Online Gaming: क्या ऑनलाइन गेम की लत बच्चों को बना रही मानसिक रोगी?
ऑनलाइन गेमिंग की लत आपके बच्चों को मानसिक बीमार बना रही है। राजस्थान के अलवर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसके बारे में जानकर आप अपने बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखना चाहेंगे।
अलवर जिले के एक 14 साल के बच्चे को ऑनलाइन गेम खेलने की ऐसी लत लग गयी है कि वह मानसिक रोगी बन गया। अलवर जिले के इस 14 साल के बच्चे को फ्री फायर और पबजी जैसे ऑनलाइन गेम खेलने की लत लग गयी थी। बच्चे के माता-पिता बेहद गरीब हैं और रोजी-रोटी के लिए घर से सुबह निकल जाते है।

करीब 6 महीने पहले बच्चे के पिता ने ऑनलाइन क्लास के लिए बच्चे को एंड्रॉइड फोन खरीदकर दिया था। फोन में गेम खेलने की लत की वजह से वह पढ़ाई से दूर होता गया और दिन के 14 से 15 घंटे फोन पर गेम खेलता रहा। गेम खेलने की लत की वजह से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा। अब उसके हाथ मोबाइल फोन में गेम के कंट्रोल्स की तरह हमेशा हिलते-डुलते रहते हैं और वह बार-बार 'फायर-फायर' चिल्लाने लगता है। अब उसका इलाज अलवर के एक दिव्यांग संस्थान में चल रहा है।
कई मामले आ चुके हैं सामने
पिछले साल अक्टूबर में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल शाहजहांपुर में एक महीने के अंदर ऐसे 5 से 7 मामले सामने आए थे। पहले पढ़ाई में होशियार रहने वाले बच्चे ऑनलाइन गेम और मोबाइल की लत की वजह से फिसड्डी होने लगे। बच्चों के अभिभावकों ने डॉक्टर और मनोचिकित्सक से उनकी काउंसलिंग करवाई, तब जाकर बच्चे ठीक हुए।
कोरोना का असर अभी तक?
एक सर्वे के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद से बच्चों को मोबाइल यूज करने की ज्यादा लत लग गयी है। कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन की वजह से बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज होने लगी। बच्चों को मोबाइल फोन या टैबलेट देना अभिभावकों के लिए मजबूरी बन गया था। बच्चे मोबाइल हाथ में मिलने की वजह से ऑनलाइन गेमिंग के आदि हो गए और मानसिक तौर पर बीमार होने लगे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादा समय तक ऑनलाइन गेम खेलने वाले बच्चों के व्यवहार में उग्रता आ जाती है, जिसके बाद उनमें तनाव बढ़ने लगता है। कुछ मामलों में उनको दौरे भी पड़ने लगते हैं।
मोबाइल पर बिताते हैं 3 घंटे से ज्यादा समय
पिछले साल लोकल सर्किल द्वारा किये गए एक सर्वे के मुताबिक, भारत के 40 प्रतिशत अभिभावकों ने माना था कि उनके बच्चे सोशल मीडिया इस्तेमाल करने, वीडियोज देखने और ऑनलाइन गेम खेलने के आदि हैं। इन बच्चों की उम्र 9 साल से 17 साल के बीच है। इस सर्वे में शामिल 49 प्रतिशत अभिभावक मानते हैं कि उनके 9 साल से 13 साल के आयुवर्ग के बच्चे रोजाना 3 घंटे से ज्यादा समय इंटरनेट पर बिताते हैं। वहीं, 47 प्रतिशत अभिभावकों का मानना था कि उनके बच्चे को ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियोज देखने की बुरी लत लग गई है। सर्वे में भाग लेने वाले 62 प्रतिशत अभिभावकों का मानना है कि उनके 13 साल से 17 साल के बच्चे प्रतिदिन 3 घंटे से ज्यादा समय स्मार्टफोन पर बिताते हैं।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की मानें तो बेहतर नींद के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का यूज रोजाना 2 घंटे से कम करना चाहिए। यह सर्वे भारत के 287 जिलों के 65 हजार पेरेंट्स पर किया गया था। इसमें 67% पुरुष और 33% महिलाएं थीं। 51% लोग मेट्रो सिटी या टियर-1 शहर से थे। वहीं 37% टियर-2 और 12% टियर-3 और टियर-4 जिलों से थे। स्टडी को 9 से 13 साल के बच्चों और 13 से 17 साल के बच्चों में बांटा गया था।
गेम का बच्चों पर क्या हो रहा असर?
सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की लत की वजह से आजकल बच्चे मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर्स के शिकार हो रहे हैं। उनमें स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। साथ ही आत्मविश्वास, फोकस और अच्छी नींद की कमी होती जा रही है। टीनएजर्स के व्यवहार में भी तेजी से बदलाव हो रहे हैं। वे ज्यादा चिड़चिड़े और गुस्सैल होते जा रहे हैं।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स का मानना है कि बच्चों पर ऑनलाइन गेमिंग की वजह से गंभीर असर हो रहा है, जिनमें नींद न आना, एकाग्रता में कमी, भूलने की बीमारी, समाज से कटना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, आक्रामकता बढ़ना, रचनात्मक कार्य करने की कमी, आंखों की रोशनी प्रभावित होना, मोटापा, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां आदि शामिल हैं।
क्या है उपाय?
इस मामले में ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि माता-पिता को बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत को सीमित करना चाहिए। ज्यादा देर तक मोबाइल पर लगे रहने वाले बच्चों की एक्स्ट्रा देखभाल करनी चाहिए। बच्चों के फोन में ऑनलाइन गेम खरीदने के लिए उन्हें अपने बैंक या कार्ड्स की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा बच्चों को ज्यादा से ज्याद आउटडोर गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें व्यस्त रखने के लिए खाली समय में पेंटिंग, म्यूजिक आदि एक्टिविटी करवाएं।
बच्चों में अकेलापन भी ऑनलाइन गेमिंग की लत का बहुत बड़ा कारण है। उन्हें अकेलापन महसूस न होने दें। समय-समय पर बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फोन की निगरानी रखनी चाहिए। एंड्राइड फोन होने पर गूगल के ऐप स्टोर पर जाएं। वहां सेटिंग आप्शन में जाकर माय एप्स एंड गेम्स को ओपन करें। इसमें लाइब्रेरी, अपडेट्स और इन्स्टाल्ड में जाकर ये देखें कि क्या इंस्टाल और क्या अनइंस्टाल हुआ है।












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