IPL Players: किसी ने गोलगप्पे बेचे तो किसी ने लगाया झाड़ू-पोंछा, जानिये आईपीएल के इन पांच उभरते खिलाड़ियों को
देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन सही मंच और मौके न मिलने के चलते वे अपना हुनर नहीं दिखा पाते। मगर आईपीएल ने गरीब पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपना खेल दिखाने के भरपूर अवसर दिए हैं।

इंडियन प्रीमियर लीग का 16वां सीजन चल रहा है। हम जानते है कि आईपीएल में खेल रहे खिलाड़ियों को हर साल लाखों-करोड़ों रुपयों के बदले टीमों में शामिल किया जाता है। इसमें विदेशों टीमों के खिलाड़ियों के साथ-साथ राष्ट्रीय टीम के भी खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। मगर इन सबके बीच गरीबी और सामान्य पृष्ठभूमि की कई युवा प्रतिभाओं को भी आईपीएल खेलने का मौका मिलता है। आइये जानते हैं ऐसे पांच खिलाड़ियों को जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर इस 'जेंटलमैंन' गेम में अपना नाम रोशन किया।
यशस्वी जायसवाल
यशस्वी जायसवाल का जीवन गरीबी और संघर्षों से भरा रहा है। उनका जन्म 28 दिसंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के सुरियावां, भदोही जिले में हुआ था। उनके पिता का एक छोटा हार्डवेयर स्टोर है और उनकी मां एक गृहिणी। जायसवाल छह भाई-बहनों में चौथे हैं। एक पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ी बनने के अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने आठ साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था। अपने संघर्ष के दिनों में यशस्वी क्रिकेट के मैदान पर एक तंबू में सोते थे। जायसवाल ने तीन सालों तक एक स्ट्रीट वेंडर के रूप में पानीपूरी (गोल्पप्पे) भी बेची थी। जायसवाल की प्रतिभा को एक क्रिकेट कोच ज्वाला सिंह ने पहचाना, जिन्होंने उन्हें रहने की जगह दी और बाद में वह उनके कानूनी अभिभावक बन गये।
रिंकू सिंह
रिंकू सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1997 को एक गरीब परिवार में हुआ था। एक समय ऐसा भी आया जब रिंकू ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सफाई कर्मचारी का काम भी किया। रिंकू के पिता घरों में एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी करते थे, जबकि एक भाई ऑटोरिक्शा चलाता था। रिंकू के परिवार के पास अपना खुद का मकान नहीं था। वह लोग एलपीजी वितरण केंद्र के परिसर में बने एक बेहद छोटे से कमरे में रहते थे, जहां उनके पिता काम करते थे। रिंकू ने एक इंटरव्यू में बताया कि शुरुआती दिनों में जब भी वह क्रिकेट खेलते थे तब उनके पिता उन्हें पीटते थे।
मोहम्मद सिराज
मोहम्मद सिराज का भी जीवन गरीबी और संघर्षों से भरा रहा है। सिराज का जन्म 13 मार्च 1994 को हैदराबाद में हुआ था। वह एक रिक्शा चालक, मोहम्मद गौस के बेटे हैं। सिराज के पिता उन्हें हैदराबाद के उप्पल स्टेडियम में जाने और प्रैक्टिस के लिए प्रतिदिन केवल ₹60 देते थे। सिराज को क्रिकेट के शीर्ष स्तर तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। नवंबर 2020 में जब सिराज भारतीय टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेलने गये तब ही उनके पिता का निधन हो गया। सिराज के पिता के निधन के समय वह 14 दिन के बहुत ही कड़े क्वॉरेंटाइन में थे और उन्हें उनके टीम के किसी भी खिलाड़ी से मिलने नहीं दिया गया।
उमरान मलिक
उमरान मलिक का जन्म 22 नवंबर 1999 को श्रीनगर में हुआ था। उनके पिता रोजी-रोटी के लिए फल और सब्जियां बेचते थे। उमरान मलिक को अपने शुरुआती जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को जारी रखा। वह बचपन से ही क्रिकेट खेलते थे, लेकिन अपने खेल पर और अधिक ध्यान देने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी। इंडिया टुडे से बातचीत में उमरान के पिता ने उन तमाम मुश्किलों के बारे में बताया, जिनसे उन्हें अपने बेटे के सपने पूरा करने में गुजरना पड़ा था। इमरान के पिता ने एक इंटरव्यू में यह भी बताया कि जम्मू और कश्मीर के खिलाड़ियों को भारतीय क्रिकेट में देखना आम बात नहीं है, खासकर जब उनके पास ट्रायल के लिए बड़े शहरों की यात्रा करने के लिए पैसे नहीं होते है।
टी. नटराजन
टी. नटराजन का जन्म 4 अप्रैल 1991 को तमिलनाडु के सेलम में हुआ था। नटराजन के पिता दिहाड़ी मजदूर थे, और उनकी मां एक झोंपड़ी के बाहर पकौड़े की एक छोटी सी दुकान चलाती थी। नटराजन के आईपीएल की सनसनी बनने के बाद भी उनकी मां ने काम करना जारी रखा। नटराजन अपनी युवा अवस्था में छुट्टियों के दौरान अपने पैसों से संघर्ष कर रहे परिवार की मदद करने के लिए छोटे-मोटे काम करते थे। उन्होंने ईंट भट्ठों, इस्पात संयंत्रों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम किया था।












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