Israel War: इजरायल-हमास की लड़ाई की जो कीमत हम चुका रहे हैं
Israel War: युद्ध कहीं भी हो, उसकी कीमत पूरी मानवता को चुकानी पड़ती है। भले ही भारत से हजारों मील दूर हमास और इजरायल के बीच लड़ाई छिड़ी है, पर उसकी भरपाई हम भारतीय भी कर रहे हैं और यह युद्ध आगे भी लंबा खिंचा तो इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ने वाला है। फ़िलहाल हमारा एविएशन सेक्टर, जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर और मेडिकल सेक्टर प्रभावित हो रहा है।
भारत एशिया में इजरायल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार देश है। हम यहां से हीरे, पेट्रोलियम उत्पादों और रसायनों का निर्यात करते हैं और इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी, संचार प्रणाली व चिकित्सा उपकरण आयात करते हैं। लेकिन 7 अक्टूबर को हमास द्वारा इजरायल में कत्लेआम मचाने और उसके बाद गाज़ा बमबारी शुरू होने के बाद हर प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। अब डर यह है कि अरब देशों को युद्ध में कूदने के बाद कच्चे तेल के दाम नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे और फिर भारत को भारी कीमत देनी पड़ेगी। अभी ही कच्चे तेल का दाम 90 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गया है।

एविएशन क्षेत्र ठप्प
भारत से इजरायल की राजधानी तेल अवीव के लिए जाने वाली सभी उड़ानें 7 अक्टूबर के बाद से ही ठप्प हैं। पहले 14 अक्टूबर तक उड़ानों पर रोक लगाने की घोषणा की गयी थी, जिसे अब बढ़ाकर 2 नवंबर तक कर दिया गया है। जिस तरह की परिस्थितियां वहां निर्मित हो रही हैं, उससे नहीं लगता कि निकट भविष्य में आवागमन शुरू हो पायेगा। हमास के साथ इजरायल निर्णायक लड़ाई लड़ने की घोषणा कर चुका है। इसलिए चल रहे संघर्ष के कारण क्षेत्र में जारी तनाव और बढ़ सकता है। युद्ध से पहले एयर इंडिया सोमवार, मंगलवार, गुरुवार, शनिवार और रविवार को दिल्ली से तेल अवीव के लिए पांच साप्ताहिक उड़ानें संचालित करता था। नई दिल्ली और तेल अवीव के बीच सीधी एयर इंडिया की उड़ान इजरायल के साथ द्विपक्षीय संबंधों में एक गेम चेंजर साबित हुई थी। भारत में इजरायली पर्यटकों की संख्या भी काफी बढ़ गई थी।
तेल के दाम बढ़ने का खतरा सबसे ज्यादा
इजरायल - हमास युद्ध से सबसे बड़ा खतरा हमारे लिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि की आशंका से है। अगर दाम बढ़ा तो भारत को उच्च आयात बिल चुकाना पड़ेगा। फिर चालू खाता घाटा में बढ़ोतरी होगी और मुद्रास्फीति में दबाव देखने को मिल सकता है। 29 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड 90.48 डॉलर प्रति बैरेल था, जो युद्ध के बाद से 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। 7 अक्टूबर को यही क्रूड लगभग 81 डॉलर के आस पास था।
भारत कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक है, तेल की ऊंची कीमतों के कारण तेल आयात की लागत में वृद्धि होगी ही। इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में अब मध्य पूर्व के ओपेक देश भी दखल देने लगे हैं। खासकर ईरान, इराक और सऊदी अरब गाज़ा में जमीनी हमले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। यदि तेल की आपूर्ति काम होती है या कीमत बढ़ती है तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिकूल असर देखने को मिल सकता है।
अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की आशंका
विश्लेषकों का कहना है कि भारत में इस समय जो आर्थिक स्थिरता देखी जा रही है उसपर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ग्रहण लगा सकती है। ईरान, जो हमास का समर्थक है, यदि युद्ध में शामिल होता है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं। सऊदी अरब और रूस ने वर्ष के अंत तक संयुक्त रूप से प्रति दिन 1.3 मिलियन बैरल (एमबीपीडी) की तेल आपूर्ति में कटौती की घोषणा कर चुके हैं। अब मध्य पूर्वी तेल उत्पादकों का इस संघर्ष में शामिल होना चिंताजनक है। जाहिर है जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो विभिन्न उद्योगों के लिए उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। उल्लेखनीय है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत तेल को आयात के माध्यम से पूरा करता है।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर भी खतरा
8 सितंबर को, नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में बड़े जोर शोर से भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की योजना का अनावरण किया गया था। यह परियोजना भारत और यूरोप को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसमें भारत के साथ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और यूरोपीय संघ (ईयू) भी शामिल हैं। यह भारत के पश्चिमी तट से शुरू होने वाला है और समापन इजरायल के हाइफ़ा बंदरगाह पर होना है। लेकिन अब इस परियोजना के साथ किन्तु परन्तु जोड़ा जा रहा है। कारण ईरान और सऊदी अरब का इजरायल के खिलाफ खुल कर खड़ा होना।
7 अक्टूबर को इज़राइल पर हमास के क्रूर हमले के साथ इस परियोजना पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। क्या अब भी यह परियोजना धरातल पर उतरेगी यह अनुमान लगाया जाने लगा है। कहीं इज़रायली प्रतिशोध इस पर भारी न पर जाए। क्योंकि इजराइल और सऊदी अरब के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत खतरे में तो है ही।
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