क्या लाठी-चार्ज में पूरा दोष दिल्ली पुलिस का ही है.. जानिए पूरा सच?

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने छात्रों की बर्बरता से पिटाई की। छात्राओं को भी जमकर पीटा गया। जी हां हम इस सच के साथ कयासों की उड़नतश्तरी के सहारे कुछ नया तलाशने लगते हैं।

क्यों नहीं सोच रहे हैं लोग?

खबर का दूसरा पहलू तो पूरी तरह से कहीं लुप्त ही हो गया। आपके जहन में सवाल नहीं उठ रहे क्या कि आखिर क्यों दिल्ली पुलिस इंसानियत का चोंगा उतारने पर मजबूर हुई, क्यों उसे बर्बरता दिखानी पड़ी? हालांकि विकल्प के तौर पर जिस पिटाई को चुना गया उसका विरोध करना कोई गलत नहीं।

VIDEO: मोदी को अपशब्द कह प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस को उकसाया था

पर किसी की हिमायत और किसी की शिकायत इनके लिए भी तरीके होने चाहिए। मर्यादा को भंगार यानि की कबाड़ के ठेले पर रखकर अपने देश के पीएम को ही गाली देना, भला ये किस संस्कार के अंतर्गत आता है? उंगलियां उठने लगती हैं माता-पिता पर। जो देश के प्रधान को गाली गलौज करें। शांति भंग करने की कोशिश करें।

इन सबके इतर मैं ये भी कहना चाहूंगा कि मैं यहां किसी की वकालत या किसी की खिलाफत को मद्देनजर रखते हुए शब्द पर शब्द नहीं सेट कर रहा। बस हकीकत और फिर गलत सही को तराश कर देखने की कोशिश जरूर कर रहा हूं.. जनता की इस पीड़ा को आप नीचे की स्लाइडरों के तहत समझ सकते हैं...

छात्रों ने ही पुलिस को हिंसात्मक कार्यवाही करने के लिए उकसाया

हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला को खुदकुशी करने के लिए मजबूर करने वालों को सजा दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली में आइसा ने आरएसएस दफ्तर पर प्रदर्शन किया । इस दौरान छात्रों की पुलिस से झड़प हो गई। इसके बाद पुलिस ने छात्रों और छात्राओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जमकर दिल्ली पुलिस की फजीहत हुई. कोई निंदा करने लगा तो किसी ने उन छात्राओं को महिला आयोग का दरवाजा खटखटाने को कहा जिनकी बर्बरता से पिटाई हुई है. हाल ही में एबीवीपी ने भी एक वीडियो साझा किया है. एबीवीपी के मुताबिक छात्रों ने ही पुलिस को हिंसात्मक कार्यवाही करने के लिए उकसाया है।

तो आपने देखा ये वीडियो

तो आपने देखा ये वीडियो

अब शायद आप दिल्ली पुलिस समेत मर्यादा को लांघने वाले इन छात्र छात्राओं को भी दोषी मानने लगे हों, आंदोलन की शक्ल में मर्यादा का एक बेहद दोयम किस्म का प्रोडक्ट काउंटर में सजाकर बेचा जा रहा था। जिसके बाद दिल्ली पुलिस भी अपनी सूझबूझ खो बैठी। जनता का मानना है कि गलती दोनों ओर से हुई है. तो सजा भी दोनों को ही मिलनी चाहिए।

जनता ने कहा (श्वेता दुबे)

जनता ने कहा (श्वेता दुबे)

जो प्रधानमंत्री दूसरे देशों के सामने अपने देश को तर- सलीके से रिप्रजेंट कर रहा है...भले ही मोदी नाम की गरिमा का ख्याल न रखते लेकिन उनके पास जो पद है उसका तो ख्याल रखना ही चाहिए था। छात्र छात्राओं द्वारा किया गया इस तरह का प्रदर्शन बेहद निंदनीय है, साथ ही पुलिस वालों की बर्बरता भी शर्मिंदा करने वाली है।

पद, कद और हद बढ़ाने की लालसा

पद, कद और हद बढ़ाने की लालसा

आज जितने भी आंदोलन हो रहे हैं उनकी भीड़ या तो पेड होती है या फिर नेतागिरी के रोग से ग्रसित। जिन्हें पद, कद और हद बढ़ाने की लालसा होती है। मोमबत्तियां पिघल जाती हैं. आंदोलन धुएं के तौर पर उड़ जाता है. लेकिन निष्कर्ष कुछ नहीं निकलता।

जनता ने कहा (विजय सिंह)

जनता ने कहा (विजय सिंह)

भीड़ से एक चेहरा जो मीडिया पर काफी चमकता है, जो पुलिस की लाठियों के घावों को ज्यादा बेहतर तरीके से दिखा सका, उसे जनता की हमदर्दी मिल जाती है. मतलब कि नेतागिरी का टिकट. न जाने क्यों लोगों की हमदर्दी की फेहरिस्त में महज रोहित शामिल हो पाया क्यों उसे जातिवादी सर्टिफिकेट के साथ चमका कर तख्तियों पर तान दिया गया। रोज न जाने कितने बलात्कार होते हैं, लूट होती है उनके लिए न्याय मांगने वालों में इतनी भीड़ क्यों नहीं जमती।

जनता ने कहा (दिव्यांशु तिवारी)

जनता ने कहा (दिव्यांशु तिवारी)

छात्रों की पिटाई हुई और तुरंत इसे खबर बना दिया गया। न पहला पक्ष जानने की किसी ने हिमाकत की और न ही दूसरा पहलू जानने की कोशिश। ताली भी एक हाथ से नहीं बजती फिर तो ये पूरा का पूरा मुद्दा, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर छात्र दोषी पाए जाते हैं तब उनके साथ साथ दिल्ली पुलिस की इस बर्बरता के लिए कार्यवाही होनी चाहिए।

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