Hamas: कैसे बना हमास एक खतरनाक जिहादी संगठन, कौन हैं इसके पीछे?
Hamas: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने एक बार कहा था कि हम आतंकवादियों से लड़कर आतंकवाद पैदा नहीं करते। हम उन्हें अनदेखा करके आतंकवाद पैदा करते हैं। यह बात आज हमास के मामले में लागू होती है, जिसने इजरायल पर हमले कर दुनिया को चिंता में डाल दिया है। शनिवार को हुए हमले के बाद से लेकर अब तक दोनों पक्षों के करीब 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले को युद्ध बताया है। आखिर यह हमास है क्या? कहां से इसने इतनी ताकत बटोर ली कि वह इजरायल को ही मिटा देने का ऐलान करता है। कुछ देश इसे आतंकवादी गुट बता रहे हैं तो कुछ देश इसे खुला समर्थन दे रहे हैं।
क्या है 'हमास'?
इजरायल, अमेरिका, यूरोपीय संघ, कनाडा, मिस्र और जापान ने हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में घोषित कर दिया हैं। परन्तु हमास उस क्षेत्रीय गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें ईरान, सीरिया और लेबनान के शिया इस्लामी समूह हिजबुल्लाह भी शामिल हैं। ये इजरायल के अस्तित्व और उसके बारे में अमेरिकी नीति का व्यापक रूप से विरोध करते हैं।

हमास फिलिस्तीन का एक जिहादी समूह है जिसका पूरा नाम हरकत अल-मुकावामा अल-इस्लामिया यानि इस्लामिक रेजिस्टन्स मूवमेंट है जो इस्लामिक प्रतिरोध आंदोलन कर रहा है। हमास की स्थापना 1987 में पहले फिलिस्तीनी इंतिफादा के दौरान हुई थी। इंतिफादा का मतलब बगावत करना या विद्रोह करना है। इसका मकसद फिलिस्तीन में इस्लामिक राज्य स्थापित करना है। इस संगठन का संस्थापक शेख अहमद यासीन था।
जबकि 'हिजबुल्लाह' लेबनान में स्थित एक शिया मुस्लिम राजनीतिक दल और जिहादी समूह है। इसकी स्थापना 1982 में लेबनानी गृहयुद्ध के दौरान ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की मदद से की गई थी। पिछले 40 वर्षों में यह संगठन काम कर रहा है। यह अब खतरनाक हथियारों से लैस एक आतंकवादी समूह के रूप में बदल गया है।
क्या है हमास और हिजबुल्लाह की विचारधारा?
हमास की विचारधारा मुस्लिम ब्रदरहुड की इस्लामी विचारधारा से मेल खाती है, जिसकी स्थापना 1920 के दशक में मिस्र में की गई थी। हमास का गठन मिस्त्र और फिलिस्तीन के मुसलमानों ने मिलकर किया था। वहीं हमास और हिजबुल्लाह का मुख्य उद्देश्य उनके क्षेत्र से इजरायली प्रशासन के स्थान पर इस्लामिक शासन की स्थापना करना है।
हमास के गठन की कहानी
वैसे तो यहूदियों और मुसलमानों के बीच जमीन को लेकर खूनी संघर्ष सालों से चल रहा है। लेकिन, इन संघर्षों में खतरनाक मोड़ साल 1987 में आया, जब हमास का गठन हुआ। 1987 में फिलिस्तीनियों का एक ग्रुप इजरायल से सटे चेकपोस्ट पर प्रदर्शन कर रहा था। तभी इजरायली सैनिकों ने गोलियां चला दी, जिसमें चार फिलिस्तीनी मारे गए। इसे लेकर पूरे फिलिस्तीन में प्रदर्शन होने लगे। इसी इंतिफादा प्रदर्शन के दौरान हमास का गठन हुआ। जिसका मकसद तय किया गया इजरायल का विनाश और फिलिस्तीन के ऐतिहासिक भूभाग में इस्लामिक सोसायटी की स्थापना। सुन्नी मुसलमानों का यह संगठन फिलिस्तीन से इजरायल को हटाना चाहता है । इसके पहले अंतरराष्ट्रीय पक्षों ने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद बातचीत से सुलझाने की कोशिश की। अमेरिका की पहल पर 1993 में 'ओस्लो अग्रीमेंट' पर दस्तखत भी हुए। जिसके तहत फिलिस्तीन की ओर से इजरायल को मान्यता दी गई और दूसरा गाजा और वेस्ट बैंक में स्व-शासन के लिए फिलिस्तीनियों की अंतरिम सरकार पर समझौता हो गया। लेकिन हमास के लोग इससे नाखुश थे।
ओस्लो समझौते के कुछ महीने बाद ही 1993 में हमास ने इजरायल के खिलाफ अपना पहला सुसाइड अटैक किया। जिससे अंतरराष्ट्रीय पटल पर हमास को पहचान मिली। इसके बाद भी हमास ने आत्मघाती हमले जारी रखे। कई बार भीड़ वाले बाजारों में भी हमास ने आत्मघाती हमले किए। इसके बाद साल 1997 में अमेरिका ने हमास को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया।
ऐसे बढ़ी हमास की ताकत
हमास को अब पहचान मिल चुकी थी। लेकिन, संगठन को चलाने के लिए इसे पैसा, सुरक्षित जमीन और कट्टर जेहादियों (लोगों) की जरूरत थी। इसलिए हमास ने राजनीतिक माध्यम से सबसे पहला निशाना गाजा पट्टी को बनाया। जो भूमध्यसागरीय तट पर एक फिलिस्तीनी क्षेत्र है। गाजा पट्टी करीब 10 किलोमीटर चौड़ा और 41 किलोमीटर लंबा इलाका है। जहां तकरीबन 22 लाख लोग रहते हैं।
साल 2006 के हमास ने फिलिस्तीनी विधायी चुनावों में जीत हासिल की। इसके बाद साल 2007 में इसने ताकत के बल पर पूरे गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया। तभी से हमास गाजा पट्टी क्षेत्र पर राज कर रहा है। इसके बाद से वह जब तब इजरायल के ठिकानों पर हमले करता रहता है।
कितना मजबूत है हमास और कौन कर रहा मदद?
वैसे तो इजरायल की तुलना में हमास एक कमजोर संगठन है, लेकिन आतंकवाद फैलाने में माहिर है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हमास के पास रॉकेट, मोर्टार, सटीक-निर्देशित एंटी-टैंक मिसाइलें और ड्रोन तक हैं। हमास मुख्य रूप से गाजा पट्टी में हथियार बनाता है। इजरायल और अमेरिका हमेशा यह दावा करते रहे हैं कि हमास ने ईरान की मदद से हथियार बनाने की तकनीक हासिल की है। ईरान का नाम इसलिए बार-बार आता है क्योंकि हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को ईरान से मदद मिलती है। पिछले 4 दशकों से हिजबुल्लाह दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्जा करके इजरायली सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध कर रहा है।
तुर्किये भी कर रहा है सपोर्ट?
रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन हमेशा से फिलिस्तीन और हमास जैसे संगठनों का साथ देते आए हैं। वहीं नवभारत टाइम्स ने फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेटिक की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि बीते 14 सितंबर को इजरायली सीमा अधिकारियों ने खुलासा किया था कि जुलाई में तुर्की से गाजा पट्टी के रास्ते में 16 टन विस्फोटक सामग्री रोकी गई थी। तब सीमा शुल्क एजेंटों ने दो कंटेनरों का निरीक्षण किया, जिनमें 54 टन जिप्सम था। लेकिन, जब लैब में परीक्षण किया गया तो पता चला कि कंटेनर में रखे बैगों में अमोनियम क्लोराइड था। अमोनियम क्लोराइड का इस्तेमाल रॉकेट के लिए विस्फोटक बनाने में किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक तुर्किये अपने बैंकों के माध्यम से हमास को धन मुहैया कराता है। तुर्किये के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगान के हमास नेताओं के साथ नजदीकी संबंध हैं। जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। उन्होंने कई बार हमास नेताओं के साथ बैठकें भी की हैं। साथ ही तुर्किये हमास नेताओं को पासपोर्ट भी जारी करता है, ताकि वह विदेश यात्रा कर सकें। इससे साबित होता है कि तुर्किये, इजरायल के खिलाफ हमास की मदद करता रहा है।
वर्तमान में हुए हमले का कारण क्या है?
7 अक्टूबर को हुए हमले को लेकर अलजजीरा के एक कार्यक्रम में हमास के प्रवक्ता ने कहा कि इजरायल पर ये हमला मुस्लिम देशों को दिया गया एक संदेश है कि वो इजरायल से रिश्ते सामान्य करने का प्रयास छोड़ दें। बता दें कि हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद दीफ ने 'ऑपरेशन अल-अक्सा स्टॉर्म' की घोषणा की है। यह एक नया ऑपरेशन है, जिसका मकसद संवेदनशील माने जाने वाले अल-अक्सा परिसर को आजाद कराना है। ये अल-अक्सा मस्जिद यरूशलेम शहर में है। यरुशलेम एक ऐसा स्थान है जो मुस्लिम, ईसाई और यहूदी दिनों के पवित्र जगह माना गया है।
2021 और 2022 में भी भिड़ चुके हैं इजरायल-हमास?
अगस्त, 2022 में हमास और इजरायल के बीच तीन दिनों तक संघर्ष चला था। तीन दिन चले संघर्ष में तकरीबन 44 लोगों की जान चली गई थी। तब मिस्र की मध्यस्थता के बाद दोनों पक्ष संघर्ष विराम को राजी हुए थे। तब यह कहा गया था कि इजरायली सेना के गाजा पट्टी में स्थित एक फिलिस्तीनी कब्जे वाले इलाके में हमले के बाद संघर्ष शुरू हुआ था। इस पर इजरायल ने कहा था कि यह हमला आतंकवादी संगठनों की धमकियों के जवाब में किया गया था। वहीं अगस्त 2022 से पहले हमास और इजरायल के बीच मई 2021 में भी 11 दिन तक संघर्ष चला था। इस संघर्ष में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे।












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