तीखा सवाल- क्या भारत देश पर बोझ है बिहार?

यह सवाल वाकई में बहुत तीखा है, उन लोगों के लिये जो बिहार के रहने वाले हैं, उन लोगों के लिये जो बिहार से प्रेम करते हैं और उन लोगों के लिये जिनकी जिंदगी बिहार से जुड़ी हुई है। लेकिन जिस तरह से देश में राजनीतिक द्वन्द्व चल रहा है, उसी को देख यह सवाल सामने आया।

Bihar Politics

वेबसाइट कोरा डॉटकॉम पर सवाल पूछा गया, जिसमें कई सारे लोगों ने अपनी राय रखी। बहस अभी जारी है और चलती बहस के बीच हमने कुछ लोगों के उत्तर का निचोड़ निकाल कर बाहर रखा है, जो हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।

गोवा के रहने वाले अभ‍िषेक कुमार ने लिखा

बिहार पर चर्चा में ज्यादातर लोग वो होते हैं जो बिहार को बाहर से देख रहे हैं। मैं बिहार में रह चुका हूं, उसे करीब से देखा है। अगर कानून व्यवस्था की करें तो पिछले 10 सालों में बहुत बदलाव आये हैं। बात अगर बिहार के पिछड़ेपन की करें, तो इस राज्य से ज्यादा पिछड़े राज्य भी देश में हैं, लेकिन वे सामने इसलिये नहीं आते, क्योंकि उनके राज्य के कुछ भागों को विकसित कर उसी को राज्य की तस्वीर बना दिया गया है।

बिहार के लोग बहुत मेहनती होते हैं। भले ही यहां साक्षरता दर कम है, लेकिन जो पढ़े लिखे हैं, वो बहुत ज्ञानी हैं।
लोग अपने सपनों को साकार करने के लिये बिहार को छोड़ कर चले जाते हैं, लेकिन सच तो यह है कि वे वापस आना चाहते हैं।

शुभांकर श्रीवास्तव ने लिखा

जिसने यह सवाल उठाया है, शायद उसने बिहार के बारे में अफवाह सुनी होगी कि यहां पर अश‍िक्ष‍ित और असंस्कारी लोग रहते हैं। मैं 18 साल बिहार में रहा, कभी ऐसा महसूस नहीं किया। यहां के लोग बहुत मेहनती होते हैं और दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहते हैं। बिहार को देश पर बोझ कहना, यह बिलकुल गलत होगा। क्योंकि से जुड़े सच तो ये हैं-

  • केरल और तमिलनाडु में साक्षर लोगों की संख्या से ज्यादा बिहार में साक्षर लोग हैं। आंध्र प्रदेश और केरल में मिलाकर भी उतने ग्रेजुएट्स नहीं जितने बिहार में हैं।
  • पंजाबी और गुजराती डॉक्टरों की संख्या से ज्यादा बिहारी डॉक्टरों की है।
  • जितने आईएएस कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात से निकलते हैं उतने अकेला बिहार पैदा कर देता है।
  • अन्य राज्यों के बैंकों में पीओ के पदों पर तैनात बिहारियों की संख्या बहुत ज्यादा है।
  • आईआईटी में महाराष्ट्र और गुजरात से ज्यादा बिहार के छात्र हैं।
  • दिल्ली में जितने बलात्कार होते हैं उससे 1/10 मामले बिहार में हैं।
  • बिहार में मर्डर का रेट मुंबई में मर्डर के रेट का आधा है।
  • बिहार एक मात्र राज्य है, जहां पर किसान आत्महत्या नहीं करते।
  • पंजाब से ज्यादा गेंहू बिहार में पैदा होता है।
  • आंध्र प्रदेश की तुलना में नक्सवाद बिहार में बहुत कम है।

अभ‍िषेक सोरमपुरी बोले

अगर वर्तमान परिवेश की बात करें तो बिहार वाकई में देश पर बोझ है। यह परिवार का सबसे कमजोर सदस्य है, लेकिन बेहतर होगा कि हम कमजोर सदस्य को मजबूत बनाने की बात करें, न कि उसकी कमजोरी का मजाक बनायें। बिहार के लोग खुद अपने राज्य को ऊपर उठाने के प्रयास कर रहे हैं। बिहार का बुद्ध‍िजीवी वर्ग इस वक्त सिर्फ एक ही सवाल का हल खोज रहा है- बिहार को कैसे विकसित राज्य बनायें।

बिहार के राजीव रंजन ने लिखा

सच तो यह है कि बिहार दूसरों पर बोझ नहीं है, बल्क‍ि बिहार के संसाधनों पर अन्य राज्य बोझ हैं। सच पूछिए तो आजादी के बाद भारत सबसे ज्यादा विकसित औद्योगिक राज्य था। 1960 में केंद्र सरकार की योजनाओं ने बिहार, पश्च‍िम बंगाल और मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का गला घोंट दिया। इसके फलस्वरूप अन्य राज्य विकसित हुए और कीमत चुकानी पड़ी बिहार को।

  • 1960 में बिहार के गांवों में बिजली हुआ करती थी, सिंचाई की अच्छी व्यवस्था थी।
  • आज भी कई गांवों में जंग लगे बिजली के खम्भे और सूखी नहरें मिल जायेंगी।
  • रक्सौल जिसे डालमियानगर कहते हैं, भारत का बड़ा बिजनेस सेंटर था, लेकिन 1970 से इसे भूतों का शहर कहा जाने लगा।
  • मरहौरा में चीनी, शराब, लोहा, मोर्टन और हथ‍ियार की बड़ी-बड़ी फैक्ट्र‍ियां थीं। केंद्र ने सब हटा दीं।
  • जम्मू-कश्मीर को जहा 100 करोड़ दिये जाते थे, वहीं बिहार को 50 करोड़ में टरका दिया जाता।
  • केंद्र द्वारा दिल्ली को दी जाने वाली राश‍ि बिहार को दिये जाने वाले धन की चार गुनी होती।
  • शैक्ष‍िक संस्थान, रिसर्च सेंटर, उद्योग आदि खोलने की बात आती तो केंद्र सरकार बिहार को अलग कर देती।
  • 40 में से 28 जिलों में हर साल सूखा पड़ता और 12 जिलों में बाढ़ आती, लेकिन कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये।
  • बिहार सरकार के तमाम अनुरोधों पर भी कभी यहां बांध नहीं बनाये गये। बिहार नेपाल के बांध की दया पर जी रहा है।
  • मुंबई को आर्थ‍िक राजधानी बनाने में सबसे बड़ा हाथ बिहार के लोगों का है।

वनइंडिया का पक्ष

जो पिता अपनी बेटी को बोझ समझते हैं, वो बिहार को भी बोझ समझेंगे, लेकिन जो पिता बेटी को अपनी शान कहते हैं, वो बिहार को देश की शान कहने में जरा भी हिचकिचायेंगे नहीं। बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में जीत किसी की भी हो, हम उम्मीद करेंगे कि जो भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेगा वो टीम इंडिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। और जनता के प्रतिनिध‍ि ने विकास कार्यों को बोझ मान लिया, तो इसमें कोई शक नहीं कि बिहार एक दिन वाकई में बोझ बन जायेगा।

बिहार से जुड़े रोचक तथ्य बदल देंगे आपका नजरिया

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