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Atal Bihari Vajpayee: नरसिम्हा राव ने अटलजी को थमाई थी एक पर्ची, फिर वाजपेयी ने करवाए धमाके

Atal Bihari Vajpayee: एक लोकप्रिय नेता जो जब भाषण देते थे तो संसद में विपक्षी नेता भी उनको बड़े चाव से सुनते थे। वह नेता जो कविताएं लिखते थे और अपने सेंस ऑफ ह्यूमर के लिए भी जाने जाते थे। वह नेता जिनकी पंडित नेहरु भी तारीफ करते थे। आज उस नेता अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि है। अटल बिहारी आरएसएस के सदस्य थे। इसके साथ ही वह गैर कांग्रेस पार्टियों के पहले नेता थे जिन्होंने बतौर प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा किया था। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम आपको उनसे जुड़े कुछ किस्सों के बारे में बताएंगे।

शुरुआत में पैदल ही जाते थे संसद भवन

अटल बिहारी के बारे में सभी बखूबी जानते हैं। पर शायद आपको मालूम न हो कि वह बतौर सांसद पैदल ही संसद तक जाते थे। यह किस्सा लालकृष्ण आडवाणी ने एक इंटरव्यू में बताया था। तब अटल बिहारी पहली बार सांसद चुने गए थे। यह बात 1957 की है। भाजपा नेता जगदीश प्रसाद माथुर और अटल बिहारी दोनों एक साथ राजधानी के चांदनी चौक में रहते थे। और वहां से पैदल संसद भवन तक जाया करते थे। ऐसा लगभग छह महीनों तक चलता रहा। एक दिन अचानक अटल बिहारी ने माथुर से कहा कि आज रिक्शा पर चलते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अटल बिहारी को बतौर सांसद छह महीने की सैलरी एक साथ मिली थी।

dead day of atal bihari vajpayee over nuclear capability after Narasimha Rao slip

अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के तमाम किस्से हैं। जिनमें एक किस्सा यह था कि अडवाणी ने बिना अटल बिहारी को बताए उनका नाम पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के लिए ऐलान कर दिया था। अडवाणी ने एक इंटरव्यू में इस किस्से का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि 1995 में मुंबई में हुई पार्टी की सभा में मैंने यह घोषणा कर दी कि मुझे भरोसा है कि अगले साल होने वाले चुनाव में हमारी पार्टी जीतेगी। तब हमारे प्रधानमंत्री आदरणीय अटल जी ही होंगे। तब अटल बिहारी ने उनकी तरफ देखा तो अडवाणी ने उनसे कहा था कि बतौर पार्टी अध्यक्ष मेरा इतना तो अधिकार है कि मैं अपनी पार्टी में किसे प्रधानमंत्री के तौर पर चुन सकता हूं और किसे नहीं।

एक पर्ची और परमाणु परीक्षण

अटल बिहारी के कार्यकाल में परमाणु परीक्षण हुआ था यह तो हम सब जानते हैं। इस परमाणु परीक्षण के लिए अटल बिहारी को एक पर्ची मिली थी। और उस पर्ची का कमाल था कि भारत ने दूसरी बार अपनी परमाणु क्षमता से दुनिया को अवगत करवाया था। यह किस्सा यूं हुआ था कि जब नरसिम्हा राव की सरकार चुनाव हार गई और अटल बिहारी सत्ता में आए तो राव ने अटल बिहारी को एक पर्ची दी थी। उस पर्ची में लिखा था कलाम से मिलिए।

इसके बाद उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम को बुलवाया। अटल बिहारी ने कलाम को पर्ची के बारे में बताया। इस पर उन्होंने अटल बिहारी से कहा कि यह संदेश परमाणु परीक्षण से जुड़ा हुआ है। जिसे राव ने अपने कार्यकाल के दौरान मंजूरी तो दे दी थी, लेकिन अमेरिकी दबाव के कारण इसे रोकना पड़ा था। बस फिर क्या था। अटल बिहारी ने कलाम से तुरंत काम शुरू करने के लिए कहा। हालांकि अटल बिहारी सरकार भी 13 दिन में गिर गई थी। इसके बाद 1998 में भाजपा सत्ता में वापस आई और वाजपेयी एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री बने। कलाम को परमाणु परीक्षण की कमान सौंपी गई। इसके बाद देश ने अपनी परमाणु क्षमता का प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि एपीजे अब्दुल कलाम आगे चलकर भारत के 11वें राष्ट्रपति बने।

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