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Nepal Plane Crash: क्या नेपाल के हवाई अड्डे बन गए हैं ‘बरमुडा ट्राएंगल’?

नेपाल में पिछले दो दशकों में दर्जनों प्लेन क्रैश हुए हैं, जिसमें सैकड़ों लोंगों की जान चली गई। नेपाल में लगातार हो रहे प्लेन क्रैश की वजह से इसे हवाई जहाजों के लिए ‘कब्रगाह’ कहा जाने लगा है।

Have Nepals airports become Bermuda Triangle

नेपाल में 15 जनवरी को एक बड़ा विमान हादसा हुआ है। इस विमान दुर्घटना में 72 लोगों की जान चली गई, जिसमें 68 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स शामिल थे। राजधानी काठमांडू से पोखरा जाने वाला यह विमान लैंड करने से महज 10 मिनट पहले क्रैश हो गया। इस बड़े विमान हादसे में 53 नेपाली जबकि 15 विदेशी नागरिक सवार थे। 5 भारतीय नागरिकों की भी मौत हो गई। पिछले 30 सालों में यह नेपाल में हुई सबसे भयानक हवाई दुर्घटना है। नेपाल में हुए इस प्लेन क्रैश को देखते हुए वहां के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।

यह पहला मौका नहीं है, जब नेपाल में कोई यात्री विमान क्रैश हुआ हो। पिछले दो दशक में दर्जनों प्लेन क्रैश हुए हैं, जिसकी वजह से 270 से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि नेपाल एक नया बरमुडा ट्राएंगल तो नहीं बन गया है? आइए, जानते हैं नेपाल में हुई बड़े विमान दुर्घटनाओं के बारे में।

पोखरा में पहले भी हो चुके है हादसें

पिछले साल 29 मई 2022 को पोखरा में ही एक छोटा एटरक्राफ्ट दुर्घनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 16 नेपाली, चार भारतीयों और दो जर्मन नागरिकों की मौत हो गई थी। येती एयरलाइंस द्वारा ऑपरेट की जाने वाली यह छोटी एयरक्राफ्ट DHC-6-300 पोखरा एयरपोर्ट से उड़ान भरने के 15 मिनट बाद ही क्रैश हो गई। नेपाली मीडिया और फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के मुताबिक, येती एयरलाइंस इस एयरक्राफ्ट को अप्रैल 1979 से ऑपरेट कर रही थी।

पोखरा में ऑपरेट करने वाली तारा एयर का एक विमान 24 फरवरी 2016 को क्रैश हो गया था, जिसमें 23 लोगों की जान चली गयी। यह विमान पोखरा के खराब मौसम की वजह से दुर्घटना का शिकार हुआ था। येती एयर की पैरेंट कंपनी तारा एयर का वह एक ट्विन ऑटर एयरक्राप्ट था।

हवाई अड्डे बन गए है बरमुडा ट्राएंगल

नेपाल में दर्जनों विमान दुर्घटनाओं के पीछे की एक बड़ी वजह खराब मौसम है। नेपाल हिमालय की तराई में बसा एक छोटा देश है, जहां का 80 प्रतिशत हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र में आता है। नेपाल की भौगोलिक परिस्थिति की वजह से वहां बड़े एयरपोर्ट्स और रनवे नहीं बनाये जा सकते। राजधानी काठमांडू समेत फिलहाल देश में कुल 43 एयरपोर्ट्स हैं। काठमांडू में बड़े विमानों को ऑपरेट किया जा सकता है और अन्य सभी एयरपोर्ट्स पर छोटे विमानों को ही उड़ान भरने और उतरने के लिए बेहद छोटी हवाई पट्टियां हैं।

गौरतलब है कि इनमें से अधिकतर एयरपोर्ट्स बहुत अधिक उंचाई (high altitude) पर बने हैं। इसमें माउंट एवरेस्ट के समीप बना स्याडबोचे (Syangboche Airport) है जोकि समुद्र तल से 12,297 फीट की उंचाई पर स्थित है। यहाँ सामान्यतः विमानों को ऑपरेट नहीं किया जाता है। इसके अलावा लुकला एयरपोर्ट (तेंजिंग हिलेरी एयरपोर्ट) को एवरेस्ट रीजन में एंट्री का द्वार माना जाता है। चारों तरफ से यह बड़े-बड़े पहाड़ों से घिरा हुआ है जिसके चलते इसे दुनिया का सबसे खतनाक एअरपोर्ट भी माना गया है। वहीं, समुद्र तल से 9,246 फीट की उंचाई पर बना सिमीकोट एयरपोर्ट भी विमानों के लिए सुरक्षित नहीं है। साल 2011 में लैंडिंग के दौरान यहां एक बड़ी हवाई दुर्घटना हो चुकी है।

इसी क्रम में नेपाल का रारा एअरपोर्ट (ताल्चा एयरपोर्ट) है। यह हवाईअड्डा अधिकतर समय भारी बर्फबारी के चलते बंद रहता है क्योंकि हवाई पट्टी पर बर्फ के चलते फिसलन बन जाती है। साल 2010-2011 में यहां हवाई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। पश्चिमी नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र में जोमसोम हवाई अड्डा है जो समुद्र तल से 8,976 फीट पर स्थित है। इस हवाईअड्डे पर हवाई दुर्घटनाओं का एक लम्बा इतिहास रहा है। दरअसल, यहां का मौसम और तेज हवाएं विमानों के ऑपरेशन में बाधक बनी रहती हैं। जिसके चलते 1970, 1993, 1998, 2012, 2013, 2016, और 2022 में यहां बड़ी हवाई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

मौसम की जानकारी देने वाली तकनीकों का अभाव

खराब मौसम की वजह से विजिबिलिटी कम होना नेपाल में एक सामान्य समस्या बन गयी है। यही नहीं, नेपाल की स्थानीय हवाई कम्पनियां आज भी पुराने हवाई जहाजों का इस्तेमाल कर रही है, जिनमें अत्याधुनिक मौसम सम्बन्धी राडार नहीं है। काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौसम संबंधी अवलोकन एवं पूर्वानुमान के लिए तकनीकों की उपलब्धता है लेकिन अन्य घरेलू हवाईअड्डों में मौसम संबंधी तकनीकों में नेपाल सरकार का कोई ध्यान नहीं है।

खराब मौसम बनता है 'विलेन'

2010 में भी दो बड़ी विमान दुर्घटनाएं हुई थी, जिसमें 36 लोगों की जानें चली गई थी। 24 अगस्त 2010 को खराब मौसम की वजह से अग्नि एयर का प्लेन क्रैश हुआ था, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गयी। इस प्लेन क्रैश में चार अमेरिकी, एक जापानी और एक ब्रिटिश यात्री शामिल थे। साल 2014 में भी खराब मौसम की वजह से नेपाल एयरलाइंस का एक छोटा विमान क्रैश हो गया था, जिसमें 8 लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा साल 2011 में विदेशी सैलानियों को ले जा रहा एक विमान क्रैश हो गया था, जिसकी वजह से 19 लोगों की जान चली गई थी। विदेशी सैलानियों को माउंट एवरेस्ट का व्यू दिखाने जा रहा वह विमान खराब मौसम का शिकार हुआ था।

फरवरी 2016 में नेपाल के कालीकोट जिले में कष्टमंडप एयरलाइंस का एक छोटा विमान क्रैश हो गया था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। साल 2018 में बांग्लादेश से काठमांडू जा रहा एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 71 लोगों की जानें चली गई थी। यूएस-बांग्ला एयरलाइंस द्वारा ऑपरेट किया जाने वाला वह विमान नेपाल की राजधानी काठमांडू की तराई में जाने के बाद क्रैश हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम बिगड़ने की वजह से बांग्ला एयरलाइंस का वह Bombardier Q400 सीरीज का एयरक्राफ्ट नीचे गिर गया था। दिसंबर 2022 में एक प्लेन क्रैश में 22 लोगों की जान चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक, खराब मौसम की वजह से विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह क्रैश हो गया।

2000 के दशक में 7 विमान हुए क्रैश

2000 से लेकर 2009 के बीच नेपाल में कुल 7 प्लेन क्रैश की घटना रिपोर्ट की गई, जिसमें करीब 80 लोगों की जान चली गई। 27 जुलाई 2000 को रॉयल नेपाल एयरलाइंस की कनैडियन ट्विन ऑटर पैसेंजर प्लेन पश्चिमी नेपाल में क्रैश हो गया, जिसकी वजह से 25 लोगों की जान चली गई। वहीं, 2002 में ट्विन इंजन प्लेन क्रैश होने से 4 लोग काल की गाल में समा गए। लैंड करने से कुछ मिनट पहले यह विमान पहाड़ों से टकरा गया था।

इसके महज 25 दिन बाद ही एक और एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई। संग्रीला एयरलाइंस की यह विमान भी खराब मौसम का शिकार हुआ था। 2006 में येती एयरलाइंस की एक विमान लैंड करने से ठीक पहले क्रैश हो गया, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 2008 के मार्च और अक्टूबर में हुए विमान दुर्घटना में 28 लोगों की मौत हो गई थी। ये सभी विमान भी खराब मौसम की वजह से क्रैश हुए थे।

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