Ram Katha Vachak: रामभद्राचार्य से कुमार विश्वास तक, राम कथा वाचकों की लंबी शृंखला
'मेरी चौखट पे चल के आज, चारों धाम आये हैं, बजाओ ढोल स्वागत में, मेरे घर राम आये हैं...'। पूरे देश में इस समय माहौल राममय हो गया है। अगले सप्ताह 22 जनवरी को अयोध्या में राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा जो है। पर देश में कई ऐसे संत एवं कथा वाचक भी हैं जो श्रीराम के रूप और गुण का बखान वर्षों से कर रहे हैं। 'हरि अनंत हरि कथा अनन्ता' के स्वरूप को जन जन तक पहुंचाते रहे हैं। उनको सुनने के लिए हजारों लोग इकट्ठा होते हैं। जानते हैं देश के कुछ लोकप्रिय कथावाचकों के बारे में।
जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी
जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी का नाम देश में बड़े ही आदर से लिया जाता है। रामभद्राचार्य जी रामानंद संप्रदाय के चार प्रमुख गुरुओं में से एक हैं। संत समाज में वे अपनी विद्वता के कारण खूब जाने जाते हैं। 14 जनवरी, 1950 को जौनपुर (उत्तरप्रदेश) में जन्में रामभद्राचार्य जी के ज्ञान के सामने लोग तब नतमस्तक हो गए, जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वेद पुराण के उद्धरण के साथ रामलला के पक्ष में गवाही दी। कहते हैं कि उसके बाद ही पूरे फैसले का रूख बदल गया।

जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी की खास बात यह है कि उन्होंने दो माह की उम्र में ही अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी, बावजूद उसके वे आज 22 भाषाओं के जानकार हैं। उन्होंने 80 ग्रंथों की रचना की है। साल 2015 में जगद्गुरु को भारत सरकार द्वारा पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। वे तुलसीपीठ के संस्थापक भी हैं।
मोरारी बापू जी
मोरारी बापू एक आध्यात्मिक गुरु और कथावाचक हैं। मोरारी बापू के सुविचार, प्रवचन आदि सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं। मोरारी बापू देश-विदेश में रामकथा का आयोजन वर्षों से करते आ रहे हैं। मोरारी बापू के कथा सुनाने का अंदाज बहुत निराला है। वह कथा सुनाने के दौरान गद्य, पद्य, सुविचार, कविता और शायरी भी कहते हैं।
मुरारी बापू का जन्म गुजरात में महुआ के तालगरजदा गांव में 25 सितंबर, 1946 को हुआ था। वे रामचरित मानस के एक जाने माने प्रतिपादक भी हैं। इनका विवाह नर्मदाबेन के साथ हुआ है। उनके परिवार में एक बेटा और तीन बेटियाँ हैं। वर्तमान में मोरारी बापू श्री चित्रकूटधाम ट्रस्ट, तालगरजदा महुआ गुजरात में रहते हैं।
मोरारी बापू राम कथा के माध्यम से जो धन कमाते हैं वो सारा पैसा दान कर देते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें आधुनिक सुख-सुविधाओं की कोई आवश्यकता नहीं है। मोरारी बापू ने उत्तराखंड में आई आपदा के दौरान एक करोड़ का दान दिया था। वह छात्रों को मुफ्त शिक्षा भी प्रदान करते हैं। 2019 में पुलवामा हमले के बाद मोरारी बापू ने प्रत्येक शहीद के परिवार को एक लाख की सहायता राशि दी थी।
देवकी नंदन ठाकुर जी
देवकी नंदन ठाकुर जी भी अध्यात्मिक गुरु और रामकथा वाचक हैं। वह श्रीराम कथा के साथ श्रीमद्भागवत पुराण, देवी भागवत और शिव पुराण कथा का भी वाचन करते हैं। 12 सितंबर, 1978 को यूपी में मथुरा के ओहावा गांव में देवकी नंदन ठाकुर जी महाराज का जन्म हुआ था। ठाकुर जी की पत्नी का नाम अंदमाता है। वह साधारण जीवन यापन करते हैं।
देवकी नंदन जी सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं और इनके लाखों की संख्या में फॉलोअर्स हैं। जब वह 6 वर्ष के थे, तभी घर छोड़कर वृंदावन चले गए थे और ब्रज के रासलीला संस्थान में भाग लेने लगे। वह लगभग 26 वर्षों से राम कथा में लीन हैं। देवकीनंदन ठाकुर जी ने 20 अप्रैल 2006 में विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसके जरिए वे गो-रक्षा अभियान, प्रदूषण मुक्त कार्य, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, छुआछूत विरोधी कार्यक्रम के साथ युवाओं में भारतीय संस्कृति व संस्कार देने का काम करते हैं।
श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री जी
श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री (ठाकुर जी) एक प्रसिद्ध कथावाचक हैं। कृष्ण चंद्र ठाकुर जी अद्भुत शैली में राम कथा सुनाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी वाणी में साक्षात सरस्वती का वास है। श्रीकृष्ण चंद्र ठाकुर का जन्म 1 जुलाई 1960 को वृंदावन के पास लक्ष्मणपुरा गांव में हुआ था। ठाकुर जी के परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा है। श्रीकृष्ण चंद्र ठाकुर जी अब तक करीब 1000 से अधिक बार श्रीराम कथा और भागवत कथा सुना चुके हैं। ठाकुर जी ने एक पुस्तक भी लिखी है, जिसका शीर्षक है - 'श्री मद् भागवत कथाकार'। इसमें इन्होंने श्रीमद् भागवत को सरल शब्दों में समझाया है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
देश के साधु-संतों में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सबसे अधिक चर्चा में रहते हैं। धीरेंद्र शास्त्री बागेश्वर धाम महाराज के नाम से भी लोकप्रिय हैं। अपनी अलग भाषा शैली में कथा वाचन की वजह से भी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में धीरेंद्र शास्त्री बने रहते हैं। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। ऐसा कहा जाता है कि बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री को हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए हैं। वे मध्य प्रदेश के छतरपुर के प्राचीन धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर और पुजारी भी हैं। बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री का जन्म 4 जुलाई 1996 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ागंज गांव में हुआ था।
अनिरुद्धाचार्य जी महाराज
अनिरुद्धाचार्य जी महाराज देश के नामी कथावाचकों में से हैं। इनका जन्म 27 सितंबर, 1989 में मध्यप्रदेश के दमोह जिले मे रिंवझा नामक गांव में हुआ था। अनिरुद्ध महाराज की पत्नी भी उनके जैसे प्रवचन और भक्ति गायन करती हैं। अनिरुद्ध आचार्य महाराज जी के दो संतान हैं। उनकी पत्नी को लोग गुरुमाता के नाम से जानते हैं।
अनिरुद्धाचार्य जी श्रीमद्भागवत पुराण की कथा और रामचरित मानस की कथा करते हैं। उनके भजन सुनने के लिए काफी भीड़ जुटती है। अनिरुद्धाचार्य जी महाराज बाकी कथावाचकों की तरह राजनीति, सामाजिक बयान देने से नहीं डरते हैं। देश की राजनीति पर भी बेबाक तरीके से बयान देते हैं। कई बार उनके बयानों को लेकर हंगामा भी हो चुका है। अनिरुद्धाचार्य जी महाराज अक्सर ही अपने कथावाचन के दौरान कहते हैं कि श्रीराम के चरित्र से सबको सीखना चाहिए।
जया किशोरी
जया किशोरी देश की सबसे मशहूर महिला कथावाचक हैं। उनके सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा फॉलोवर हैं। वे देश और दुनियाभर में सबसे ज्यादा सुनी जाती हैं। जया किशोरी रामकथा और श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक जया किशोरी कथावाचन के तकरीबन 10 लाख तक चार्ज करती हैं।
जया किशोरी कथा से कमाए धन के एक बड़े भाग को नारायण सेवा संस्थान को दान दे देती हैं। नारायण सेवा संस्थान दिव्यांग लोगों की सेवा और देखभाल करता है। यहां दिव्यांगों को आर्थिक सहायता, जॉब, फूड और इलाज में मदद की जाती है। जया किशोरी की आधिकारिक वेबसाइट 'आई एम जया किशोरी डॉट कॉम' के मुताबिक जया किशोरी पेड़ लगाने में और बेटियों को पढ़ाने में भी काफी खर्च करती हैं।
कवि कुमार विश्वास
राम कथा वाचकों की सूची में मशहूर हिंदी कवि कुमार विश्वास का भी नाम जुड़ गया है। कुमार विश्वास के कार्यक्रम 'अपने-अपने राम' देशभर में लोकप्रिय हुआ है। कुमार विश्वास संस्कृति और परंपराओं को विज्ञान से जोड़कर बहुत ही सरल भाषा में राम की कथा सुनाते हैं। कुमार विश्वास की रामकथा सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है। उनके कार्यक्रम में अक्सर बड़े नेता, नौकरशाह और उद्योगपति दिखाई देते हैं। कुमार विश्वास अपनी कथा के माध्यम से राजनीति पर भी खूब कटाक्ष करते हैं।












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