइल के सिम कार्ड का इस्तेमाल बैंक फ्रॉड के लिए करते हैं। भुवनेश्वर में उनसे 22 मोबाइल फोन, 25 सिम कार्ड, 20 मेमोरी चिप्स के साथ 1.3 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए।
ट्रैफिक रेड लाइट पर किराये का बच्चा लेकर खड़ी होती महिला भिखारी
क्या आप सोच सकते हैं कि गोद में बच्चा लेकर गिड़गिड़ाती एक माँ, भिक्षा मांगने के लिए हाथ बढ़ाती है तो वह कोई दुखियारी नहीं, बल्कि किराये का बच्चा लेकर नाटक कर रही होती है। कुछ महीने पहले बेंगलुरु पुलिस ने ऐसी ही कुछ महिलाओं को पकड़ा जो आठ घंटे के लिए 100 रुपये के हिसाब से किराए पर बच्चे लेकर आती थीं।
भिखारियों के पुनर्वास पर काम कर रहे एक एनजीओ चाइल्डलाइन का कहना है कि कुछ बचाव अभियानों के दौरान, उन्होंने पाया कि व्यस्त यातायात चौराहों पर भीख मांगने वाली कुछ महिलाओं ने अपने परिचितों के बच्चों को 100 रुपये में आठ घंटे के लिए किराए पर लिया था। कुछ मामलों में यह भी पाया गया कि बच्चों का अपहरण कर लिया गया था। पिछले साल बेंगलुरु की सड़कों से ऐसे ही 53 बच्चों को बचाया गया।
इस साल तमिलनाडु पुलिस ने भी स्माइल 3 प्रोग्राम के तहत ऐसे ही 121 बच्चों को खोज कर उनका बचाव किया। अभी भी दिल्ली समेत कई राज्यों में छोटे बच्चों के साथ भीख मांगती लड़कियां या औरतें दिखाई दे जाती हैं। ये बच्चों को किराए पर ही नहीं लातीं, बल्कि उन्हें नशीली दवाएं देकर सुला देती हैं और उन्हें बीमार बताकर लोगों से पैसे मांगती हैं।
इंडोनेशिया में भी बाल भिक्षा का आपराधिक सिंडिकेट
इंडोनेशिया में भी महिलाओं को अपने बच्चों को बांहों में लटकाए राजधानी जकार्ता में देखा जा सकता है। ये वहाँ आती जाती कार के ड्राइवरों को रोकती हैं। अधिकतर महिलाओं ने यहाँ भी आपराधिक सिंडिकेट के जरिए शिशुओं को किराए पर लिया हुआ है। बच्चों को चुप रखने के लिए नशीली दवाएं भी दी जाती हैं। पुलिस के अधिकारियों ने कइयों के खिलाफ कारवाई भी की है।
हाल ही में इंडोनेशिया के सामाजिक मामलों के मंत्री ट्राई रिस्माहरिनी ने आर्डर जारी कर सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को बुजुर्गों, बच्चों, विकलांगों या अन्य कमजोर समूहों का उपयोग कर भीख मांगने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इंडोनेशिया में ऑनलाइन और ऑफलाइन शोषणकारी और भीख मांगने की गतिविधियों को रोकने का नया आदेश 11 जनवरी से लागू हो रहा है। सभी क्षेत्रीय अधिकारियों से आगाह किया गया है कि वे ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से किसी भी शोषणकारी और भीख मांगने की गतिविधियों की रिपोर्ट पुलिस या नगरपालिका पुलिस को करें।












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