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E-Cigarette and Vape: बढ़ रही है ई-सिगरेट और वेप की खतरनाक लत, लेकिन सरकार नींद में

E-Cigarette and Vape: ई-सिगरेट पर भारत में प्रतिबंध है, फिर भी आसानी से इसका ऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकता है और कुछ दिनों के भीतर उसे प्राप्त भी किया जा सकता है।

Dangerous addiction of e-cigarette and vape increasing due to government negligence

कई प्लेटफ़ॉर्म और वेप वेबसाइट बिना किसी रोक टोक के चल रहे हैं। कुछ ही स्टोर ऐसे हैं जो आयु सत्यापन के बाद ही वेप्स देते हैं। पान और तंबाकू की दुकानों पर तो यह और आसानी से उपलब्ध हैं, जहां उम्र सत्यापन की भी जरूरत नहीं है। मजेदार बात है कि अधिकतर विक्रेताओं को यह पता ही नहीं है कि देश में वेपिंग उत्पादों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसलिए वह खुलेआम बेच रहे हैं।

ई-सिगरेट का उपयोग करने वाले अधिकतर यह मानते हैं कि जलाई जाने वाली तंबाकू सिगरेट का बेहतर विकल्प है वेप्स। जबकि यह सच नहीं है। वेपिंग पर स्विच कर चुके लोग अब उसके साथ धूम्रपान के लिए भी मजबूर हैं। क्योंकि इसमें नशे की लत वाले रसायनों का उपयोग होता है।

आइए जानते हैं ई-सिगरेट के नुकसान के बारें में:

1. वेप या वेपोराइज़र एक ऐसा उपकरण होता है जो अंदर पड़े पदार्थ को गर्म करता है, जिसमें आमतौर पर निकोटीन, फ्लेवरिंग और अन्य रसायन होते हैं, जिससे एयर सोल बनता है जो सांस के साथ अंदर जाता है। यह सिगरेट पीने के समान है, लेकिन वेपिंग तंबाकू को जलाने के बजाय तरल पदार्थ से छोटे कणों को गर्म करती है। वेपिंग किशोरों और युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गई है, और निकोटीन की उपस्थिति के कारण इसे स्वास्थ्य के लिए जोखिम माना गया है। यह नशे की लत लगाता है।

2. बाजार में कई प्रकार के वेप्स उपलब्ध हैं। डिस्पोजेबल वेप और पेन वेप ज्यादा चलन में है। नशे की दुनिया में नए आए लोग इसके शिकार हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें यह बताया जाता है कि इसमें कम नशा है। इसके अलावा इसके आदी हो चुके लोग पॉड वेप, पॉड किट्स, एमटीएल वेप किट्स, वैक्स वेप, आदि इस्तेमाल करते हैं।

3. कई अध्ययन बताते हैं कि वेपिंग से फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। वेप में मौजूद निकोटीन किशोरों और युवाओं के दिमाग पर बुरा प्रभाव डालता है। वेप में उपयोग किए जाने वाले तरल में अक्सर निकोटीन और फ्लेवरिंग होते हैं, जो फेफड़ों की बीमारी के साथ-साथ कार्डियोवैस्कुलर (हृदय) रोग का कारण बन सकते हैं। वेप में एक्रोलिन भी होता है जो एक दवाई होती है जिसका उपयोग मुख्य रूप से खरपतवार को मारने के लिए किया जाता है। इससे फेफड़ों में गंभीर चोट और सीओपीडी हो सकती है तथा अस्थमा और फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।

4. निकोटीन अत्यधिक नशे की लत है, जो कि विकासशील भ्रूणों के लिए भी विषैला होता है। निकोटीन किशोरों और युवा वयस्कों के मस्तिष्क के विकास को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

5. निकोटीन गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भ में विकासशील शिशुओं के लिए भी एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा है।

6. इसमें कैंसर पैदा करने वाले रसायन और छोटे कण शामिल हैं जो फेफड़ों में गहराई तक पहुंचते हैं। हालाँकि, ई-सिगरेट एरोसोल में आम तौर पर जले हुए तंबाकू उत्पादों के धुएं की तुलना में कम हानिकारक रसायन होते हैं, फिर भी घातक हो सकते हैं।

7. वेप या ई-सिगरेट का आविष्कार एक चीनी फार्मासिस्ट होन लिक ने 2003 में किया था। अब यह पूरे विश्व के युवा वर्ग के लिए फैशन की तरह फैल गया है। आमतौर पर सोशल मीडिया फ़ीड में देखा जाता है कि किस प्रकार से युवा अक्सर वेपिंग को सामाजिक रूप से स्वीकार्य और धूम्रपान की तुलना में कम हानिकारक मानने लगे हैं। एक तरह से वेपिंग कल्चर विकसित हो गया है। वेपिंग अंडरग्राउन्ड फोरम, ई सिगरेट फोरम, वेपर टॉक, प्लानेट फॉर दि वेपर्स जैसे पचासों ऑनलाइन फ़ोरम बन गए हैं, जहाँ इसके शौकीन लोग मिल सकते हैं, नेटवर्क बना सकते हैं और विचार साझा कर सकते हैं। वेपिंग को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी व्यापक रूप से प्रचारित किया जाता है, और कई युवा अपनी सामाजिक छवि अच्छा करने या फिर 'कूल' बनने देने के लिए वेपिंग करते हैं।

8. भारत में ई-सिगरेट और वेप बाजार में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। एनएलएसआईआर ऑनलाइन के एक अध्ययन के मुताबिक, भारतीय ई-सिगरेट और वेप बाजार 2018 में 7.8 मिलियन उपयोगकर्ताओं तक पहुंच गया था। 2019 में, भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और वेप की बिक्री की मात्रा तीन मिलियन से अधिक पहुंच गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी वृद्धि दर्शाती है। 2019-2025 के दौरान भारत के ई-सिगरेट और वेप बाजार के 24% की सीएजीआर में बढ़ने का अनुमान है।

9. एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि कई वयस्क धूम्रपान छोड़ने के प्रयास में ई-सिगरेट का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन अधिकांश वयस्क ई-सिगरेट के उपयोग के बाद भी तंबाकू वाली सिगरेट पीना बंद नहीं करते हैं और दोनों उत्पादों का उपयोग करना जारी रख रहे हैं। सब जानते हैं कि दिन में कुछ सिगरेट पीना भी खतरनाक हो सकता है।

10. 2023 में लगभग 21 लाख अमेरिकी मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों ने ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना शुरू किया। इस समय 4.5 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क ई-सिगरेट का उपयोग कर रहे हैं। उनमें से 36.9 प्रतिशत साथ में सिगरेट भी पीते हैं।

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