Lucid Dreaming: कितना अच्छा सपना था वो... अब विज्ञान ने समझाया ऐसे सपनों का राज!
Lucid Dreaming: वैज्ञानिकों ने 'ल्यूसिड ड्रीमिंग' के दौरान दिमाग की एक खास गतिविधि पहचानी है, जिसमें इंसान सपना देखते हुए भी यह समझता है कि वह सपना देख रहा है। यह अध्ययन बताता है कि नींद के बीच भी हमारा दिमाग पूरी तरह सचेत हो सकता है।

ल्यूसिड ड्रीमिंग आमतौर पर REM (रैपिड आई मूवमेंट) नींद के दौरान होती है, जिसमें सपना बेहद साफ और यथार्थ लगता है। कई बार सपने देखने वाले को अपने सपने पर कुछ हद तक नियंत्रण भी होता है। नीदरलैंड्स के रैडबाउड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने दुनिया भर की स्लीप लैब्स से डेटा जुटाकर इस पर अब तक का सबसे बड़ा अध्ययन किया है।
क्या कहती है रिसर्च?
जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, ल्यूसिड ड्रीमिंग के दौरान दिमाग की गतिविधि सामान्य REM नींद और जागृत अवस्था से अलग होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस दौरान गामा वेव्स (जो याददाश्त को दुरुस्त रखती हैं) कमजोर पड़ जाती हैं। साथ ही, दिमाग के सेंट्रल और पैराइटल हिस्सों में 'बीटा एक्टिविटी' (जागरूकता से जुड़ी) भी घट जाती है। ये वे हिस्से हैं जो स्पर्श, तापमान और दबाव जैसी संवेदनाओं को प्रोसेस करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये बदलाव हमारी समझ, याददाश्त, आत्म-जागरूकता और नियंत्रण क्षमता से जुड़े हो सकते हैं।
क्यों है यह खोज अहम?
ल्यूसिड ड्रीमिंग पर शोध चेतना (consciousness) के रहस्यों को समझने में मदद करता है। साथ ही, इसका इस्तेमाल डिप्रेशन, एंग्जाइटी और बुरे सपनों (nightmare disorder) के इलाज में भी हो सकता है। हालांकि, अब तक छोटे सैंपल साइज और अलग-अलग EEG तकनीकों की वजह से इस क्षेत्र में प्रगति धीमी रही है। शोध के प्रमुख लेखक कागाताय डेमिरेल के मुताबिक, "यह अध्ययन नींद और जागने की पारंपरिक धारणा को चुनौती देता है।" वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इससे मानव चेतना को समझने में नई राह मिल सकती है।












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