Hemant Soren case: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर एजेंसियों का शिकंजा किस तरह कसा, जानिए पूरी प्रक्रिया
अवैध खनन मामले में घिरे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब इस कथित खनन घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हेमंत सोरेन को समन भेजा है और रांची स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए भी बुलाया, हालांकि मुख्यमंत्री सोरेन ने अपनी व्यस्तता बताते हुए जाने से इंकार कर दिया और तीन सप्ताह का समय मांगा है।
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हाल ही में इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा के घर छापे के दौरान ईडी को हेमंत सोरेन की बैंक पासबुक और साइन की हुई चेक बुक मिली थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री सोरेन पर भी शिकंजा कसने लगा है।
इस मामले में कब क्या हुआ?
- 8 जुलाई 2022: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा सहित कई लोगों के ठिकानों पर छापा मारा गया।
- 19 जुलाई 2022: मुख्यमंत्री सोरेन के बरहेट विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा की गिरफ़्तारी हुई।
- 4 अगस्त 2022: प्रवर्तन निदेशालय ने पंकज मिश्रा के सहयोगी बच्चू यादव को गिरफ्तार किया।
- 25 अगस्त 2022: हेमंत सोरेन के करीबी कारोबारी प्रेम प्रकाश को गिरफ्तार किया गया।
- 16 सितम्बर 2022: पंकज मिश्रा, प्रेम प्रकाश और बच्चू यादव पर चार्जशीट दाखिल।
- 29 अक्टूबर 2022: पंकज मिश्रा और प्रेम प्रकाश की जमानत याचिका ख़ारिज हुई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ऑफिस ऑफ प्रॉफिट केस में अब तक क्या-क्या हुआ?
- 20 जनवरी 2022: आरटीआई कार्यकर्ता सुनील महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पद का गलत इस्तेमाल कर अपने नाम से खनन लीज लेने के संबंध में राज्यपाल को शिकायत पत्र दिया।
- 10 फरवरी 2022: पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से त्यागपत्र माँगा।
- 11 फरवरी 2022: पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन द्वारा अपने नाम पर अनगड़ा में 0.88 एकड़ क्षेत्रफल का पत्थर खदान लेने की शिकायत राज्यपाल से की।
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में कार्रवाई के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के नेतृत्व में भाजपा के सदस्यों ने राज्यपाल को ज्ञापन दिया।
- राज्यपाल ने शिकायत पत्र के साथ केंद्रीय चुनाव आयोग से जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9ए के तहत राय मांगी।
- 8 अप्रैल 2022: चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव से खनन लीज आवंटन प्रमाणीकरण के लिए कागजात मांगे।
- 27 अप्रैल 2022: मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को खनन लीज आवंटन मामले में 600 पेज का जवाब भेजा।
- 2 मई 2022: चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नोटिस भेजा और 10 मई तक इसका जवाब मांगा।
- 10 मई को चुनाव आयोग को जवाब देने के लिए हेमंत सोरेन ने अपनी मां के बीमार होने की बात कह कर 10 दिन का समय मांगा और चुनाव आयोग ने इस आग्रह को मानते हुए 20 मई 2022 तक जवाब देने का समय दिया।
- 20 मई 2022: हेमंत सोरेन ने अपना जवाब चुनाव आयोग को भेजा।
- 31 मई 2022: चुनाव आयोग ने इस मामले में हेमंत सोरेन से स्वयं या उनके वकीलों के माध्यम से जवाब मांगा। मुख्यमंत्री ने और अधिक समय की मांग की तब आयोग ने 14 जून की तिथि निर्धारित की।
- मुख्यमंत्री द्वारा पुन: तिथि बढ़ाने की मांग की गई तब आयोग द्वारा 28 जून की अंतिम तिथि निर्धारित करते हुए पत्र राज्य निर्वाचन आयोग को भी भेज दिया गया।
- 28 जून 2022: सुनवाई में भारतीय जनता पार्टी के वकीलों ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 9ए के तहत मुख्यमंत्री की सदस्यता रद्द करने पर जोर दिया। वहीं मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा की टीम ने चुनाव आयोग के समक्ष इसका विरोध करते हुए कहा था यह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला नहीं है। चुनाव आयोग ने अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई का समय दिया।
- 14 जुलाई 2022: हेमंत सोरेन के वकीलों ने अपना पक्ष रखा। सुनवाई की अगली तिथि पांच अगस्त निर्धारित की गई। हेमंत सोरेन के वकीलों के आग्रह पर तिथि बढ़ाकर आठ अगस्त की गई।
- 8 अगस्त 2022: भाजपा के वकीलों ने अपना पक्ष रखा, मुख्यमंत्री सोरेन के वकीलों ने विस्तृत पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। चुनाव आयोग ने 12 अगस्त की तिथि निर्धारित की।
- 12 अगस्त 2022: हेमंत सोरेन मामले की सुनवाई पूरी हुई। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को लिखित बहस 18 अगस्त तक भेजने का निर्देश दिया।
- 18 अगस्त 2022: चुनाव आयोग को हेमंत सोरेन के वकीलों की तरफ से लिखित जवाब दिया गया। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
- 25 अगस्त 2022: सुबह साढ़े 10 बजे चुनाव आयोग ने अपनी राय राज्यपाल को भेज दी।












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