जानिए BRICS से जुड़े कुछ खास तथ्य, इसकी जनसंख्या, जीडीपी और बहुत कुछ
BRICS या ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (5 देश) शामिल हैं। भारत साल 2006 में ब्रिक्स की स्थापना के समय से सदस्य रहा है। भारत को ब्रिक्स का एक महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता है। ब्रिक्स 2022 शिखर सम्मेलन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक ब्रिक्स नेताओं ने 2021 के अंत तक 13 औपचारिक बैठकें की थीं।
पहला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2009 में रूस में आयोजित किया गया था। भारत ने 2012, 2016 और 2021 (वर्चुअल) में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। मतलब भारत तीन बार ब्रिक्स की बैठक की मेजबानी कर चुका है। इस बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 22-24 अगस्त तक जोहान्सबर्ग में आयोजित किया जायेगा। 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका जा रहे हैं। इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का विषय है 'ब्रिक्स और अफ्रीका: पारस्परिक तेज विकास, सतत विकास और समावेशी बहुपक्षवाद के लिए साझेदारी' है।

क्या और कब बना ब्रिक्स?
ब्रिक्स एक अनौपचारिक समूह है। जिसके पास कोई चार्टर, निश्चित सचिवालय या इसकी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए धन नहीं है। ब्रिक्स दुनिया में तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था वाले पांच देशों का एक समूह है। ये वे देश हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि साल 2050 तक विनिर्माण उद्योग, सेवाओं और कच्चे माल के प्रमुख सप्लायर यानी आपूर्तिकर्ता हो जायेंगे।
पहली बार ब्रिक (BRIC) की चर्चा साल 2001 में 'गोल्डमैन सैक्स' के अर्थशास्री जिम ओ' नील द्वारा ब्राजील, रूस, भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के लिये विकास की संभावनाओं पर एक रिपोर्ट में की थी। इसके बाद साल 2006 में चार देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की सामान्य बहस के अंत में विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठकों के साथ एक नियमित अनौपचारिक राजनयिक समन्वय शुरू किया।
इस सफल बातचीत से यह निर्णय लिया गया कि इसे वार्षिक शिखर सम्मेलन के रूप में देश और सरकार के प्रमुखों के स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिये। इसके बाद पहला BRIC शिखर सम्मेलन साल 2009 में रूस के येकतेरिनबर्ग में हुआ। इसके बाद दिसंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को BRIC में शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया और इसे ब्रिक्स (BRICS) कहा जाने लगा।
ब्रिक्स आखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों हैं?
ब्रिक्स को दुनियाभर के देश इसलिए महत्वपूर्ण मानते हैं क्योंकि ब्रिक्स देशों की जनसंख्या दुनिया की आबादी का लगभग 40% है। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिस्सा लगभग 31% है। दुनिया का लगभग 29% भूभाग इन देशों के पास है। आईएमएफ का कोटा शेयर लगभग 15% के करीब है। वर्ल्ड बैंक वोटिंग पावर लगभग 13% है।
यही वजह है कि दुनिया के 40 से ज्यादा देश वर्तमान समय में ब्रिक्स का हिस्सा बनना चाहते हैं। इनमें मिस्त्र, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, संयुक्त राज्य अमीरात (यूएई) जैसे अहम देश भी शामिल हैं।
दुनिया का कितना भूभाग और आबादी ब्रिक्स के पास है?
स्टैटिका की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में ब्रिक्स देशों की कुल जनसंख्या 3.24 बिलियन थी। जो विश्व जनसंख्या का 40% हिस्सा है। इनमें से अधिकांश लोग या तो चीन या भारत में रहते हैं। जबकि अन्य तीन देशों की संयुक्त आबादी 420 मिलियन से कम है।
अमेरिका की संघीय सरकार द्वारा संचालित यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिक्स देशों का कुल क्षेत्रफल 15,346,100 वर्ग मीटर है। पृथ्वी की स्थलीय सतह का 26% हिस्सा इनके पास है। साथ ही दुनिया की जैव विविधताओं से संपन्न देश हैं। जैसे ब्राजील के पास अमेजॉन, सेराडो और अटलांटिक वन; रूस का काकेशस और सुदूर पूर्व; भारतीय पश्चिमी घाट, हिमालय; दक्षिण-पश्चिमी चीन; और दक्षिण अफ्रीका का केप फ्लोरिस्टिक क्षेत्र, रसीला कारू और मापुटो-पोंडोलैंड-अल्बानी शामिल है।
ब्रिक्स देशों का जीडीपी कितना मजबूत है?
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की बात करें तो वैश्विक स्तर पर इसकी हिस्सेदारी लगभग 31% है। चलिए पांचों देशों के जीडीपी को समझते हैं।
- ब्राजील, लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो आईएमएफ के अनुसार 2.08 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद के आकार के साथ 2023 में 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। जो 2022 की रैंकिंग से एक स्थान ऊपर है। 2028 तक ब्राजील की जीडीपी 2.75 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जो इसे दुनिया में आठवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देगा।
- क्षेत्रफल में रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश है। साल 2022 में 2.21 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ रूस आठवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध का असर इनकी अर्थव्यवस्था पर जरूर पड़ेगा।
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारत 2022 में यूके को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत का सकल घरेलू उत्पाद में निर्यात का योगदान लगभग 20% है। वहीं 2023 के लिए भारत की नॉमिनल जीडीपी, जिसका अनुमान 3.76 ट्रिलियन डॉलर है, आईएमएफ के अनुमान के आधार पर 2028 तक 5.57 ट्रिलियन डॉलर होने की उम्मीद है। जो भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देगी। वहीं अर्नस्ट एंड यंग (Ernst & Young) की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था 2047 तक जीडीपी आकार में 26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जायेगी। इसकी प्रति व्यक्ति जीडीपी में छह गुना वृद्धि होगी।
- विश्व बैंक के मुताबिक 2023 के लिए चीन की जीडीपी 19.37 ट्रिलियन डॉलर अनुमानित है। जो वैश्विक जीडीपी के 18.43% के बराबर है। वहीं 2028 तक चीन की जीडीपी 27.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो वैश्विक जीडीपी हिस्सेदारी का 20.5% होगी। विश्व बैंक वर्गीकरण के अनुसार चीन एक उच्च मध्यम आय वाला देश है।
- 2023 में दक्षिण अफ्रीका की जीडीपी 399.01 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। वहीं 2028 तक इसके 468.56 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है। दक्षिण अफ्रीका को विश्व बैंक द्वारा उच्च मध्यम आय वाले देश के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
भारत, चीन और रूस सबसे ताकतवर देश
ब्रिक्स देशों के समूह में तीन परमाणु संपन्न देश (भारत, चीन और रूस ) मौजूद हैं। जबकि जी7 वाले देशों में भी तीन देशों (अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन) के पास परमाणु हथियार हैं। स्वीडन स्थित थिंक टैक 'स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट 2023' (सिप्री) के मुताबिक रूस के पास 5889 परमाणु हथियार हैं। जबकि चीन के पास 410 परमाणु हथियार और भारत के पास 164 परमाणु हथियार हैं। ये परमाणु संपन्न शक्तियां ही ये दर्शाती है कि 'ब्रिक्स समूह' कितना ताकतवर देश हैं।
कैसे ब्रिक्स देश बना रहे हैं एक-दूसरे को आर्थिक रूप से मजबूत?
साल 2012 में जब नई दिल्ली में चौथा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हुआ था। तब ब्रिक्स देशों ने मिलकर एक-दूसरे की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए एक 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' यानि एनडीबी की स्थापना पर विचार किया था। इसके बाद साल 2014 में ब्राजील सम्मेलन के दौरान एनडीबी की स्थापना के लिये समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। जिसमें एनडीबी ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा और वैश्विक विकास के लिये बहुपक्षीय तथा क्षेत्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रयासों को पूरा करके स्थायी और संतुलित विकास में योगदान देगा। एनडीबी के संचालन के प्रमुख क्षेत्र स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन, अवसंरचना, सिंचाई, स्थायी शहरी विकास और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग हैं। एनडीबी का मुख्यालय शंघाई में है।
आज भारत में एनडीबी द्वारा मुंबई मेट्रो रेल, दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के लिये 'क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली और कुछ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं समेत कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का वित्तपोषण किया जा रहा है। एनडीबी द्वारा अब तक लगभग 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत के साथ 14 भारतीय परियोजनाओं को मंजूरी मिली हुई है।












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