जीवन-दर्शन: जो ईमानदार है, वो ही धनवान है
नई दिल्ली। बहुत समय पहले एक गांव में एक गरीब लकड़हारा रहा करता था, वो रोज जंगल से लड़की काटकर बाजार में बेचता था और उससे जो कमाई होती थी, उससे वो अपना घर चलाता था। रोजाना की तरह वो एक दिन नदी के किनारे पेड़ पर चढ़कर लकड़ियां काट रहा था, कि तभी अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूट गई, और नदी में जाकर गिर गई। वो एकदम से दुखी हो गया क्योंकि उसके पास नई कुल्हाड़ी खरीदने के पैसे नहीं थे।अपनी हालत देखकर उसे रोना आ गया और वो सुबक-सुबक होकर रोने लगा और सोचने लगा कि अब मैं कैसे अपना घर चलाऊंगा, मेरे बच्चों का पेट कैसे भरेगा।

एक देवता प्रकट हुए
अपनी हालत पर दुखी लकड़हारा उसी पेड़ के नीचे बैठ गया और अपने भाग्य को कोसने लगा कि तभी वहीं पर एक देवता प्रकट हुए और उन्होंने लकड़हारे से पूछा कि तुम रो क्यों रहे हो?

सोने की कुल्हाड़ी
दुखी मन से लकड़हारे ने अपना दुखड़ा कह सुनाया, उसकी व्यथा सुनकर वो देवता नदी में कूद गए और थोड़ी देर बाद वो एक सोने की कुल्हाड़ी लेकर पानी से बाहर आए और लकड़हारे से पूछे कि क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है।

लकड़हारे ने सच बोला
लकड़हारे ने सिर हिलाकर जवाब दिया कि नहीं, ये मेरा नहीं हैं। देवता ने फिर पानी में डुबकी लगाई और एक चांदी की कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकले लकड़हारे ने उसे भी मना कर दिया। तीसरी बार वो फिर पानी में कूदे और लोहे की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आए, जिसे देखते ही लकड़हारे ने कहा कि हां, ये ही मेरी कुल्हाड़ी है।

ईमानदारी ही सबसे बड़ा धन
देवता, लकड़हारे की ईमानदारी पर बहुत ज्यादा ही खुश हुए और बोले कि संकट की इस घड़ी में भी तुमने अपना ईमान नहीं छोड़ा, तुम एक नेक ईंसान हो इसलिए मैं तुम्हें तीनों कुल्हाड़ी देता हूं।

सीख
कहानी सिखाती है कि हमें कभी भी ईमानदारी का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए, जिसका ईमान साफ है वो दुनिया का सबसे अमीर आदमी है और उसे देर-सवेरे अपनी ईमानदारी का फल जरूर मिलेगा।












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