Indian Economy: कितने राज्य तैयार हैं 5 ट्रिलियन इकोनोमी के लिए?
Indian Economy: भारत 2028 तक 5 ट्रिलियन डॉलर कि अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह यकीन केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही नहीं है, बल्कि दुनिया के तमाम आर्थिक संगठन और एक्स्पर्ट्स भी यह मान रहे हैं। आईएमएफ ने हाल ही में भारत को सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बताया है। लेकिन 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सिर्फ केंद्र की ही कोशिश काफी नहीं होगी, राज्यों को भी कमर कसनी होगी। एक नजर डालते हैं कि कौन राज्य इस लक्ष्य के लिए कितना तैयार है।
कैसे होती है जीडीपी की गणना
देश में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की गणना केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत काम कर रहा केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) करता है। वही उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आदि सूचकांकों का संकलन करता है। सीएसओ इसके लिए विभिन्न संघीय और राज्य सरकार की एजेंसियों और विभागों के साथ समन्वय कर उनके यहाँ से आकड़ा इकट्ठा करता है। बाजार विनिमय दर और क्रय शक्ति समता (पर्चेज पॉवर पैरिटी यानि पीपीपी) के संदर्भ में अर्थव्यवस्था के सापेक्ष आकार की तुलना करते हुए, सकल घरेलू उत्पाद का आंकड़ा तैयार करता है।

भारत अलग-अलग 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों का देश हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व है। देश की अर्थव्यवस्था के विकास में सभी का प्रदर्शन महत्वपूर्ण है। कुछ राज्य धन और समृद्धि के मामले में बाकियों से काफी आगे हैं और राष्ट्रीय आय में उनका योगदान ज्यादा है। कुछ राज्य ऐतिहासिक रूप से कमजोर हैं और अभी भी खुद को ऊपर उठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पर 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए सभी का योगदान बढ़ना जरूरी है।
कौनसे राज्य जीडीपी में बड़ा योगदान करते हैं
महाराष्ट्र
भारत में महाराष्ट्र सबसे ज्यादा जीडीपी में योगदान करने वाला राज्य है। यह अकेले लगभग 400 अरब डॉलर से अधिक के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का योगदान करता है। मुंबई देश का सबसे अधिक राजस्व देने वाला शहर है। महाराष्ट्र ना सिर्फ कपास, सोयाबीन और गन्ने जैसे फसलों का प्रमुख उत्पादक है, बल्कि ऑटोमोबाइल, कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योग में भी काफी आगे है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज भी यहीं हैं। यह भारत का सबसे अमीर राज्य है। मार्च 2023 को समाप्त वित्तीय वर्ष में राज्य की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया था, जबकि इस दौरान राष्ट्रीय औसत विकास दर भी 6.5 प्रतिशत होने का अनुमान था।
देश को 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनोमी बनाने के लिए महाराष्ट्र ने अगले पांच साल में 17.13% की विकास दर के साथ 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तय किया है। हालांकि यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पिछले सात वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था की विकास दर औसतन 8.75 प्रतिशत ही रही है। राज्य को इसके लिए 1,535 अरब डॉलर का निवेश करना होगा।
तमिलनाडु
महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु दूसरा राज्य है, जो 300 बिलियन डॉलर के साथ राष्ट्रीय आय में योगदान कर रहा है। इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल और कपड़ा उद्योग तमिलनाडु के मजबूत आधार हैं। तमिलनाडु का चेन्नई, ऑटोमोबाइल की इंजीनियरिंग का सबसे बड़ा केंद्र है। राज्य का कृषि उद्योग भी काफी बड़ा है। इसके अलावा आईटी और सॉफ्टवेयर उद्योग भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
तमिलनाडु बजट दस्तावेज के अनुसार 2023-24 में तमिलनाडु का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) (मौजूदा कीमतों पर) 28.3 लाख करोड़ रुपये था जो कि पिछले साल के मुकाबले 14 प्रतिशत अधिक है। तमिलनाडु ने भी भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की राह में 1 ट्रिलियन डॉलर का योगदान करने की योजना बनाई है। इसकी घोषणा खुद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने की है।
गुजरात
गुजरात 150 अरब डॉलर से अधिक के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के साथ भारत का तीसरा सबसे धनी राज्य है। गुजरात का मजबूत औद्योगिक आधार प्रमुख और सुविकसित बुनियादी संरचना इसको आगे ले जाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। कपड़ा, रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योगों की भी स्थिति काफी मजबूत हैं। वर्ष 2022-23 के दौरान गुजरात की विकास दर 15.5 प्रतिशत रही है और राज्य ने अगले पांच वर्षों में अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को लगभग दोगुना कर 42 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा है।
कर्नाटक
कर्नाटक भी 150 बिलियन से अधिक के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के साथ राष्ट्रीय आय में योगदान कर रहा है। कर्नाटक कृषि और औद्योगिक दोनों क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है आईटी, जैव प्रौद्योगिकी और एयरोस्पेस सहित कई उद्योग तेजी से फैल रहे हैं। कर्नाटक सरकार ने भी वर्ष 2030 तक 5 ट्रिलियन इकोनोमी में 1 ट्रिलियन डॉलर के योगदान का लक्ष्य रखा है। इनके अलावा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और आंध्र भी तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहे हैं और इन्होंने अगले तीन साल में 7 से 10 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
कमजोर कड़ी वाले राज्य
बिहार
बिहार, भारत का पांचवां सबसे गरीब राज्य है। 2022-23 में बिहार की जीडीपी केवल 94 बिलियन डॉलर की थी। दिल्ली से भी कम। हालांकि बिहार सरकार यह दावा करती है कि उसकी विकास दर राष्ट्रीय विकास दर से भी अधिक है, पर वास्तविकता यह है कि बिहार का योगदान कई राज्यों से कम है।
झारखंड
झारखंड में गरीबी का स्तर लगभग 42.16% है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि प्रधान है, और औद्योगीकरण और रोजगार के अवसरों की कमी गरीबी की समस्या को और बढ़ा रही है।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में भी एक-तिहाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे है। हालाँकि राज्य भारत के कुल इस्पात उत्पादन में 15 प्रतिशत का योगदान देता है, लेकिन सीमित आर्थिक अवसरों के कारण यह प्रदेश गरीबी से जूझ रहा है।
अरुणाचल प्रदेश
पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे बड़ा राज्य अरुणाचल प्रदेश, भारत का चौथा सबसे गरीब राज्य है। इसकी लगभग 34.67% आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है। अपने प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद, अरुणाचल राष्ट्रीय आय में कोई विशेष योगदान नहीं कर पा रहा है।












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