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Profile of CM Kamal Nath: संजय गांधी के जिगरी दोस्त, छिंदवाड़ा के 'भगवान'

नई दिल्ली। राहुल गांधी ने अनुभवी और लंबे अरसे से गांधी परिवार के करीबी और वफादार रहे कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री चुन लिया गया है। गुरुवार देर रात करीब 11 बजकर 15 मिनट पर मुख्यमंत्री के तौर पर उनके नाम का ऐलान कर दिया गया। राहुल गांधी के मुहर लगाने के बाद विधायकों की बैठक में कमलनाथ के नाम का ऐलान कर दिया गया।

चलिए इससे पहले जान लेते हैं कि आखिर कमलनाथ हैं कौन, जिन पर राहुल गांधी को इतना भरोसा है...

 Profile of Kamal Nath: संजय गांधी के जिगरी दोस्त, छिंदवाड़ा के भगवान

आपको बता दें कि कमलनाथ छिंदवाड़ा से 9 बार से सांसद रहे हैं, इसके साथ ही मप्र में चुनाव के दौरान सारा काम उन्होंने ही संभाल रखा था। कमलनाथ एक उत्कृष्ट और कुशल नेता रहे हैं।

 जन्म 18 नवम्बर 1946

जन्म 18 नवम्बर 1946

कमलनाथ का जन्म 18 नवम्बर 1946 को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में हुआ था। देहरादून के दून स्कूल से पढ़ाई करने के बाद कमलनाथ ने कोलकाता के सेंट ज़ेवियर कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की। वो 34 साल की उम्र में वो छिंदवाड़ा से जीत कर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे। आपको जानकर हैरत होगी कि उनका दिल्ली का कार्यालय 24 घंटे कार्यकर्ताओं के लिए खुला रहता है और वो चुनाव अभियानों के लिए हेलीकॉप्टरों और सैटेलाइट फोन इस्तेमाल करने वाले शुरूआती नेताओं में से एक हैं।

संजय गांधी से थी गहरी दोस्ती

संजय गांधी से थी गहरी दोस्ती

वैसे कमलनाथ का मध्यप्रदेश से सिर्फ राजनीतिक रिश्ता है। वह रहने वाले पश्चिम बंगाल के हैं। उनकी असली ताकत गांधी परिवार से उनकी पुरानी मित्रता है। संजय गांधी और कमलनाथ की दोस्ती के किस्से आज भी राजनीतिक गलियारों के हॉट टॉपिक्स में से एक हैं। कहा जाता है कि दोनों की मित्रता दून स्कूल से प्रारंभ हुई थी जो कि संजय गांधी के मौत के बाद ही खत्म हुई लेकिन संजय गांधी की दोस्ती ने उन्हें गांधी परिवार के बेहद करीब ला दिया।

हर मुश्किल से किया सामना

हर मुश्किल से किया सामना

कमलनाथ की छवि वैसे तो काफी साफ-सुथरे नेता की है लेकिन हवाला कांड में नाम आने की वजह से उन्हें 1996 में आम चुनाव नहीं लड़ पाए थे, तब पार्टी ने उनकी जगह उनकी पत्नी अलका को टिकट दिया था जो कि भारी मतों से विजयी हुई थीं। लेकिन जब एक साल बाद वो इस कांड में बरी हुए थे तो उनकी पत्नी ने छिंदवाड़ा की सीट से इस्तीफा दे दिया और कमलनाथ ने वापस वहां से चुनाव लड़ा लेकिन वो बीजेपी के सुंदरलाल पटवा से हार गए। हालांकि उनका नाम साल 1984 के पंजाबी दंगों में भी उछला था लेकिन कोई भी अपराध उनका सिद्ध नहीं हो पाया।

छिंदवाड़ा के लोग पूजते हैं कमलनाथ को

छिंदवाड़ा के लोग पूजते हैं कमलनाथ को

छिंदवाड़ा में कमलनाथ ने लोगों को रोजगार दिया, 1980 में छिंदवाड़ा की जनता ने कमलनाथ को 7वीं लोकसभा में भेजा। मूल रूप से छिंदवाड़ा एक आदिवासी इलाका माना जाता है। कमलनाथ ने यहां लोगों को रोजगार दिया और आदिवासियों के उत्थान के लिए कई काम किए इसलिए यहां के लोग कमलनाथ को पूजते हैं।

कमलनाथ को बिजनेस टायकून भी कहा जाता है

कमलनाथ को बिजनेस टायकून भी कहा जाता है

कांग्रेस के कार्यकाल में वे उद्योग मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, वन और पर्यावरण मंत्रालय, सड़क और परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राजनीति के अलावा कमलनाथ को बिजनेस टायकून भी कहा जाता है, वो 23 कंपनियों के मालिक हैं, जो उनके दोनों बेटे चलाते हैं।

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