Reservation Policy: अमेरिका की तरह कई देशों में है अलग-अलग तरह का आरक्षण

Reservation Policy: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 29 जून 2023 को देश के शिक्षण संस्थानों में अफरमेटिव एक्शन (Affirmative Action) पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिला देते वक्त नस्ल और जातीयता को ध्यान में नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि ऐसा करना असंवैधानिक है।

अफरमेटिव एक्शन अमेरिका में एक तरह की आरक्षण नीति है। जिसका मकसद कुछ विशेष तबकों के खिलाफ भेदभाव और पूर्वाग्रहों को दूर करना है। अगर शिक्षा के क्षेत्र में देखा जाये तो अफरमेटिव एक्शन, विश्वविद्यालयों में एडमिशन देने से संबंधित होता है। जिससे अश्वेत और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का दाखिला बढ़ाया जा सके।

different types of reservation in many countries Like America

हालांकि, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद वहां के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति समेत कई लोग इससे असहमति जता चुके हैं। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस फैसले पर कहा कि अमेरिका में भेदभाव अभी भी मौजूद है। मेरा मानना है कि हमारे कॉलेज तब मजबूत होते हैं, जब वे नस्लीय रूप से विविध होते हैं। हम इस फैसले को अंतिम फैसला नहीं मान सकते।

हालांकि, अमेरिका दुनिया का पहला ऐसा देश नहीं है। जहां देश के कमजोर वर्गों को चाहे शैक्षणिक रूप से कमजोर हों, अथवा आर्थिक या सामाजिक रूप से, उन्हें आरक्षण देने की व्यवस्था की गयी है। दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां छोटे या बड़े स्तर कुछ न कुछ आरक्षण दिया जाता है। आज हम आपको दुनिया के कई देशों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां अलग-अलग नामों से अलग-अलग तरह की आरक्षण की व्यवस्थायें मौजूद हैं।

भारत में आरक्षण नीति

भारत में आरक्षण जाति आधारित दिया गया है। संविधान का अनुच्छेद 16 (4) नागरिकों के पिछड़े वर्गों के हित में आरक्षण की अनुमति देता है। इसके तहत राज्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का विशेष ध्‍यान रखेगा और उन्‍हें सामाजिक अन्‍याय और सभी प्रकार के शोषण से संरक्षित रखेगा। इसके तहत आरक्षण का उद्देश्य केंद्र और राज्य में सरकारी नौकरियों, कल्याणकारी योजनाओं, चुनाव और शिक्षा के क्षेत्र में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए की गयी है। ताकि समाज के हर वर्ग को आगे आने का मौका मिले। इसके तहत पिछड़े वर्गों को तीन कैटेगरी अनुसूचित जाति (एससी) को 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 7.5 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत में बांटा गया। जबकि बाकी 50.5 प्रतिशत आरक्षण जनरल कैटेगरी के लिए रखा गया, जो कि एससी/एसटी/ओबीसी के लिए भी खुला है।

नेपाल में आरक्षण नीति

नेपाल में आरक्षण नीति 2007 में अपनायी गयी थी। इसके तहत आरक्षण और कोटा व्यवस्था के जरिये वंचित, क्षेत्रीय और जातीय समुदायों के सशक्तीकरण की व्यवस्था की गयी है। मूल निवासियों, दलितों, अछूतों और महिलाओं के लिए स्थानीय प्रशासन, प्रांतीय और संघीय सरकार से लेकर हर स्तर पर आरक्षण का प्रावधान किया गया है। उदाहरण से समझते हैं, जैसे नेपाल के स्कूल, कॉलेजों में उपनियम (1) के खंड (A) के अनुसार 25 प्रतिशत आरक्षित सीटें आर्थिक और सामाजिक वंचितों के लिए आवंटित हैं। इनमें मधेसियों को 20 प्रतिशत, मुस्लिम समुदाय को 2 प्रतिशत, गायब हुए व्यक्ति या शहीद के परिवार को 3 प्रतिशत का आरक्षण शामिल है।

पाकिस्तान में कोटा प्रणाली

भारत और नेपाल की तरह पाकिस्तान में आरक्षण नहीं बल्कि कोटा प्रणाली है। जो प्रांत और समुदायों के हिसाब से तय होती है। इसके तहत पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को आबादी के आधार पर सरकारी सुविधाएं और आरक्षण मिलता है। साथ ही संसद की सीटों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण शामिल है। संविधान का अनुच्छेद 51(2A) नेशनल असेंबली में गैर-मुसलमानों के लिए 10 आरक्षित सीटें, अनुच्छेद 106 के तहत चार प्रांतीय विधानसभाओं में गैर-मुसलमानों के लिए 23 आरक्षित सीटें और पाकिस्तान की सीनेट में गैर-मुसलमानों के लिए चार सीटें आरक्षित है।

पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी एक गजट के मुताबिक पाकिस्तान में सिविल सेवा में 92.5 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं और केवल 7.5% का चयन योग्यता के आधार पर किया जाता है। इसते तहत पंजाब, सिंध (कराची सहित), उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत, बलूचिस्तान व आजाद कश्मीर में कोटा दिया गया है। जबकि महिलाओं को अपने संबंधित क्षेत्रों के लिए मिले कोटा में से 10 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गयी है।

ब्राजील में वेस्टीबुलर नीति

ब्राजील में आरक्षण को वेस्टीबुलर के नाम से जाना जाता है। इस कानून के तहत ब्राजील के संघीय विश्वविद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटें उन छात्रों के लिए आरक्षित कर दी गयी हैं, जो अफ्रीकी या मूल निवासी गरीब परिवारों से आते हैं। हर राज्य में अश्वेत, मिश्रित नस्लीय और मूल निवासी छात्रों के लिए आरक्षित होने वाली सीटें उस राज्य की नस्लीय जनसंख्या के आधार पर होती हैं।

दक्षिण अफ्रीका में आरक्षण नीति

दक्षिण अफ्रीका में श्वेत-अश्वेत लोगों को समान रोजगार का आरक्षण दिया गया है। जबकि अफ्रीका की क्रिकेट टीम में आरक्षण लागू किया गया है। इसके तहत राष्ट्रीय टीम में श्वेत खिलाड़ियों की संख्या पांच से अधिक नहीं होनी चाहिए।

मलेशिया में आरक्षण की नीति

मलेशिया में आरक्षण नीति के तहत वहां के पारंपरिक मूल लोगों को शिक्षा, नौकरी और व्यापार में समान रूप से उठाने के लिए उन्हें राष्ट्रीय नीतियों के तहत सस्ते घर और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिलती है। क्योंकि वहां 60 प्रतिशत लोग पारंपरिक मूल निवासी है। जबकि 23 प्रतिशत चीनी मूल और 7 प्रतिशत भारतीय मूल के हैं। बाकी लोग अन्य नस्लों के हैं।

कनाडा की आरक्षण नीति

कनाडा में आरक्षण नीति का मामला रोजगार से है। इसके तहत यहां सभी तरह के लोगों को समान रोजगार का प्रावधान है। चाहे वह देशी हो या विदेशी, जिसके तहत फायदा वहां के सामान्य तथा अल्पसंख्यकों को भी मिलता है। वहीं भारत से गये सिख इसके बड़े उदाहरण है।

इन देशों में है अफर्मेटिव एक्शन लागू

स्वीडन में अमेरिका की तरह ही जनरल अफर्मेटिव एक्शन के तहत अश्वेत लोगों को आरक्षण मिलता है। इसी तरह दक्षिण कोरिया में चीनी और उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए अफर्मेटिव एक्शन की नीति है। जबकि न्यूजीलैंड में माओरी और पॉलिनेशियन (आदिवासी जनजाति या मूलनिवासी) समुदायों के लिए अफर्मेटिव एक्शन लागू है।

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