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नई दिल्ली। इस महीने की 16-17 तारीख को चंद्रग्रहण है, ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ये आंशिक रूप से यूरोप, दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में दिखेगा।
16-17 सितंबर की रात को खगास चंद्रग्रहण होगा और भारतीय समय इस ग्रहण का प्रारंभ 16 सितंबर की रात लगभग 10.27 से होगा, जो कि बीच रात 2.24 तक रहेगा।
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चंद्रग्रहण से जुड़ी खास बातें
- चंद्रग्रहण वो खगोलीय स्थिति है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सरल रेखा में होते हैं
- चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है।
- चंद्रग्रहण का प्रकार और अवधि चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
- चंद्रग्रहण को आप बिना किसी स्पेशल चश्में के खुली आंखों से देख सकते हैं क्योंकि इससे आंखों को नुकसान नहीं होता।
- एक साल में अधिकतम तीन बार पृथ्वी के उपछाया से चंद्रमा गुजरता है।
- सूर्यग्रहण की तरह ही चंद्रग्रहण भी आंशिक और पूर्ण हो सकता है।
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चंद्रग्रहण भी आंशिक और पूर्ण
एक साल में अधिकतम तीन बार पृथ्वी के उपछाया से चंद्रमा गुजरता है। सूर्यग्रहण की तरह ही चंद्रग्रहण भी आंशिक और पूर्ण हो सकता है। इस महीने की 16-17 तारीख को चंद्रग्रहण है, ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

शादी में आती है अड़चनें
ऐसा माना जाता है कि चंद्रग्रहण कुंवारों के लिए अच्छा नहीं होता है क्योंकि सुंदरता का प्रतीक चंद्रमा तो श्रापित है और जो भी कुंवारा लड़का या लड़की उसे देखता है तो उसकी शादी या तो रूक जाती है या बहुत मुश्किलों से तय होती है।

चांद उग्र हो जाता है
चांद उग्र हो जाता है चांद का संबंध शीतलता से होता है लेकिन जब उस पर ग्रहण लगता है तो वो उग्र हो जाता है जिसका बुरा असर कुवांरे लड़के-लड़कियों पर पडता है इस कारण घर के बड़े ग्रहण को देखने से मना करते हैं।

चंद्र ग्रहण को शुभ नहीं
हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है। मत्स्य पुराण के अनुसार ग्रहण काल में ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। यहां तक कि इस दौरान लोगों को कोई भी शुभ काम करने से रोका जाता है।

खगोलीय घटना
हालांकि ये एक खगोलीय घटना है लेकिन भविष्यपुराण, नारदपुराण आदि कई पुराणों में चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण से संबंधित बातें लिखी हैं जिसमें कहा गया है कि इस दौरान किये गये काम से इंसान का नुकसान और अहित ही होता है।
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