Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Kargil Vijay Diwas: 85 दिनों तक चला था कारगिल युद्ध, देश की रक्षा में सैकड़ों जवानों ने किया सर्वोच्च त्याग

Kargil Vijay Diwas: 1999 में कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक जीत की याद में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। युद्ध के दौरान, भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के एक भाग के रूप में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के भारतीय पक्ष पर टाइगर हिल और अन्य चौकियों पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले पाकिस्तानी घुसपैठियों को सफलतापूर्वक खदेड़ दिया था। लद्दाख के कारगिल में यह सशस्त्र संघर्ष 85 दिनों तक चला और देश के 500 से अधिक सैनिकों ने अपना बलिदान दिया था। तब से लेकर आज तक हर साल यह ऐतिहासिक दिन उन भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। यह युद्ध 1999 में 8 मई से 26 जुलाई तक चला जब भारत ने ऑपरेशन विजय को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस वर्ष 2023 में भारत कारगिल विजय दिवस की 24वीं वर्षगांठ मना रहा है।

18 हजार फीट की ऊंचाई पर दो माह तक युद्ध, 527 सैनिक शहीद

18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल का यह युद्ध तकरीबन दो माह तक चला, जिसमें 527 वीर सैनिकों की शहादत देश को देनी पड़ी। 1300 से ज्यादा सैनिक इस जंग में घायल हुए। पाकिस्तान के लगभग 1000 से 1200 सैनिकों की इस जंग में मौत हुई। भारतीय सेना ने अदम्य साहस से जिस तरह कारगिल युद्ध में दुश्मन को खदेड़ा, उस पर हर देशवासी को गर्व है।

Kargil Vijay Diwas 2023 Hundreds of soldiers sacrifice in the defense of the country

अदम्य साहस और बहादुरी के लिए किसी को परमवीर चक्र तो किसी को महावीर चक्र से नवाजा

युद्ध के दौरान जीवन का बलिदान देने वाले सैनिकों की किसी से तुलना नहीं की जा सकती। लेकिन कुछ सैनिकों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। सरकार ने उनके साहस और जीवन संघर्ष से प्रेरित होकर उनको परमवीर चक्र और महावीर चक्र से नवाजा।

कैप्टन विक्रम बत्रा - जम्मू-कश्मीर राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा उन बहादुरों में से एक हैं, जिन्होंने एक के बाद एक कई सामरिक महत्व की चोटियों पर भीषण लड़ाई के बाद विजय प्राप्त की थी। कई चोटियों को जीतने वाले इस बहादुर ने अकेले ही कई शत्रुओं को ढेर कर दिया था। सामने से होती भीषण गोलीबारी में घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी डेल्टा टुकड़ी के साथ चोटी नं. 4875 पर हमला किया, मगर एक घायल साथी अधिकारी को युद्धक्षेत्र से निकालने के प्रयास में माँ भारती का यह लाड़ला सात जुलाई को वीरगति को प्राप्त हो गया। अमर शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को अपने अदम्य साहस व बलिदान के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैनिक पुरस्कार 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया।

कैप्टन अनुज नायर - 17 जाट रेजिमेंट के बहादुर कैप्टन अनुज नायर टाइगर हिल्स सेक्टर की एक महत्वपूर्ण चोटी 'वन पिंपल' की लड़ाई में अपने 6 साथियों के बलिदान होने के बाद भी मोर्चा सम्भाले रहे। गम्भीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने अतिरिक्त जाप्ता आने तक अकेले ही दुश्मनों से लोहा लिया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय सेना इस सामरिक चोटी पर भी वापस कब्जा करने में सफल रही। इस वीरता के लिए कैप्टन अनुज को मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े सैनिक सम्मान 'महावीर चक्र' से नवाजा गया।

मेजर पद्मपाणि आचार्य - राजपूताना राइफल्स के मेजर पद्मपाणि आचार्य भी कारगिल में दुश्मनों से लड़ते हुए बलिदान हो गए। उनके भाई भी द्रास सेक्टर में इस युद्ध में शामिल थे। उन्हें भी इस वीरता के लिए 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया।

लेफ्टिनेंट मनोज पांडेय - गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज पांडेय की बहादुरी की इबारत आज भी बटालिक सेक्टर के 'जुबार टॉप' पर लिखी है। अपनी गोरखा पलटन लेकर दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में 'काली माता की जय' के नारे के साथ उन्होंने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए। अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में लड़ते हुए मनोज पांडेय ने दुश्मनों के कई बंकर नष्ट कर दिए। गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद मनोज अंतिम क्षण तक लड़ते रहे। भारतीय सेना की 'साथी को पीछे ना छोडने की परम्परा' का मरते दम तक पालन करने वाले मनोज पांडेय को उनके शौर्य व बलिदान के लिए मरणोपरांत 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया।

कैप्टन सौरभ कालिया - भारतीय वायुसेना भी इस युद्ध में जौहर दिखाने में पीछे नहीं रही, टोलोलिंग की दुर्गम पहाडियों में छिपे घुसपैठियों पर हमला करते समय वायुसेना के कई बहादुर अधिकारी व अन्य रैंक भी इस लड़ाई में दुश्मन से लोहा लेते हुए शहीद हुए। सबसे पहले कुर्बानी देने वालों में से थे कैप्टन सौरभ कालिया और उनकी पैट्रोलिंग पार्टी के जवान। पाकिस्तानी सेना द्वारा अकल्पनीय यातनाओं के बाद भी कैप्टन कालिया ने कोई भी जानकारी दुश्मनों को नहीं दी।

स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा और फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता - स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का विमान भी दुश्मनों की गोलीबारी का शिकार हुआ। अजय का लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में नष्ट हो गया, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और पैराशूट से उतरते समय भी शत्रुओं पर गोलीबारी जारी रखी और लड़ते-लड़ते बलिदान हो गए। इसी प्रकार फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता इस युद्ध में पाकिस्तान द्वारा युद्धबंदी बनाए गए। वीरता और बलिदान की यह फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। भारतीय सेना के विभिन्न रैंकों के लगभग 30,000 अधिकारी व जवानों ने ऑपरेशन विजय में भाग लिया।

तीनों सेनाओं का संयुक्त प्रयास और पाकिस्तान चित

कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन व्हाइट सी या सफ़ेद सागर भी शुरू किया गया था। ऑपरेशन के दौरान, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानी सेना के अवैध सैनिकों को बाहर निकालने के लिए भारतीय थल सेना का सहयोग किया। भारतीय सेना, एयरफोर्स और नौसेना के संयुक्त प्रयासों से पाकिस्तान पर दबाव बना और एक लंबी लड़ाई के बाद, कारगिल युद्ध अंततः 26 जुलाई 1999 को समाप्त हो गया। भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को उनके कब्जे वाले स्थानों से हटा दिया। जिससे कारगिल विजय दिवस एक उल्लेखनीय दिन बन गया। कोई भी युद्ध हथियारों के बल पर नहीं लड़ा जाता है, युद्ध लड़े जाते हैं साहस, बलिदान, राष्ट्रप्रेम व कर्त्तव्य की भावना से और भारत में इन जज्बों से भरे युवाओं की कोई कमी नहीं है। मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही आज हमारे बीच में नहीं हैं, मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा- हमेशा के लिए बसी हुई है।

'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+