Lal Bahadur Shastri: नदी तैर कर स्कूल जाने वाले लाल बहादुर ने दृढ़ निश्चय से पाया देशवासियों का सम्मान
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की आज पुण्यतिथि है। अपनी सादगी के लिए प्रसिद्ध शास्त्री जी की सलाह पर उनकी पत्नी ने भी आजीवन खादी वस्त्रों का इस्तेमाल किया।

Lal Bahadur Shastri: भारत के दूसरे प्रधानमंत्री (1964-1966) लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन में 'नन्हे' के नाम से पुकारा जाता था। उनके पिता का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव और माता का नाम रामदुलारी देवी था। शास्त्री जी के पिता एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे।
जब शास्त्री जी डेढ़ साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद, शास्त्री जी अपनी मां के साथ ननिहाल चले आये। फिर 1917 में वे बनारस आ गये। वहां पर उन्होंने पहले दयानंद हाई स्कूल में, फिर सातवीं से दसवीं तक की पढ़ाई हरीश चंद्र हाई स्कूल से की। उन्हें अपनी स्कूली शिक्षा के लिए नंगे पांव पैदल जाना पड़ता था। शास्त्री जी के बारे में यह भी कहा है कि वे नदी तैर कर पार करके स्कूल जाया करते थे।
तो ऐसे बने लाल बहादुर 'शास्त्री'
जब शास्त्री जी छठी क्लास में थे, तब उनका नाम स्कूल में लाल बहादुर वर्मा के नाम से रजिस्टर्ड था। उस समय वे 12 वर्ष के थे। उन्होंने अपने परिवार वालों से कहा कि मैं अपना जातिगत उपनाम 'वर्मा' नहीं रखना चाहता, क्योंकि मुझे जातिसूचक शब्द पसंद नहीं है। उन्होंने 'वर्मा' उपनाम हटाने के लिए स्कूल के हेडमास्टर बसंत लाल वर्मा से आग्रह किया। हेडमास्टर ने उनके इस आग्रह को स्वीकार कर लिया। इस तरह लाल बहादुर वर्मा केवल लाल बहादुर बन गये। जब लाल बहादुर ने 1925 में काशी विद्यापीठ से स्नातक किया और उन्हें 'शास्त्री' की उपाधि दी गई, तो उन्होंने अपने नाम के साथ शास्त्री लगा लिया। आगे चलकर इसी नाम 'लाल बहादुर शास्त्री' को दुनियाभर में पहचान मिली।
गांधी जी की प्रेरणा से स्वतंत्रता आंदोलन में लिया भाग
लाल बहादुर ने महज 16 वर्ष की उम्र में ही महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे असहयोग आंदोलन में भाग लेने का फैसला किया। इस दौरान वे पहली बार जेल भी गये, लेकिन कम उम्र के होने की वजह से उन्हें छोड़ दिया गया। बाद में गांधीजी की प्रेरणा से उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के कई आंदोलनों में भाग लिया और इस दौरान वे अलग-अलग मामलों में लगभग नौ सालों तक ब्रिटिश जेलों में भी रहे।
शास्त्री जी के कहने पर उनकी पत्नी ने अपनाई खादी
साल 1928 में लाल बहादुर शास्त्री का विवाह मिर्जापुर की ललिता देवी से हुआ। शास्त्री जी ने भेंट या दहेज स्वरूप सिर्फ एक जोड़ी खादी के कपड़े और एक चरखे को स्वीकार किया। शास्त्री जी के जीवनीकार सी.पी. श्रीवास्तव ने अपनी पुस्तक 'Lal Bahadur Shastri: A Life of Truth in Politics' में लिखते है कि "शास्त्री जी की पत्नी श्रीमती ललिता देवी से एक बार बातचीत के दौरान मैंने पूछा कि क्या उन्हें उनके विवाह के समय का कोई प्रसंग याद है, जो शास्त्री जी ने उनसे साझा किया हो?"
ललिता देवी ने कहा कि "हमारी शादी के बाद शास्त्री जी ने मुझसे कहा कि आप एक अच्छे परिवार से हैं और आप मुझसे अधिक समृद्ध व्यक्ति से शादी कर सकती थीं। लेकिन, अब जब आप मुझसे शादी कर चुकी है, तो मैं आपको सुझाव दूंगा कि अपने भविष्य की खुशी और संतोष के लिए, आपको उन लोगों को देखना चाहिए, जो हमसे भी कम भाग्यशाली हैं।"
सी.पी. श्रीवास्तव ने अपनी पुस्तक में लिखा है, "ललिता देवी शास्त्री जी से करीब सात साल छोटी थी। वह बेहद परिपक्व महिला भी थी। वे लाल बहादुर शास्त्री की पृष्ठभूमि से अवगत थीं। उन्होंने अपने पति की सलाह को सहर्ष स्वीकार किया।"
ललिता देवी ने सी.पी. श्रीवास्तव को यह भी बताया कि शादी के बाद जब वह घर के अंदर थीं, तो शास्त्री जी ने उन्हें एक संदेश भेजा कि वह अपनी रेश्मी साड़ियों का त्याग कर दें और सिर्फ खादी की सूती साड़ियां ही पहनें। इसके बाद ललिता देवी ने आजीवन खादी की साड़ियां ही पहनीं। ललिता देवी शास्त्री जी को अपना आदर्श मानती थीं। जब 13 अप्रैल 1993 को ललिता देवी का निधन हो गया, तो उनका अंतिम संस्कार नई दिल्ली स्थित शास्त्री जी के समाधि स्थल 'विजय घाट' के पास में ही किया गया।
जब दिया 'जय जवान, जय किसान' का नारा
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बेंस जॉनसन ने प्रधानमंत्री शास्त्री को धमकी दी कि अगर आपने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई बंद नहीं की, तो हम आपको गेहूं भेजना बंद कर देंगे। उस समय भारत गेहूं के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं था। अमेरिकी राष्ट्रपति की यह धमकी प्रधानमंत्री शास्त्री को अच्छी नहीं लगी।
प्रधानमंत्री शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री के अनुसार, "शास्त्री जी ने देशवासियों से अपील की कि हम सप्ताह में एक वक्त भोजन नहीं करेंगे। इसके कारण अमेरिका से आने वाले गेहूं की भरपाई हो जाएगी। लेकिन, इस अपील से पहले उन्होंने अपनी पत्नी ललिता शास्त्री से कहा कि क्या आप ऐसा कर सकती हैं कि आज शाम हमारे यहां खाना न बने। क्योंकि, पहले मैं यह देखना चाहता हूं कि मेरे बच्चे भूखे रह सकते हैं या नहीं। जब उन्होंने देख लिया कि हम एक वक्त बिना खाए रह सकते हैं, तो उन्होंने देशवासियों से भी ऐसा करने की अपील की।" इसी दौरान शास्त्री जी ने 'जय जवान, जय किसान' का नारा भी दिया।
गजब की खुद्दारी की मिसाल थे प्रधानमंत्री शास्त्री
1963 में कामराज प्लान के तहत शास्त्री को प्रधानमंत्री नेहरू के मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देना पड़ा। उस समय वे भारत के गृहमंत्री थे। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर के मुताबिक, "जब एक शाम वे शास्त्री के घर पर गए, तो ड्राइंग रूम को छोड़कर पूरे घर में अंधेरा छाया हुआ था। शास्त्री वहां अकेले बैठकर अखबार पढ़ रहे थे। नैयर ने शास्त्री जी से पूछा कि बाहर बत्ती क्यों नहीं जल रही है? तो शास्त्री जी ने कहा कि अब से मुझे इस घर का बिजली बिल अपने घर से देना पड़ेगा। इसलिए पूरे घर में बत्ती जलाना मेरे लिए सामर्थ्य में नहीं है।
जब अयूब खान पर कसा तंज
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान पर तंज कसते हुए कहा कि कहा कि "अयूब साहब कहते रहे कि हमें क्या हम तो अपने सैकड़ों टैंकों को लेकर आगे बढ़ेंगे और टहलते हुए दिल्ली पहुंच जाएंगे। तो इस तरह से टहलते हुए, घूमते हुए दिल्ली में उनका आने का इरादा था और जब यह इरादा हो तो हम भी थोड़ा लाहौर की तरफ टहलकर चले गए, तो मैं समझता हूं कि हमने कोई गलत बात तो नहीं की।"
ताशकंद में रहस्यमयी मौत
साल 1966 में लाल बहादुर शास्त्री पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के साथ शांति समझौता करने के लिए ताशकंद गए थे। इस शांति समझौते की मध्यस्थता की जिम्मेवारी सोवियत संघ ने ली थी। 10 जनवरी 1966 को भारत और पाकिस्तान ने ताशकंद में इस समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते के एक दिन के अंदर ही 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में ही प्रधानमंत्री शास्त्री का रहस्यमयी तरीके से निधन हो गया। 1966 में दिवंगत प्रधानमंत्री शास्त्री जी को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
यह भी पढ़ें: Lal Bahadur Shastri: गरीबी से लड़ने वाले देश के 'लाल' बहादुर की पुण्यतिथि आज, गडकरी ने किया याद
-
प्यार में ये कैसा पागलपन? महेश भट्ट के लिए सड़क पर बिना कपड़ों के दौड़ीं ये फेमस एक्ट्रेस, फिर हुआ दर्दनाक अंत -
Sone ka Bhav: जंग के बीच सोने में बड़ी गिरावट! 7000 रुपये सस्ता, क्यों गिर रहा है भाव? आज का लेटेस्ट Gold Rate -
Weather Delhi NCR: दिल्ली में कब साफ होगा मौसम? दो दिन बाद फिर लौटेगी बारिश, IMD के अलर्ट ने बढ़ाई टेंशन -
Hyderabad Gold Silver Rate Today: ईद के मौके पर सोना-चांदी ने किया हैरान, जानें कहां पहुंचा भाव? -
Gold Rate Today: सोना सस्ता या अभी और गिरेगा? Tanishq से लेकर Kalyan, Malabar तक क्या है गहनों का भाव? -
Iran Espionage Israel: दूसरों की जासूसी करने वाले इजरायल के लीक हुए सीक्रेट, Iron Dome का सैनिक निकला जासूस -
Petrol Price Hike: ईरान जंग का पहला झटका! पावर पेट्रोल हुआ महंगा, इतना बढ़ा दाम, चेक करें लेटेस्ट रेट -
Weather UP: लखनऊ में 60KM की स्पीड से चलेंगी हवाएं! इन 26 जिलों में बारिश के साथ ओले गिरने का अलर्ट -
धामी मंत्रिमंडल में शामिल हुए ये 5 विधायक, दिल्ली से नाम हुए फाइनल, कुछ नामों ने चौंकाया, जानिए पूरी लिस्ट -
Surya Midha Net Worth: कौन हैं 22 साल के सूर्या मिधा? जकरबर्ग को पछाड़ बने सबसे युवा अरबपति? अथाह है संपत्ति -
Petrol Price: पेट्रोल के बाद Industrial Diesel भी महंगा, आपके शहर में कहां पहुंचा रेट? -
VIDEO: राष्ट्रपति ने प्रेमानंद महाराज को देखते ही किया प्रणाम! सादगी ने जीता दिल, क्या हुई आध्यात्मिक चर्चा?












Click it and Unblock the Notifications