क्या दिल्ली के दिल चांदनी चौक में बीजेपी लगा पायेगी जीत की हैट्रिक?
Chandni Chowk Lok Sabha Seat: लोकतंत्र के महापर्व 2024 लोक सभा चुनाव का दूसरा चरण भी संपन्न हुआ। अभी 5 चरण बाकी हैं, जिसमें राजधानी दिल्ली में मतदान 25 मई को होगा। राजधानी दिल्ली में 7 लोकसभा की सीटें हैं, जिनमें से महत्त्वपूर्ण एक सीट है - चांदनी चौक।
चांदनी चौक लोकसभा सीट का उदय पहले आम चुनाव 1951-52 के उपरांत 1956 में हुआ। राजधानी दिल्ली में पहले आम चुनाव के दौरान मात्र 3 लोकसभा सीटें (नई दिल्ली, दिल्ली सिटी व आउटर दिल्ली) थीं।

उसके उपरांत दूसरे आम चुनाव (1957) से पूर्व दिल्ली सिटी लोकसभा को विभाजित कर चांदनी चौक व दिल्ली सदर कर दिया गया, यानी इस आम चुनाव के दौरान दिल्ली में 4 लोकसभा सीटें हो गई। (1952 व 1957 के आम चुनाव में आउटर दिल्ली डबल मेंबर सीट थी।)
वर्ष 1966 से 1993 तक चांदनी चौक लोकसभा में 8 विधानसभा सीटें (सिविल लाईंस, चांदनी चौक, बल्लीमारान, अजमेरी गेट, कूचापति राम, मटिया महल, पहाड़गंज व कसाबुपरा) थीं। इसके उपरांत 1993 से 2008 तक इसमें सिर्फ 6 विधानसभा सीटें (पहाड़गंज, मटिया महल, बल्लीमारान, चांदनी चौक, मिंटो रोड़ व रामनगर) रही।
वर्ष 2008 के परिसीमन के उपरांत चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र में 10 विधानसभा सीटें (आदर्श नगर, शालीमार बाग, शकूर बस्ती, त्रिनगर, वजीरपुर, मॉडल टाउन, सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल व बल्लीमारान) हो गईं। मतदाताओं की जनसंख्या का अगर आंकलन करें तो इस लोकसभा पर करीब 16 लाख मतदाता है। जिनमें से करीब 8.5 लाख पुरूष व लगभग 7.5 लाख महिला वोटर हैं। चांदनी चौक लोकसभा पर करीब 20.34 फीसदी मुसलमान वोटर हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 21.14 फीसदी, जैन 1.24 फीसदी तथा सिख 2.26 फीसदी हैं।
1957 व 1962: कांग्रेस की विजय
इस लोकसभा सीट पर पहले चुनाव (1957) में कांग्रेस को भारी बहुमत मिला। कांग्रेस उम्मीदवार राधा रमन 43.01 प्रतिशत वोट प्राप्त कर निर्वाचित हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार बंसत राव को लगभग 14 हजार वोटों से हराया। वर्ष 1962 के आम चुनाव में भी इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस का ही बोलबाला रहा। इस बार कांग्रेस उम्मीदवार श्याम नाथ को 49.98 प्रतिशत मतदान मिला। वहीं जनसंघ उम्मीदवार अमृत लाल जिंदल को 29.17 फीसदी वोट प्राप्त हुए और वे कांग्रेस उम्मीदवार से करीब 29 हजार वोटों से हार गये।
1967: जनसंघ की जीत
1962 में हुए भारत-पाक युद्ध के कारण 1967 के आम चुनाव में कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ। जिसके चलते चांदनी चौक लोकसभा सीट भारतीय जनसंघ के खाते में चली गई। भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी आर. गोपाल ने कांग्रेस उम्मीदवार एस. नाथ को लगभग 17 हजार वोटों से हराया।
1971: फिर जीती कांग्रेस
कांग्रेस उम्मीदवार सुभ्रदा जोशी ने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार राम गोपाल शालवाले को 45 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। कांग्रेस को जहां 64.15 फीसदी वोट प्राप्त हुए, वहीं भारतीय जनसंघ को 31.52 फीसदी वोट मिले। बाकी सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
1977: जनता पार्टी की लहर
इमरजेंसी के उपरांत बनी जनता पार्टी में सभी विपक्षी दलों का विलय हुआ और सभी ने भारतीय लोकदल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा। विपक्ष ने इस आम चुनाव में चांदनी चौक से सिकंदर बख्त को अपना उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार सुभ्रदा जोशी को भारी मतों (लगभग 1 लाख 16 हजार) से मात दी। सिकंदर बख्त को 71.91 फीसदी वोट मिले, जबकि कांग्रेस को मात्र 27.03 फीसदी।
1980, 1984 व 1989: कांग्रेस की हैट्रिक
लोक सभा चुनाव 1980, 1984 व 1989 में राजधानी दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। लगातार तीन चुनावों में विजय प्राप्त करके कांग्रेस ने यहां अपनी हैट्रिक पूरी की। 1980 में भीकू राम जैन (47.33 फीसदी) ने जनता पार्टी उम्मीदवार व तत्कालीन सांसद सिंकदर बख्त को करीब 17 हजार वोटों से हराया। 1984 के चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश अग्रवाल ने भारतीय जनता पार्टी के सिकंदर बख्त को 28 हजार से भी ज्यादा वोटों से मात दी। 1989 में कांग्रेस के तत्कालीन सांसद जयप्रकाश अग्रवाल ने बीजेपी प्रत्याशी सतीश चन्द्र खण्डेलवाल को करीब 9 हजार मतों से हरा दिया।
1991: कड़े मुकाबले में बीजेपी की जीत
लोक सभा चुनावों के प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या के पहले जिन सीटों पर मतदान हो चुका था, उनमें चांदनी चौक लोकसभा सीट पर तत्कालीन सांसद जयप्रकाश अग्रवाल (कांग्रेस) व बीजेपी प्रत्याशी ताराचन्द्र खण्डेलवाल के बीच हुए कड़े मुकाबले में बीजेपी को जीत मिली। बीजेपी ने कांग्रेस को 2 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया।
1996: कांग्रेस ने फिर दर्ज की जीत
कांग्रेस ने इस बार भी अपने पूर्व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने बीजेपी प्रत्याशी जे.के. जैन को करीब 22 हजार मतों से शिकस्त दी। कांग्रेस ने 44.92 फीसदी तथा बीजेपी ने 34.13 फीसदी वोट प्राप्त किये, जबकि अन्य सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
1998 व 1999: बीजेपी फिर विजयी
आम चुनाव 1998 में चांदनी चौक लोकसभा सीट पर काटे की टक्कर रही। जिसमें जीत बीजेपी प्रत्याशी विजय गोयल की हुई। उन्होंने 4 हजार से भी ज्यादा वोटों से कांग्रेस उम्मीवार जयप्रकाश अग्रवाल को पराजय किया। एक साल में ही अटल बिहारी वाजपेई सरकार गिर जाने के कारण हुए मध्यावधि चुनाव 1999 में भी बीजेपी उम्मीदवार विजय गोयल ने कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश अग्रवाल को कड़े संघर्ष में लगभग 2 हजार मतों से हराया।
2004 व 2009: कांग्रेस ने फिर किया कब्जा
14वीं लोकसभा चुनाव के दौरान चांदनी चौक की सीट पर एकतरफा मुकाबला रहा। कांग्रेस उम्मीदवार कपिल सिब्बल ने बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी को लगभग 80 हजार वोटों से मात दी। ऐसा ही मुकाबला आम चुनाव 2009 में भी देखने को मिला। जिसमें कपिल सिब्बल ने बीजेपी उम्मीदवार विजेन्दर गुप्ता को 2 लाख से भी ज्यादा वोटों से शिकस्त दी।
2014 व 2019: बीजेपी ने हासिल की जीत
वर्ष 2014 व 2019 के आम चुनाव में चांदनी चौक लोकसभा सीट पर बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की। 2014 के दौरान बीजेपी प्रत्याशी डॉ. हर्षवर्धन ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष को 1 लाख 36 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। वहीं 2019 के दौरान डॉ. हर्षवर्धन ने कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश अग्रवाल को लगभ 2 लाख 29 हजार वोटों से करारी शिकस्त दी।
2024: क्या कहते हैं आंकड़े
राजधानी दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा पर अभी तक 16 लोकसभा चुनाव हुए है। जिसमें से 9 बार कांग्रेस, 6 बार भारतीय जनता पार्टी तथा एक बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। इस लोकसभा पर कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जिसने हैट्रिक लगाई है। वैसे बीजेपी भी इस बार हैट्रिक पर है। देखना होगा कि क्या भारतीय जनता पार्टी भी इस लोकसभा सीट पर अपनी हैट्रिक लगा पाती है?
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