Ludhiana Gas Leak: कितने सुरक्षित हैं हम जहरीली गैसों से? देशभर में हो चुके हैं रिसाव के दर्जनों हादसें
लुधियाना के गैस हादसे ने फिर से भोपाल गैस त्रासदी के जख्मों को ताजा कर दिया है। इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि बीतें सालों में देशभर में गैस रिसाव के मामलों में भारी इजाफा देखने को मिला है।

Ludhiana Gas Leak:पंजाब के लुधियाना में 30 अप्रैल (रविवार) की सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहां जहरीली गैस के रिसाव होने से 5 बच्चों समेत 11 लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग बेहोश हो गये। मरने वालों में 5 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। इस हादसे ने एक बार फिर से लोगों के जेहन में भोपाल गैस त्रासदी की याद ताजा कर दी है। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक भोपाल हादसे में करीब 3,787 लोग मारे गए थे। हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर हमेशा मतभेद रहा है।
वैसे लुधियाना में हुए हादसे को लेकर एनडीआरएफ के अधिकारियों ने जांच में पाया कि सुआ रोड स्थित सीवर मैनहोल में गैस H2S (हाइड्रोजन सल्फाइड ) थी। इस गैस की चपेट में आने से यह हादसा हुआ है। वहीं पंजाब में भगवंत मान सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की बात कही है।
इन सब के बीच यहां सवाल उठता है कि आखिर हम कितने सुरक्षित हैं इस तरह के हादसों से? भोपाल गैस लीक के बाद हुई त्रासदी के निशान आज भी मौजूद हैं। क्या यह इंसानी लापरवाही का मामला है या कोई दूसरी वजह? गौरतलब है कि बीतें सालों में देश के किसी न किसी हिस्से से ऐसी जहरीली गैसों के रिसाव की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं।
छत्तीसगढ़ भिलाई स्टील प्लांट में गैस रिसाव
जून 2014 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित भिलाई स्टील प्लांट में मीथेन गैस लीक हुई। जिसमें 30 से अधिक लोग बीमार पड़ गये, वहीं इस गैस लीक की चपेट में आने से 6 कर्मचारियों की मौत हो गई थी। ताज्जुब की बात यह है कि इस लापरवाही और घटना से सबक न लेते हुए भिलाई स्टील प्लांट में एक बार फिर से अक्टूबर 2018 में एक और हादसा हो गया। यहां गैस पाइपलाइन में ब्लास्ट हो गया था, जिसकी चपेट में आने से 14 लोगों की मौत हो गई थी।
भरूच में 4 मजदूरों की हुई मौत
3 नवंबर 2016 को भरूच जिले के दाहेज में गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड (जीएनएससी) की टीडीआई इकाई में गैस रिसाव के कारण चार मजदूरों की मौत हो गई थी और 13 गंभीर रूप से बीमार हो गये थे। जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। प्रथम दृष्टया में की गई जांच में बताया गया कि तकनीकी खराबी के कारण यह दुर्घटना घटी थी।
दिल्ली में जब हुआ गैस रिसाव
मई 2017 में दिल्ली के तुगलकाबाद में एक कंटेनर डिपो से गैस लीक होने से अफरातफरी मच गई थी। इसकी चपेट में आने से रानी झांसी सर्वोदय कन्या विद्यालय की 300 से ज्यादा छात्राएं बेहोश हो गईं थी। मजीदिया अस्पताल, सफदरजंग, बत्रा हॉस्पिटल समेत 4 से ज्यादा अस्पतालों में 310 के करीब छात्राओं को भर्ती कराया गया था। हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई थी।
सीतापुर में 7 लोगों की हुई मौत
6 फरवरी 2020 में उत्तर प्रदेश के सीतापुर की एक कालीन फैक्ट्री में गैस रिसाव की वजह से तीन बच्चों समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं फैक्ट्री क्षेत्र के आसपास कुछ कुत्ते भी मृत पाए गये थे। जांच में पाया गया था कि इस कारपेट फैक्ट्री के पास बगल की एसिड फैक्ट्री का एक टैंकर धोया गया था। संभवत: इससे भी गैस लीक हुई होगी।
विशाखापट्टनम में 11 लोगों की हुई मौत
7 मई 2020 में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के वेंकटपुरम गांव में तड़के ही एक केमिकल प्लांट से गैस लीक हो गई थी। यह गैस एलजी पॉलिमर्स इंडस्ट्री के प्लांट से लीक हुई और देखते ही देखते 4 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 5 छोटे गांवों में फैल गई। एक हजार से ज्यादा लोग बीमार हो गये। इस गैस लीक के कारण एक बच्चे समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 लोगों की स्थिति गंभीर हो गई थी।
वहीं जून, 2020 में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक दवा कंपनी में गैस लीक हुई थी। इस गैस लीक होने की वजह से 2 कर्मचारियों की मौत मौके पर हो गई थी, जबकि 4 लोगों को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। यह मामला विशाखापट्टनम के परवदा क्षेत्र का था। जहां एक Sainar Life Sciences नाम की फार्मा कंपनी में यह हादसा हुआ था।
मुंबई के घाटकोपर में हुआ गैस रिसाव
10 जनवरी 2022 को मुंबई के घाटकोपर इलाके में सुबह के समय गैस के रिसाव हो गया। इस गैस रिसाव से एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया। तब निगम के एक अधिकारी ने बताया था कि घटना नारायण नगर के कुर्ला इंडस्ट्रियल एस्टेट में सुबह करीब 8.15 बजे हुई जब वहां मेथनॉल और सायन्यूरिक क्लोराइड का रिसाव हो गया।
हिमाचल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश में हुए कई हादसे
इसी तरह कोरोना काल के दौरान समय-समय पर हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में गैस लीक से संबंधित हादसे हुए लेकिन वहां मौतें कम हुई लेकिन बीमार होने की खबरें जरूर आईं। जैसे 16 अप्रैल 2020 को हिमाचल प्रदेश के नालागढ में गैस लीक हुआ था जिसमें 1 की मौत हो गई थी लेकिन दर्जनों प्रभावित हुए थे।
इसी तरह जुलाई 2020 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गैस रिसाव की घटना हुई थी। भेलूपुर के जल संस्थान परिसर से गैस लीक होने की वजह से करीब 5 लोगों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें आनन-फानन में कबीरचौरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अगस्त 2020 में आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के एम बंडापल्ली गांव में हटसन डेयरी प्लांट में अमोनिया गैस का रिसाव हो गया था। इसमें अमोनिया गैस की चपेट में आने से 20 महिलाएं बीमार हो गईं थी। इस मामले पर तत्कालीन डीएम डॉ. नारायण भरत गुप्ता ने बताया कि वेल्डिंग पाइप टूटने की वजह से हटसन डेयरी प्लांट में अमोनिया गैस लीक हुई थी।
9 अक्टूबर 2020 को गोवा के मझगांव में कंकोलिम इंडस्ट्रियल एस्टेट में एक मछली प्रोसेसिंग प्लांट की कोल्ड स्टोरेज यूनिट में अमोनिया गैस का रिसाव हुआ जिसमें एक कर्मचारी की मौत हो गई थी। जबकि तीन वर्करों की हालत काफी खराब हो गई थी।
27 जून 2020 को आंध्र के कुरनूल जिले के नांदियाल की एक प्राइवेट फैक्ट्री में गैस रिसाव से एक की मौत हो गई थी और 3 लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया था। उस वक्त इस रिसाव के केवल फैक्ट्री क्षेत्र में ही प्रभावी होने की बात कही गई थी।
19 फरवरी 2020 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र से 20 किलोमीटर दूर शाहबाद मरकंडा में स्थित एक कोल्ड स्टोरेज यूनिट में गैस रिसाव की चपेट में कम से कम 45 लोग आये थे।
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2 फरवरी 2020 को उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित हल्दीराम बिल्डिंग में अमोनिया गैस लीक हो गयी। जिसकी वजह से एक कर्मचारी की मौत हो गई। गैस रिसाव के कारण उस इलाके से 300 लोगों को हटाया गया था।












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