क्या राहुल गांधी अब भी कहेंगे एक साल में गिर जाएगी मोदी सरकार? TMC में टूट से संसद में बदला NDA का सीट समीकरण
NDA Parliament Seat Equation: लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार यह दावा करते आ रहे थे कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कमजोर बैसाखियों पर टिकी है और यह एक साल के भीतर ही गिर जाएगी।
लेकिन पश्चिम बंगाल की सियासत में आए एक भूचाल ने संसद के भीतर सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति को इतना मजबूत कर दिया है कि विपक्षी खेमे के सारे दावे अब हवा होते दिख रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत करने वाले 20 सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में आधिकारिक तौर पर विलय कर लिया है। इस दलबदल ने संसद के दोनों सदनों में मोदी सरकार को पूर्ण बहुमत से बहुत आगे लाकर खड़ा कर दिया है। आइए समझते हैं कि आखिर इस पूरे खेल के बाद संसद में आंकड़ों का कुल गणित कैसे बदल गया है।
TMC Rebellion से बदला लोकसभा का गणित: बहुमत से बहुत आगे निकला NDA
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद टीएमसी में शुरू हुई इस बगावत ने लोकसभा में विपक्ष के 'सरकार गिराने' के मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है।
लोकसभा में बीजेपी और सहयोगियों को मिलाकर एनडीए के पास 294 सदस्य थे, जो बहुमत (272) से ऊपर थे लेकिन सरकार को हमेशा सहयोगियों (जैसे टीडीपी और जेडीयू) के दबाव का डर सताता रहता था। अब TMC के 20 बागियों के समर्थन के बाद लोकसभा में एनडीए का आंकड़ा 314 पर पहुंच गया है।
दो-तिहाई बहुमत: वर्तमान में 3 सीटें खाली होने के कारण लोकसभा के सदस्यों की प्रभावी संख्या 540 है। इस हिसाब से NDA को सदन में एकतरफा 'दो-तिहाई बहुमत' (Two-Third Majority) हासिल करने के लिए 360 वोटों की जरूरत होगी, जिससे वह अब महज 46 सीट दूर है।
राज्यसभा का गणित: इंडिया गठबंधन सिर्फ 63 सीटों पर सिमटा
सिर्फ लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा (उच्च सदन) में भी पासा पूरी तरह पलट चुका है। टीएमसी के बागी गुट के लोकसभा सांसदों के साथ-साथ उनके खेमे के राज्यसभा सांसदों ने भी पाला बदला है। राज्यसभा में पहले एनडीए के पास 148 सदस्य थे। लेकिन 7 राज्यसभा सांसदों के नए समर्थन के साथ एनडीए का आंकड़ा 155 सीटों पर पहुंच गया है।
विपक्ष की कमर टूटी...
दूसरी तरफ, कांग्रेस और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के पास राज्यसभा में अब सिर्फ 63 सीटें ही बची हैं, जो इतिहास के सबसे निचले स्तरों में से एक है। राज्यसभा में वर्तमान में 3 सीटें खाली हैं। यहाँ दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सीटों की आवश्यकता है, और एनडीए इस जादुई आंकड़े से महज 9 कदम दूर है।
विपक्ष के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
विपक्षी गठबंधन INDIA लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुटता की रणनीति पर काम कर रहा है। लेकिन प्रमुख विपक्षी दलों के भीतर बढ़ती असहमति और टूट की खबरें विपक्ष के लिए चुनौती बन सकती हैं। TMC जैसे बड़े विपक्षी दल में संकट पैदा होना केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कुछ अन्य दलों में भी असंतोष देखने को मिल सकता है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि आने वाले समय में और सांसद NDA के पक्ष में आते हैं तो संसद के दोनों सदनों में सत्ता पक्ष की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
राहुल गांधी के सरकार गिराने वाले बयान पर फिर चर्चा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी समय-समय पर केंद्र सरकार को लेकर तीखे राजनीतिक बयान देते रहे हैं। ऐसे में TMC में टूट और NDA के बढ़ते समर्थन को लेकर राजनीतिक बहस का नया दौर शुरू हो गया है। हालांकि सरकार की स्थिरता का अंतिम आकलन संसद के वास्तविक आंकड़ों, सहयोगी दलों के रुख और भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।
TMC में उभरे संकट और बागी सांसदों के नए राजनीतिक ठिकाने ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। यदि यह घटनाक्रम आगे भी जारी रहता है, तो संसद के भीतर शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।














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