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First Phase Voting: क्या पहले चरण के मतदान में दिख जाएगी आगे की झलक?

First Phase Voting: 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए सात चरणों में मतदान होगा। 19 अप्रैल को पहले चरण के वोट पड़ेंगे। इस दिन 21 राज्यों की 102 लोकसभा सीटों के लिए मतदान किया जाएगा। तमाम पार्टियां इस पहले चरण का इंतजार कर रहीं हैं। शायद उसके बाद सभी दल अपनी रणनीतियों में सुधार या परिवर्तन करें। क्योंकि दूसरे चरण से पहले सभी को एक अवसर मिल सकता है।

पहले चरण की प्रक्रिया के लिए बिहार को अतिरिक्त समय

पहले चरण के चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 20 मार्च 2024 को जारी हुआ था। उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तारीख 27 मार्च थी। लेकिन बिहार में पहले चरण का नामांकन 28 मार्च तक किया गया था। नामांकन पत्रों की जांच 28 मार्च को होनी थी, लेकिन बिहार में यह 30 मार्च को हुई। बाकी जगह नामांकन वापसी 30 मार्च तक किए गए, वहीं, बिहार में पहले चरण के नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 02 अप्रैल थी। बिहार को यह अतिरिक्त सुविधा वहाँ के त्योहारों को देख कर दी गयी थी।

First Phase Voting

102 सीटों पर 19 अप्रैल को होगा मतदान

पहले चरण के दौरान 102 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। इनमें अरुणाचल प्रदेश की दो, असम की पांच, बिहार की चार, छत्तीसगढ़ की एक, मध्य प्रदेश की छह, महाराष्ट्र की पांच, मणिपुर और मेघालय की दो, मिजोरम, त्रिपुरा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, पुदुचेरी, सिक्किम और नागालैंड की एक-एक, राजस्थान की 12, तमिलनाडु की 39, उत्तर प्रदेश की आठ, उत्तराखंड की पांच और पश्चिम बंगाल की तीन लोकसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। यानी पहले चरण में भी देश के लगभग सभी क्षेत्रों में मतदान होगा। इससे पूरे देश का प्रारम्भिक मिजाज समझ में आ जाएगा। मुद्दों पर भी राजनीतिक दलों को स्पष्टता मिल जाएगी। पहला चरण ही मिनी भारत का चुनावी चरण होगा।

पहले चरण के उम्मीदवारों की औसतन संपत्ति 4.51 करोड़

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण में चुनाव मैदान में उतरे कुल 1625 उम्मीदवारों में से 1618 के हलफनामे की एनालिसिस रिपोर्ट जारी की है। इसमें खासकर संपत्ति और आपराधिक मामले पर ज्यादा फोकस है। रिपोर्ट में उम्मीदवारों की औसतन दौलत 4.51 करोड़ रुपए बताई गई है। सबसे अमीर उम्मीदवार ने अपनी संपत्ति 716 करोड़ घोषित की है तो 10 उम्मीदवारों ने यह भी कहा है कि उनकी कोई संपत्ति नहीं है। वहीं सबसे गरीब उम्मीदवार के पास महज 300 से 500 रुपए की संपत्ति है।

16 फीसदी से ज्यादा उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज

चुनाव मैदान में दागी उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या को भी इस रिपोर्ट में देखा जा सकता है। कुछ के अपराधों की प्रकृति किसी भी जागरूक मतदाता के मन में चुनाव के प्रति निराशा भर सकती है। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की ओर से सुधार की तमाम कोशिशों के बावजूद पहले चरण के 16 फीसदी से ज्यादा उम्मीदवार आपराधिक घटनाओं के आरोपी हैं। इनमें टॉप थ्री कैंडिडेट पश्चिमी यूपी से आते हैं। ये उम्मीदवार नगीना, सहारनपुर और रामपुर लोकसभा से किस्मत आजमा रहे हैं।

42 फीसदी 'रेड अलर्ट' निर्वाचन क्षेत्र

एडीआर के साथ नेशनल इलेक्शन वॉच के विश्लेषण से पता चलता है कि लोकसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान होने वाली 102 सीटों में से 42 फीसदी सीटें 'रेड अलर्ट' निर्वाचन क्षेत्र है। रेड अलर्ट निर्वाचन क्षेत्र का मतलब उन लोकसभा क्षेत्रों से है, जहां चुनाव लड़ने वाले तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में खुद पर दर्ज आपराधिक मामलों की घोषणा की है। सात उम्मीदवारों के शपथपत्र ही स्पष्ट नहीं थे।

क्या है प्रत्याशियों की शिक्षा, आयु वर्ग

पहले चरण के तमाम उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता में 639 (39 प्रतिशत) उम्मीदवार 5वीं और 12वीं के बीच, 836 (52 प्रतिशत) की योग्यता स्नातक और इससे ज्यादा और 77 उम्मीदवार डिप्लोमा होल्डर हैं। 36 उम्मीदवार साक्षर जबकि 26 उम्मीदवार अनपढ़ भी हैं। चार उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता घोषित ही नहीं की है।

आयु के आंकड़े देखें तो 505 (31 प्रतिशत) उम्मीदवार 25 से 40 वर्ष, 849 (52 प्रतिशत) प्रत्याशी 41 से 60 वर्ष और 260 (16 प्रतिशत) उम्मीदवारों की आयु 61 से 80 वर्ष है। हैरत की बात यहहै कि चार उम्मीदवारों की आयु 80 वर्ष से भी ज्यादा है। चुनाव आयोग ने कहा था कि देश में महिला वोटरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। उनकी संख्या पुरुष से ज्यादा है। उससे उलट पहले चरण के चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व को देखें तो कुल 136 यानी महज 8 फीसदी महिला उम्मीदवार हैं।

चुनाव की दिशा तय करने में अहम पहले चरण का मतदान

लोकसभा चुनाव 2024 में दिल्ली फतह करने के लिए पक्ष-विपक्ष को पहले चरण के मतदान का चक्रव्यूह भेदना होगा। यह आगे के चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाला है। भाजपा नीत एनडीए और विपक्षी दलों के इंडी गठबंधन दोनों के लिए यह टफ टास्क है। भाजपा को अपने 370 सीटों का लक्ष्य पार करने के लिए पहले चरण में लोकसभा चुनाव 2019 के प्रदर्शन को सुधारना होगा। वहीं, कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडी अलायंस को दबाव बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ना होगा।

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