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Jaggi Vasudev: तर्क से ईश्वर की तह तक की यात्रा में जग्गी वासुदेव

वह लेखक व कवि हैं, गाइड और फिलॉस्फर हैं, योगी और प्राकृतिक चिकित्सक भी हैं, वह रहस्यमयी तो है ही। वह जग्गी वासुदेव हैं। 3 सितम्बर को उनका जन्म दिन है। उनके बारे में दुनिया जानती है, पर किसी किवदंती की तरह उनकी कहानियां भी अनेक हैं।

जगदीश वासुदेव का जन्म 3 सितंबर 1957 को कर्नाटक के मैसूर में, एक तेलुगु भाषी परिवार में हुआ था। वे चार भाई-बहन थे, जिनमें जगदीश सबसे छोटे। उनकी मां सुशीला वासुदेव गृहिणी थीं और उनके पिता बी.वी. वासुदेव चिकित्सक थे। जग्गी वासुदेव की माता के पूर्वजों का संबंध विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय से जुड़ा हुआ था।

Jaggi Vasudev

जगदीश वासुदेव का शुरू से ही प्रकृति के प्रति विशेष झुकाव था। बचपन में ही जंगलों में अकेले ट्रैकिंग में समय बिताया। सांपों में तो अत्यधिक रुचि थी। वह सापों को पालने लगे थे। स्कूली शिक्षा मैसूर से करके मैसूर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक की डिग्री हासिल की। स्कूली शिक्षा के बाद ही वासुदेव की रूचि पढ़ाई के बजाय प्रकृति का रहस्य जानने में थी। माता-पिता की इच्छाओं की अवहेलना करते हुए, उन्होंने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम करने से साफ इनकार कर दिया।

योग साधना की शुरुआत

तेरह साल की उम्र में, जगदीश वासुदेव ने मल्लाडिहल्ली राघवेंद्र से योग की शिक्षा ली और प्रतिदिन आसन- प्राणायाम का अभ्यास किया। 25 साल की उम्र में, 23 सितंबर 1982 को, वह चामुंडी पहाड़ी पर गए और एक चट्टान पर बैठ गए, जहां उन्हें 'आध्यात्मिक अनुभव' प्राप्त हुआ। अपने रहस्यमय अनुभव के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए देश भ्रमण पर निकल गए। बड़े पैमाने पर यात्रा की। लगभग एक साल के ध्यान और यात्रा के बाद, उन्होंने अपने आंतरिक अनुभव को साझा करने के लिए योग की शिक्षा देना शुरू किया।

1983 में मात्र सात प्रतिभागियों के साथ अपनी पहली योग कक्षा लगाई । फिर कर्नाटक के अन्य शहरों और हैदराबाद में भी योग कक्षाएं संचालित की।

गृहस्थ जीवन में प्रवेश

1984 में मैसूर में एक योग कक्षा के दौरान ही उनकी मुलाकात विजया कुमारी से हुई, जिन्हें विज्जी के नाम से जाना जाता है। विजया कुमारी तलाकशुदा थी। जग्गी वासुदेव को उनसे प्यार हो गया। थोड़े समय रोमांस के बाद योगी वासुदेव ने महाशिवरात्रि पर इरुपु फॉल्स की यात्रा के दौरान शादी करने का निर्णय ले लिया। इस बीच वासुदेव की माँ की 1989 में गुर्दे की बीमारी से मृत्यु हो गई। 1990 में, जग्गी और विज्जी की एक बेटी हुई जिसका नाम राधे जग्गी रखा गया।

राधे जग्गी का आज भी अपने पिता पर बहुत प्रभाव है। राधे जग्गी प्रशिक्षित भरतनाट्यम नर्तक हैं और उनका विवाह चेन्नई के शास्त्रीय गायक संदीप नारायण से हुआ है। 22 जनवरी 1997 को ईशा योग केंद्र में एक बड़ी सभा में वासुदेव की पत्नी विजया कुमारी की मृत्यु हो गई। आरोप लगा कि जग्गी वासुदेव ने ही पत्नी को मार डाला। आठ महीने बाद गड़बड़ी का आरोप लगाने वाली एक शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ और जांच भी की गई। लेकिन बाद में जग्गी वासुदेव आरोप से बरी हो गए।

रहस्यमयी वासुदेव

जग्गी वासुदेव कहते हैं कि उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य यात्रा और अन्वेषण है। अन्वेषण की अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए चामुंडी हिल्स उनके लिए सबसे उपयुक्त था। जहां वे अक्सर रात में सवारी करते थे। एक अवसर पर, साहसिक कार्य की खोज में, उन्होंने ऑफ-रोड जाने का फैसला किया और पहाड़ी की ढलान से नीचे पेड़ों और चट्टानों को छूते हुए चले गए और पेड़ से टकरा कर उनकी अनामिका उंगली टूट गई। उन्होंने अपने मोटरसाइकिल मित्रों के साथ सौ एकड़ भूमि में एक कम्यून बनाने की योजना बनाई, पर वह पूरी नहीं हुई। मोटरसाइकिल से ही उन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की। वह स्वछन्द जीवन चाहते थे।

उद्यमी वासुदेव

जग्गी वासुदेव का पहला व्यवसाय मैसूर के सुदूर इलाके में पोल्ट्री फार्म था, जिसे उन्होंने उधार के पैसों से बनवाया था। जग्गी वासुदेव ने छह महीने में खेत की इमारतों और पक्षियों के पिंजरे का निर्माण खुद ही किया। फिर उन्होंने ईंट बनाना भी शुरू कर दिया और जल्द ही इसे दूसरे व्यवसाय में बदल दिया। व्यवसाय जल्द ही लाभदायक हो गया। अपना व्यवसाय चलाने में उनका प्रतिदिन चार घंटे का समय ही व्यतीत होता था, बाकी समय कविता लिखने, पढ़ने और तैराकी में लगाते। जल्दी ही उनका तीसरा व्यवसाय बिल्डएड्स नामक एक निर्माण कंपनी के रूप में शुरू हुआ, जो उन्होंने एक योग्य सिविल इंजीनियर के साथ स्थापित किया था।

लेखक वासुदेव

जग्गी वासुदेव कई किताबों के लेखक हैं। उन्होंने इनर इंजीनियरिंग, ए योगीज़ गाइड टू जॉय और कर्मा, वासुदेव मिस्टिक्स म्यूज़िंग्स, डेथ: एन इनसाइड स्टोरी ए योगीज़ गाइड टू क्राफ्टिंग योर डेस्टिनी जैसी कई किताबें लिख डाली। ए योगीज़ गाइड टू क्राफ्टिंग योर डेस्टिनी न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर सूची में जगह बनाई।

वक्ता वासुदेव

वासुदेव एक शानदार वक्ता हैं, जिन्हें दुनिया भर में सुना जाता है। विश्व के कई प्रतिष्ठित मंचों और सम्मेलनों को वह संबोधित कर चुके हैं और आज भी उनका जबर्दस्त क्रेज है। संयुक्त राष्ट्र के मिलेनियम वर्ल्ड पीस समिट, हाउस ऑफ लॉर्ड्स, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट में उनके भाषण हुए। 2020 में वार्षिक विश्व आर्थिक मंच पर भी उनको भाषण के लिए बुलाया गया। वह स्पष्ट रूप से खुद को बात करते हुए सुनना पसंद करते हैं और लोग उनकी अमूर्त सोच की प्रशंसा करते हैं। लोग उनकी मनमोहक कहानियों को सुनने के लिए अधिक इच्छुक होते हैं।

वासुदेव को आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 2017 में भारत सरकार से दूसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण मिला। वह 2012 में द इंडियन एक्सप्रेस की 100 सबसे शक्तिशाली भारतीयों की सूची में 92वें स्थान पर रहे और 2019 में इंडिया टुडे की 50 सबसे शक्तिशाली भारतीयों की सूची में 40वें स्थान पर रहे।

सोशल मीडिया पर लोकप्रियता

जग्गी वायदेव के 8.3 मिलियन इंस्टाग्राम फॉलोअर्स और 3.9 मिलियन ट्विटर फॉलोअर्स हैं। भारत के बाहर भी उनके प्रशंसकों की संख्या लाखों में है। विशिष्ट परिधान और पगड़ी पहचान वाले जग्गी भारतीय ऋषि ज्ञान का उपदेश देते हैं तो साथ में कार्गो पैंट और धूप के चश्मे के साथ रेत के तूफ़ान में अपनी मोटरसाइकिल चलाते हुए, दाढ़ी हवा में लहराते हैं।

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