Nag Panchami: जातक की कुंडली में अगर है कालसर्प योग और राहु दोष तो नाग देवता की पूजा फलदायी
Nag Panchami: हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का विशेष महत्व है। यह एक प्रकार का उत्सव है, इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। इस दिन चांदी या तांबे के नाग एवं नागदेवता की प्रतीकत्मक तस्वीर की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से इस दिन कालसर्प दोष की पूजा होती है। अर्थात जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प और राहु दोष होता है, वे इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। अधिकतर जातक त्रिंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में यह पूजा करते हैं।
सावन मास में आती है दो नाग पंचमी
नाग देवता की पूजा का प्रचलन मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और झारखंड़ राज्यों में अधिक हैं। सावन मास में दो नागपंचमी तिथियां आती हैं। एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष। वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल नाग पंचमी का पर्व 7 जुलाई, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सावन के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सात जुलाई को प्रात: 3 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और 8 जुलाई को प्रात: 12 बजकर 17 मिनट पर खत्म होगी।

नाग पंचमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्पों को पौराणिक काल से ही देवता के रूप में पूजा जाता रहा है। इसलिए नाग पंचमी के दिन नाग पूजन का महत्व है। ऐसी भी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने वाले व्यक्ति को सांप के डसने का भय नहीं होता। इस दिन सर्पों को दूध से स्नान और पूजन कर दूध पिलाने से अक्षय-पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन घर के प्रवेश द्वार पर नाग चित्र बनाने की भी परम्परा है। मान्यता है कि इससे वह घर नाग-कृपा से सुरक्षित रहता है।
नागों की पूजा करने से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति
हिंदू धर्मग्रंथों और महाकाव्यों में सांपों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। महाभारत, नारद पुराण, स्कंद पुराण और रामायण जैसे ग्रंथों में सांपों से जुड़ी कई कहानियां मिलती हैं। जिनमें से एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा यह भी है कि जब कृष्ण यमुना नदी पर कालिया से लड़ते हैं और अंत में मनुष्यों को दोबारा परेशान न करने के वादे के साथ कालिया को माफ कर देते है। गरुड़ पुराण के अनुसार नाग पंचमी पर नागों की पूजा करने से भक्त को सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शिवलिंग पर पीतल के लोटे से जल चढ़ाएं
नागपंचमी के दिन व्रत रखने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस दिन नाग देवताओं की पूजा के बाद नागपंचमी के मंत्रों का जाप करना बहुत ही शुभ माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु की दशा चल रही है उन्हें भी नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। इससे लाभ मिलेगा। इस दिन शिवलिंग पर पीतल के लोटे से ही जल चढ़ाना चाहिए।
दोष मुक्ति के लिए नदी में चांदी के नाग- नागिन प्रवाहित करें
जिन जातकों की कुंडली में राहु और केतु की दशा चल रही है उन्हें भी नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। इस उपाय से राहु केतु दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा जिसकी जन्मकुंडली में कालसर्प दोष हो तो व्यक्ति को नाग पंचमी के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना चाहिए। इस दिन किसी नदी में चांदी की नाग- नागिन नदी में प्रवाहित कर दें। यह उपाय भी काल सर्प दोष से मुक्ति दिला सकता है। नागपंचमी के दिन व्रत रखें। व्रत रखने से व्यक्ति को कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही ब्राह्राण और जरूरतमदों को दान करना चाहिए। ऐसा करने से राहु- केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
नाग पंचमी से जुडी प्राचीन कथाएं एवं मान्यताएं
हिन्दू पुराणों के अनुसार ब्रह्माजी के पुत्र ऋषि कश्यप की चार पत्नियां थी। मान्यता यह है कि उनकी पहली पत्नी से देवता, दूसरी पत्नी से गरुड़ और चौथी पत्नी से दैत्य उत्पन्न हुए। परन्तु उनकी जो तीसरी पत्नी कद्रू थी, जिनका ताल्लुक नाग वंश से था, उन्होंने नागों को उत्पन्न किया। पुराणों के मतानुसार सर्पों के दो प्रकार बताए गये हैं - दिव्य और भौम। दिव्य सर्प वासुकि और तक्षक आदि हैं। इन्हें पृथ्वी का बोझ उठाने वाला और प्रज्ज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी बताया गया है। वे अगर कुपित हो जायें तो फुंफकार और दृष्टिमात्र से सम्पूर्ण जगत को नष्ट कर सकते हैं।
जबकि जो भूमि पर उत्पन्न होने वाले सर्प हैं, जिनकी दाढ़ों में विष होता है और जो मनुष्य को काटते हैं, उनकी संख्या अस्सी बताई गई है। अनन्त, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापदम, शंखपाल और कुलिक - इन आठ नागों को सभी नागों में श्रेष्ठ बताया गया है।
पौराणिक कथानुसार जनमेजय जो अर्जुन के पौत्र और परीक्षित के पुत्र थे, उन्होंने सर्पों से बदला लेने व नाग वंश के विनाश हेतु एक नाग यज्ञ किया क्योंकि उनके पिता राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नामक सर्प के काटने से हुई थी। नागों की रक्षा के लिए इस यज्ञ को ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने रोका था। जिस दिन इस यज्ञ को रोका गया उस दिन श्रावण मास की शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि थी और तक्षक नाग व उसका शेष बचा वंश विनाश से बच गया। मान्यता है कि यहीं से नाग पंचमी पर्व मनाने की परंपरा प्रचलित हुई।
-
Chaitra Navratri Day 7: आज है मां कालरात्रि का दिन, जानें मुहूर्त, पूजाविधि और महत्व? -
क्या भारत में 'LOCKDOWN' लगने वाला है? दुनियाभर में Energy Lockdown की शुरुआत! तेल संकट से आप पर कितना असर -
Badshah Caste: बॉलीवुड के फेमस रैपर बादशाह की क्या है जाति? क्यों छुपाया असली नाम? कौन-सा धर्म करते हैं फॉलो? -
Gold Silver Rate Today: सोने चांदी में जबरदस्त गिरावट, गोल्ड 8000, सिल्वर 13,000 सस्ता, अब ये है लेटेस्ट रेट -
Silver Rate Today: चांदी भरभरा कर धड़ाम! ₹10,500 हुई सस्ती, 100 ग्राम के भाव ने तोड़ा रिकॉर्ड, ये है रेट -
'Monalisa को दीदी बोलता था और फिर जो किया', शादी के 13 दिन बाद चाचा का शॉकिंग खुलासा, बताया मुस्लिम पति का सच -
Gold Rate Today: सोने के दामों में भारी गिरावट,₹10,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22k से 18k के भाव -
Mumbai Gold Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जारी है गिरावट, कहां पहुंचा रेट? -
15289 करोड़ रुपये में बिक गई राजस्थान रॉयल्स, कौन हैं खरीदने वाले काल सोमानी, IPL से पहले मचा तहलका -
Badshah Love Story: ‘टटीरी’ वाले रैपर बादशाह की दूसरी दुल्हन Isha Rikhi कौन हैं? कैसे परवान चढ़ा दूसरा इश्क? -
Iran Vs America: खत्म होने वाला है ईरान-इजराइल युद्ध! ट्रंप के बाद अब मोजतबा खामेनेई भी बातचीत के लिए तैयार -
VIDEO: BJP नेता माधवी लता ने एयरपोर्ट पर क्या किया जो मच गया बवाल! एयरपोर्ट अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग












Click it and Unblock the Notifications