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Cipla: दवा कंपनी सिप्ला का विदेशी कंपनी करेगी अधिग्रहण, जानें क्या है कारण?

Cipla: लगभग 88 साल पहले शुरू हुई भारत की सबसे पुरानी फार्मा सेक्टर की विश्वविख्यात कंपनी सिप्ला बिकने की कगार पर है। सिप्ला का भारत को ड्रग मैन्युफैक्चरिंग हब अर्थात दवाओं की फैक्ट्री बनाने में बहुत बड़ा योगदान है। यह देश की तीसरी सबसे बड़ी दवा कंपनी है तथा भारत के अलावा एशियाई और अफ्रीकी देशों में दवा सेक्टर में एक बड़ा नाम है। एक जमाना था जब महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू जैसे नेता भी सिप्ला दवा कंपनी के कायल हुआ करते थे।

सिप्ला की शुरुआत

ब्रिटिश भारत में जर्मनी की दवाओं का बोलबाला हुआ करता था। तब देश में बड़े स्तर पर जर्मनी से दवाएं आयात की जाती थी। इसके मद्देनजर ही 1935 में केमिस्ट व उद्यमी ख्वाजा अब्दुल हमीद ने मुंबई में सिप्ला (द केमिकल, इंडस्ट्रियल एंड फार्मास्युटिकल लेबोरेटरीज) नाम से एक छोटी सी लैब की स्थापना की। ख्वाजा अब्दुल हमीद का सिप्ला की स्थापना के पीछे भारत में दवा कारोबार विकसित करना था, जिससे भारत भी दवा क्षेत्र में आगे बढ़े।

Foreign company will acquire pharmaceutical company Cipla, know what is the reason?

1937 से सिप्ला के जरिये दवाओं का उत्पादन शुरू हुआ। शुरुआत में कंपनी को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत में दवाओं का आयात कम होने लगा, जिसके चलते दवा बाजार में सिप्ला पर भरोसा बढ़ने लगा। 1972 में सिप्ला का कामकाज ख्वाजा अब्दुल हमीद के बाद उनके बेटे युसूफ ख्वाजा हमीद ने संभाला और 20 जुलाई 1984 को इसका नाम बदलकर सिप्ला लिमिटेड कर दिया।

सिप्ला ने बांटी एड्स की दवा फ्री

अमरीकी एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएस एफडीए) ने 1985 में सिप्ला कंपनी को थोक दवा निर्माण सुविधाओं की अनुमति प्रदान की। इसके बाद सिप्ला की प्रगति का सफर प्रारंभ हुआ। 1999 में सिप्ला ने जेनेरिक दवाओं (कम कीमत व फॉर्मूला सार्वजनिक करने वाली दवा) की शुरूआत की।

2000 के आसपास तक एड्स का प्रकोप अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीकी देशों में फैला हुआ था। अमेरिका व यूरोप ने इस जानलेवा बीमारी की दवा बना ली थी, जो बहुत मंहगी थी। जिसके चलते अफ्रीकी देश इस दवा को खरीद नहीं पा रहे थे। उस समय सिप्ला ने एड्स की न सिर्फ कम कीमत वाली दवा बनायी बल्कि उस दवा बनाने की तकनीक को गरीब देशों के साथ शेयर भी किया। इसके अलावा गरीब देशों में एड्स संक्रमित मां से बच्चे में होने वाले एड्स के उपचार हेतु फ्री दवा भी दी। इस सामाजिक कार्य के कारण ही सिप्ला को रॉबिनहुड कहा गया।

कोविड़ महामारी में सिप्ला की भूमिका

कोविड महामारी ने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया था। उसी समय सिप्ला ने भारत सरकार को कोविड महामारी से लड़ने के लिए ₹25 करोड़ की धनराशि दी और सिप्ला फाउंडेशन ने दवा, सेनिटाइजर, मास्क, दस्ताने व भोजन इत्यादि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में विशेष योगदान दिया। महाराष्ट्र में अनेक अस्पताल (बाल चिकित्सा आइसोलेशन वार्ड) सिप्ला के समर्थन से कोविड केयर सेंटर बने थे।

सिप्ला की वर्तमान स्थिति

सिप्ला को जेनेरिक दवा का जनक माना जाता है। सिप्ला अनेक बीमारियों की एंटी जेनेरिक दवाईयां जैसे- एलर्जी रोधी, दमारोधी, एंटीबायोटिक, मधुमेह रोधी, डायरिया रोधी इत्यादि लगभग 522 प्रकार की दवाओं का उत्पादन करती है। इसके अलावा ओमनीजेल, नेसेलिन, सिपटेस्ट कोविड-19 इत्यादि अनेकों प्रमुख दवाओं का निर्माण भी सिप्ला द्वारा ही होता है।

वर्तमान में कंपनी का मार्केट कैप (कैपिटलाइजेशन) $1.01 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर है। दुनियाभर में सिप्ला के 47 जगहों पर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। लगभग 86 देशों में सिप्ला की दवा सप्लाई होती है तथा अमेरिका में सबसे ज्यादा जेनेरिक दवा सप्लाई करने वाली कंपनियों में से एक है। दुनियाभर में कंपनी के लगभग 26000 कर्मचारी कार्यरत हैं।

अगर कंपनी की कमाई के बारे में बात करें तो वित्तीय वर्ष 2016-17 में सिप्ला की कमाई ₹14,630 करोड़ थी, जो लगभग 55.52 प्रतिशत बढ़कर वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹22,753 करोड़ पहुंच गई।

क्यों बिक रही है सिप्ला

खबरों के अनुसार सिप्ला के प्रवर्तक (स्थापक संबंधी) अपनी पूरी हिस्सेदारी विदेशी कंपनी ब्लैकस्टोन को बेचने जा रहे हैं। फिलहाल सिप्ला कंपनी की कार्यकारी उपाध्यक्ष समीना हामिद है जो डॉ. यूसुफ हमीद की भतीजी है और वर्ष 2015 में सिप्ला बोर्ड में शामिल हुई थी। तब से ही वह पूरे कारोबार को संभाल रही है। इस परिवार के पास सिप्ला की 33.47 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे पारिवारिक कारणों के चलते हमीद परिवार बेचना चाह रहा है।

बाजार की खबरों की मानें तो सिप्ला के बिकने की सबसे बड़ी वजह उत्तराधिकारी की कमी बताई जा रही है। क्योंकि डॉ. यूसुफ हमीद (गैर-कार्यकारी अध्यक्ष) की उम्र 80 वर्ष हो गई है और वह अब इसको संभालने में असमर्थ है। जबकि समीना हामिद भी अपने काम को ठीक से संभाल नही पा रही है। जिसके चलते भारत की नामी दवा कंपनी सिप्ला बिकने की स्थिति में है।

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