Shubman Gill: शुभमन गिल को आउट करने वाले गेंदबाज को उसके पिता देते थे 100 रुपये का ईनाम

भारत के युवा सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल अब किसी पहचान के मोहताज नहीं है। अपनी शानदार बल्लेबाजी से गिल ने क्रिकेट की दुनिया में अपनी छाप छोड़ दी है।

cricketer Shubman Gill journey of his career father rewarded of Rs 100 to bowler who dismissed

Shubman Gill: हाल ही में अहमदाबाद में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलते हुए भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल ने T-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में अपना पहला शतक जड़ा है। शुभमन गिल ने 54 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया। इस पारी में उन्होंने 12 चौके और 7 छक्के लगाए। उन्होंने चौके की मदद से अपना शतक पूरा किया। शुभमन गिल ने वनडे क्रिकेट में भी धमाल मचाया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ ही वनडे सीरीज में गिल के बल्ले से दोहरा शतक निकला था। उससे पहले श्रीलंका के खिलाफ भी उन्होंने शतक जड़ा था। वनडे में भारत के लिए सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं।

बचपन से ही था क्रिकेट का शौक

शुभमन गिल का जन्म 8 सितंबर 1999 को पंजाब के फाजिल्का में हुआ था। शुभमन के पिता का नाम लखविंदर सिंह गिल है, जोकि एक किसान हैं। उनकी मां कीरत गिल, गृहिणी हैं। इसके अलावा उनकी बहन शहनील गिल है। शुभमन के दादा दीदार सिंह कबड्डी के खिलाड़ी थे। वे अपने बेटे लखविंदर सिंह को पहलवान बनाना चाहते थे। मगर शुभमन के पिता की जांघ की हड्डी टूट गयी और वे पहलवान न बन सके और किसानी करने लगे।

शुभमन के पिता लखविंदर सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुभमन 3 साल की उम्र से ही क्रिकेट के पीछे इतना पागल था कि उसे सिर्फ क्रिकेट बैट और बॉल ही पसंद आते थे बाकि कोई और खिलौना नहीं। ये अपने बैट और बॉल के साथ ही सोता था।

बेटे की क्रिकेट में रूचि को देखते हुए पिता ने उन्हें क्रिकेटर बनाने की ठान ली। उन्होंने गांव के अपने एक बड़े से खेत में शुभमन गिल के लिए क्रिकेट पिच तैयार की। शुभमन को बल्लेबाजी करना ज्यादा पसंद था तो अभ्यास के दौरान पिता घंटों उन्हें गेंद फेंकते। कभी-कभार वो गांव के लड़कों को चैलेंज देते कि जो शुभमन को आउट करेगा उसे इनाम में 100 रूपये दूंगा। उनके पिता बताते हैं कि इनाम पाने के लिए गांव के कई लड़के इकट्ठा हो जाते थे। शुरू के पांच-छह महीने पैसे खर्च हुए पर फिर ऐसा समय आया कि शुभमन को जल्दी कोई आउट ही नहीं कर पाता था।

ऐसे बदली शुभमन की किस्मत

बेटे के करियर को सही दिशा देने के लिए पिता ने गांव छोड़ने का फैसला लिया। शुभमन गिल की उम्र जब आठ साल की थी, तब उनका परिवार मोहाली शिफ्ट हो गया और किराये के एक मकान में रहने लगा। इसके बाद पिता ने मोहाली के पीसीए स्टेडियम में शुभमन गिल का दाखिला करा दिया। उनका मकान पास ही था तो उन्हें आने जाने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई। वहां गिल ने प्रोफेशनल क्रिकेट की ट्रेनिंग ली।

एक दिन शुभमन गिल जब मैच खेल रहे थे तब भारत के पूर्व तेज गेंदबाज करसन घावरी की नजर उन पड़ी। वे शुभमन गिल की बल्लेबाजी से काफी प्रभावित हुए। घावरी उनके बेहतरीन शॉट्स के कायल हो गए थे। उन्हीं के कहने पर शुभमन गिल को पंजाब के अंडर-14 टीम में शामिल किया गया था। इसके बाद से गिल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद शुभमन गिल को पंजाब की अंडर-16 टीम में चुना गया। उन्होंने पहली ही सीरीज में पांच मैचों में 330 रन बनाकर रिकॉर्ड बना दिया। साल 2014 में शुभमन गिल को विजय मर्चेंट ट्रॉफी खेलने का मौका मिला।

उन्हें वर्ष 2013 - 2014 के सफल सीजन के लिए बीसीसीआई के द्वारा सर्वश्रेष्ठ U-16 क्रिकेटर के रूप में एमए चिदंबरम ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। वर्ष 2017 में, उन्होंने दिल्ली में विदर्भ क्रिकेट टीम के खिलाफ लिस्ट ए क्रिकेट का पदार्पण किया। उसी वर्ष उन्हें भारत की U -19 क्रिकेट टीम में चुना गया। उन्हें अंडर -19 क्रिकेट विश्व कप 2018 के लिए उप-कप्तान भी चुना गया। वर्ष 2018 में, उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग 2018 (IPL) की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) द्वारा 1.8 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। शुभमन ने भारतीय टीम के लिए 2019 में वनडे, 2020 में टेस्ट और 2023 में टी-20 डेब्यू किया।

लाल रूमाल से गजब का कनेक्शन

शुभमन गिल की माता कीरत गिल बताती हैं कि शुभमन को शुरू से ही लाल रंग काफी पसंद है। शुभमन को ऐसा लगता है कि लाल रूमाल उसके लिए बेहद लकी है। ऐसे में जब भी वह क्रिकेट मैच खेलने के लिए मैदान में उतरता है, हमेशा लाल रूमाल अपनी जेब में रखता है। एक-दो बार शुभमन ने सफेद रूमाल रखकर मैच खेला लेकिन वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। इसके बाद शुभमन का यकीन और पक्का हो गया और अब वह हमेशा अपनी जेब में लाल रूमाल डालकर मैच खेलने के लिए मैदान में उतरता है।

वहीं पीसीए कोच टिंकू ने बताया कि शुभमन गिल जब आठ साल के थे, तब वह उनके पास कोचिंग लेने के लिए आए थे। शुभमन की खास बात यह है कि कभी शॉट खेलने की जल्दी नहीं रहती है। वह उसी गेंद पर शॉट खेलता है जिसे वह बाउंड्री के पार पहुंचा सके।

तोड़े कई रिकॉर्ड

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    शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में 360 रन बनाए। जबकि 3 मैचों की द्विपक्षीय सीरीज में सबसे अधिक रन बनाने का भारतीय रिकॉर्ड विराट कोहली (283 रन) के नाम था। शुभमन ने उस रिकॉर्ड को तोड़ा है। यही नहीं, गिल ने पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम के वर्ल्ड रिकॉर्ड की भी बराबरी कर ली। दरअसल, बाबर आजम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 2016 में लगातार 3 मैचों में शतक जड़ते हुए 360 रन बनाए थे। अगर वह एक रन और बना लेते तो गिल सबसे आगे होते लेकिन अब वह बाबर आजम के साथ संयुक्त रूप से टॉप पर हैं। बाबर आजम और शुभमन गिल के बाद बांग्लादेश के इमरुल कायस का नाम आता है, जिन्होंने 2018 में जिम्बाब्वे के खिलाफ 349 रन बनाए थे।

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