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डीआरडीओ में युवाओं के लिए पांच लैब वाले मोदी के सपने में हैं मुश्किलें

बेंगलूरु। अगस्‍त माह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी डीआरडीओ के एक समारोह में मौजूद थे। इस दौरान मोदी ने वरिष्‍ठ अधिकारियों से ऐसी पांच प्रयोगशालाओं को तैयार करने की अपनी इच्‍छा के बारे में बताया था, जहां पर 35 वर्ष से कम के वैज्ञानिकों को तरजीह दी जाए।

DRDO

सोशल मीडिया पर मोदी का यह संदेश खूब लोकप्रिय हुआ और डीआरडीओ भी कोशिश कर रहा है कि वह पीएम के इस सपने को जल्‍द से जल्‍द पूरा कर डाले। लेकिन इस सपने को पूरा करना आसान नहीं है और इसमें थोड़ी मुश्किलें भी हैं।

पीएम की अपील को मिली खूब तालियां

वनइंडिया के साथ एक इंटरव्‍यू में डीआरडीओ में डायरेक्‍टर जनरल (एयरो) डॉक्‍टर के तामिलमनी ने बताया कि प्रधानमंत्री की इच्‍छा थी कि कुछ प्रयोगशालाओं का जिम्‍मा सिर्फ युवाओं को ही सौंप दिया जाए और अब उनकी इस इच्‍छा को यहां पर वरीयता दी जा रही है।

डॉक्‍टर तामिलमनी ने इस विषय पर बताया, 'प्रधानमंत्री की युवा कौशल को आगे बढ़ाने की अपील को डीआरडीओ में मौजूद युवा वैज्ञानिकों ने काफी सराहा। हम पहले भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाते आए हैं लेकिन अब हमारा सारा ध्‍यान बस इसी पर है।'

मिलती रही है युवा वैज्ञानिकों को तवज्‍जो

डॉक्‍टर तामिलनी के मुताबिक इस पूरी योजना को कई बातों को दिमाग में रखकर आगे बढ़ाना होगा, जैसे किसी भी योजना का क्रियान्‍वन, उसका आर्थिक प्रबंधन, प्रशासनिक क्षमता और सबसे ज्‍यादा जरूरी नेतृत्‍व कौशल।

उन्‍होंने बताया कि आईआईटी ग्रेजुएट करीब 22 करोड़ रुपए के एक प्रोजेक्‍ट का नेतृत्‍व कर रहे हैं। डॉक्‍टर तामि‍लमनी के मुताबिक भविष्‍य की परियोजनाएं और तकनीक 'डी' और 'ई' लेवल के वैज्ञानिकों को दी जाती हैं। अभी तक डीआरडीओ में युवा कौशल को आगे बढ़ाने की परंपरा रही है।

उन्‍होंने उदाहरण देते हुए बताया कि युवा आईआईटी ग्रेजुएट को फास्‍ट ट्रैक टेक्‍नोलॉजी डेवलपमेंट प्रोजेक्‍ट दिया गया है। यह वैज्ञानिक आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्‍टैब्लिशमेंट की परियोजना पर काम कर रहा है।

डॉक्‍टर तामिलमनी ने बताया कि 'रोटैरी यूएवी ' का प्रोजेक्‍ट डीआरडीओ युवा वैज्ञानिकों की एक टीम को सौंपने की प्रक्रिया में है। बेंगलूरू स्थित एरोनॉटिकल डेवलमेंट इस्‍टैब्लिशमेंट की युवा टीम को यह प्रोजेक्‍ट सौंपा जा सकता है।

और जोश से होगा इस पर काम

डीआरडीओ प्रवक्‍ता राजीव गुप्‍ता ने वनइंडिया को बताया कि युवा वैज्ञानिकों ने कभी भी किसी अहम प्रोजेक्‍ट से मुंह नहीं मोड़ा है। बहुत से युवा तो ऐसे हैं जो कई अहम प्रोजेक्‍ट्स का नेतृत्‍व कर रहे हैं।

हैदराबाद में भी डीआरडीओ ने दो युवा वैज्ञानिक डॉक्‍टर सतीश रेड्डी और डॉक्‍टर टेसी थॉमस दो काफी अहम प्रयोगशालाओं रिसर्च सेंटर इमारत (आसीआई) और एडवांस्‍ड सिस्‍टम लैबोरट्री (एएसएल ) का नेतृत्‍व कर रहे हैं।

अब पीएम मोदी के नए निर्देशों के बाद युवाओं को प्रमोट करने के इस आइडिया को और नए जोश के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

बाबूगिरी से दिलाएं डीआरडीओ को छुटकारा

एविएशन से जुड़े विषयों पर अपनी नजर रखने वाले पुष्‍पेंद्र सिंह की मानें तो डीआरडीओ को रक्षा क्षेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट का मास्‍टर बनना है तो फिर उसे कुछ बदलाव करने ही पड़ेंगे।

सिंह की मानें तो डीआडीओ के अंदर एक तरह की वर्चुअल रेवॉल्‍यूशन की सख्‍त जरूरत है। लेकिन यह भी हकीकत है कि सिस्‍टम युवा वैज्ञानिकों को आगे नहीं बढ़ने देगा।

पीएम मोदी का आइडिया वाकई में काफी महान है लेकिन इसे पूरा कर पाने में काफी मुश्किलें आने वाली हैं। मोदी अगर चाहते हैं कि उनका यह सपना साकार हो तो फिर उन्‍हें बाबूगिरी को दूर करना होगा।

सिंह ने डीआरडीओ के निजीकरण की वकालत की है और उनका मानना है कि अगर वह ऐसा कर पाने में सफल होते हैं तो फिर उन्‍हें वाकई जादुई और हैरान करने वाले नतीजे मिलेंगे।

नई लैब्‍स सिर्फ एकमात्र विकल्‍प

एक वरिष्‍ठ डीआरडीओ अधिकारी ने नाम ने बताने की शर्त पर कहा कि प्रधानमंत्री के इस आइडिया को सिर्फ तभी पूरा किया जा सकता है जब पांच छोटी प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जाए। इस अधिकारी के मुताबिक पीएम का आइडिया पहली नजर में बहुत ही एक्‍सीलेंट नजर आता है लेकिन इसमें कई सारी व्‍यावहारिक परेशानियां हैं।

यह बहुत आसान काम नहीं है जिसमें किसी डी या फिर ई लेवल के वैज्ञानिक को लैब का चार्ज सौंप दिया जाए। अगर ऐसा हुआ तो फिर सिस्‍टम में कई तरह की अशांति पैदा होगी।

ऐसे में हमें पहले उन पांच अलग-अलग परियोजनाओं को पहचानना होगा और फिर उन परियोजनाओं के लिए अलग लैब बनानी होंगी। इन सभी लैब को आगे आने वाली परेशानियों या बाधाओं से निबटने के लिए डायरेक्‍टर जनरल को रिपोर्ट करना पड़ेगा।

इस अधिकारी के मुताबिक डीआरडीओ के भीतर कई तरह के स्‍तर बन गए हैं और वह भी रामा राव कमेटी की ओर से दी गई सिफारिशों को लागू किए बिना। ऐसे में नुकसान की भरपाई करना काफी जरूरी है।

क्‍या कहा था पीएम मोदी ने अगस्‍त में

  • रिस्‍क सहने को रहें तैयार युवा वैज्ञानिकों को सौंपे जिम्‍मा।
  • डीआरडीओ में पांच लैबोरेट्रीज का पहचान हो।
  • यहां पर सिर्फ 35 वर्ष से कम उम्र के वैज्ञानिकों को वरीयता दी जाए।
  • सभी अहम फैसले सिर्फ इन्‍हीं वैज्ञानिकों को लेने दिए जाएं।
  • हमारे पास पूरी क्षमता मौजूद है ऐसे में इस पर काम हो।
  • डीआरडीओ को उन बातों पर काम करना होगा जिनसे जवानों की आम जिंदगी आरामदायक बन सके।
  • यूनिवर्सिटीज में डीआरडीओ के वैज्ञानिक युवाओं को प्रभावित करें।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पीएमओ की ओर से चार वैज्ञानिकों के कार्यकाल को बढ़ाने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया है। वरिष्‍ठ वैज्ञानिकों का मानना है कि पीएमओ के इस निर्णय से वैज्ञानिकों के मनोबल पर असर पड़ेगा।

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