Namdhari Sikhs: नामधारी सिख जत्था जाएगा अयोध्या, टेकेंगे राम मंदिर में मत्था

"अयोध्या में राममंदिर का निर्माण हर भारतीय के लिए गौरव की बात है। रामलला के जन्मस्थान के लिए हुए आंदोलन में सिखों, विशेषकर नामधारी सिखों ने बहुत आहुति दी है। हमारा जत्था राममंदिर में मत्था टेकने इसी हफ्ते अयोध्या जा रहा है।"

नामधारी दरबार के उपाध्यक्ष जसवंत सिंह नामधारी ने वनइंडिया से बातचीत में बताया कि राम मंदिर का निर्माण सिखों के लिए भी बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि सिख समुदाय भी सैकड़ो साल से इसके लिए लड़ाई में शामिल थे।

Namdhari Sikh

जसवंत सिंह ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के गठन में भी नामधारी सिख नेता सतगुरु जगजीत सिंह शामिल रहे और मंदिर निर्माण में भी पूरा आर्थिक सहयोग हमने दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि राम जन्मभूमि आंदोलन की शुरुआत सिखों ने ही की थी और उनके योगदान को कोई भी भारतीय कभी नहीं भूल सकता। सिख समुदाय ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए बहुत कुछ किया है। अयोध्या में होने वाली हर कार सेवा में सिख समुदाय शामिल रहा है और पूरे पंजाब में अयोध्या जाकर रामलला का दर्शन करने की व्याकुलता है। सिख समुदाय अयोध्या में लंगर लगाकर राम भक्तों की सेवा करने वाला है।

नामधारी सिख ऐसी संगत है, जो सर्व धर्म समभाव में विश्वास रखती है। भारत में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली में बड़ी संख्या में नामधारी सिख तो हैं ही, थाईलैंड, कनाडा, अमेरिका और यूरोप में भी इनके काफी लोग हैं। इसी साल मार्च में नामधारी दरबार ने एक अंतरराष्ट्रीय सर्व धर्म सेमिनार का आयोजन किया था, जिसमें सभी धर्म के अनुयाई और नेता सम्मिलित हुए थे।

आजादी की लड़ाई में भी नामधारी सिखों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया था। संगठन के उपाध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि विदेशों में भारत की छवि बनाने और अलगाववादियों को पछाड़ने में भी नामधारी सिख कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। नामधारी सिख प्रधानमंत्री मोदी के साथ हर मुद्दे पर खड़े हैं, क्योंकि उनका मानना है कि मोदी जैसा काम किसी प्रधानमंत्री ने सिख बिरादरी के लिए नहीं किया।

जसवंत सिंह नामधारी ने कहा कि किस प्रधानमंत्री ने सिखों के सबसे बड़े बलिदान साहिबजादों की शहादत को सम्मान दिया। यह पीएम मोदी ही थे, जिन्होंने गुरूद्वारे जाकर साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह को मुगलों द्वारा क्रूरतापूर्ण तरीके से शहीद किए जाने की तारीख को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया और शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। सिख यह कैसे भूल सकते हैं। पिछली सरकारों ने तो इस घटना को जानने ही नहीं दिया। बच्चों को पढाई जाने वाली पुस्तकों में कभी इसका जिक्र भी नहीं किया गया। सिख समुदाय आने वाले 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस का आयोजन बड़े पैमाने पर करेंगे।

नामधारी दरबार के उपाध्यक्ष जसवंत सिंह ने यह भी दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में सिख अलगाववादी विचारधारा के लोगों की बड़ी हार होने वाली है। वैसे भी पंजाब में खालिस्तान आंदोलन का कोई असर नहीं है। विदेशों में भी इनकी गतिविधियां बंद होने लगी है। पन्नू या अन्य आतंकवादी अब सिर्फ मीडिया के जरिए ही कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि खालिस्तानी गुरपतवंत सिंह में हिम्मत है तो पंजाब आकर करे ना बात। छुपकर लोगों को भड़काने वाले सामने आकर बात करने की हिम्मत नहीं कर सकते है।

"जहां तक कनाडा या अमेरिका द्वारा भारत पर कुछ आक्षेप लगाने का प्रश्न है, तो मोदी सरकार माकूल जवाब दे रही है। इन देशों से यह पूछने में कोई बुराई नहीं है कि भारत के इन वांटेड लोगों को पनाह देने के साथ साथ भारत विरोधी गतिविधियां चलाने की छूट क्यों है। अमेरिका अपने दुश्मनों को कहीं भी जाकर मार आता है, लेकिन बाकी देशों से सवाल जवाब करता है। यह तो हिप्पोक्रेसी ही है।"

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