Happy Father's Day 2021: आज भी पापा मुझे I Love You नहीं कहते लेकिन...

नई दिल्ली, 20 जून। अगर मां जीवन की सच्चाई है तो पिता जीवन का आधार, मां बिना जीवन अधूरा है तो पिता बिना अस्तित्व अधूरा। जीवन तो मां से मिल जाता है लेकिन जीवन के थपेड़ो से निपटना तो पिता से ही आता है, जिंदगी की सच्चाई के धरातल पर जब बच्चा चलना शुरू करता है तो उसके कदम कहां पड़े और कहां नहीं.. ये समझाने का काम पिता ही करते हैं। समाज की बंदिशो से अपने बच्चे को निकालने का काम एक पिता ही कर सकता है। पिता अगर पास है तो किसी बच्चे को असुरक्षा नहीं होती है। पिता एक वट वृक्ष है जिसके पास खड़े होकर बड़ी से बड़ी परेशानी छोटी हो जाती है।

पापा दोस्त भी हैं, टीचर भी हैं और रक्षक भी

पापा दोस्त भी हैं, टीचर भी हैं और रक्षक भी

वक्त आने पर वो दोस्त बन जाते हैं तभी तो हर लड़की अपने जीवन साथी में अपने पिता का अक्स खोजती है। जिस तरह उसके पिता उसके पास जब होते हैं तो उसे भरोसा होता है कि कोई भी नापाक इरादे उसे छू नहीं सकते हैं। उसे अपनी सुरक्षा और ना टूटने वाले भरोसे पर गर्व होता है इसलिए वो जब भी अपने साथी के बारे में सोचती है तो उसकी कल्पनाओं में उसके पिता जैसी ही कोई छवि अंकित होती है।

पापा कभी मुंह से कुछ नहीं कहते हैं...

पापा कभी मुंह से कुछ नहीं कहते हैं...

जबकि हर बेटे की ख्वाहिश होती है कि वो ऐसा कुछ करे जिससे उसके पिता का सीना चौड़ा हो जाए, उनकी मुस्कुराहट और आंखो की चमक सिर्फ और सिर्फ अपने पिता के लिए होती है। उसकी पहली कामयाबी तब तक अधूरी होती है जब तक उसके पिता आकर उसकी पीठ नहीं थपथपाते हैं। अक्सर बाप-बेटे एक -दूसरे से भावनाओं का आदान-प्रदान नहीं करते हैं लेकिन सबको पता है कि दोनों ही के दिल में प्रेम का अथाह समंदर होता है।

कभी उस पिता की आंखो में झांकने की कोशिश कीजिए

कभी उस पिता की आंखो में झांकने की कोशिश कीजिए

कभी उस पिता की आंखो में झांकने की कोशिश कीजिए जब उसका बेटा उसके सामने अपनी पहली कमाई लेकर आता है इसलिए तो कहते है कि पिता का कर्ज आप तब ही चुका सकते है जब आप अपने जैसे ही किसी नन्हे प्राणि को धरती पर लाते हैं।

पापा मुझे कभी I LOVE YOU नहीं कहते हैं...

पापा मुझे कभी I LOVE YOU नहीं कहते हैं...

आज जमाना बदल गया है, इंटरनेट युग में बड़ी जल्दी पैच-अप और ब्रेक अप होता है लेकिन आज भी पिता अपने बच्चों को खुलकर I LOVE YOU नहीं बोल पाते हैं, मां तो गले लगाकर, माथा चूमकर अपने प्यार को व्यक्त कर देती है लेकिन पिता आज भी बच्चों के सोने के बाद कमरे में आते हैं, बिखरी चीजों को उठाकर टेबल पर रखते हैं और बालों को सहलाकर, लाईट बुझाकर और चादर ओढ़ाकर मुस्कुराकर चले जाते हैं, लेकिन खुलकर अपनी भावनाओं का इजहार ना करने वाले पिता को हजारों किमी दूर बैठी बेटी या बेटे की आवाज से पता चल जाता है कि उनका बच्चा हंस रहा है या रो रहा है, कुल मिलाकर सार इतना ही पापा के लिए उनके बच्चे ही उनकी जान होते हैं।

 शायद इसलिए ही कहा गया है कि ....

शायद इसलिए ही कहा गया है कि ....

अजीज भी वो है, नसीब भी वो है
दुनिया की भीड़ में करीब भी वो है
उनकी दुआ से चलती है जिंदगी
क्योंकि खुदा भी वो है और तकदीर भी वो है..

तो चलिए देर किस बात की है ..जाइये अपने पिता के पास और पैर छूकर अपने आप को धन्य कीजिये और जीवन की सच्चाई से रूबरू कराने के लिए उन्हें तहे दिल से धन्यवाद दीजिए... हैप्पी फादर्स डे....

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