Ageing China: बूढ़ा और बीमार होता जा रहा है ड्रैगन, आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर बढ़ी चीन की चुनौती
हमारा पड़ोसी मुल्क चीन इस समय आर्थिक एवं सामाजिक झंझावातों से गुजर रहा है। बुजुर्ग लोगों के लिए एक अभिशप्त देश होने की ओर बढ़ रहा चीन भविष्य में पेंशन और बुढ़ापे के लिए जरुरी सुविधाओं के लिए संघर्ष करता दिखाई दे रहा है। चीन में कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट की उम्र दुनिया में सबसे कम है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद पेंशन समेत सामाजिक कल्याण की दूसरी योजनाओं पर खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

चीन से खबर आ रही है कि सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट में जबरन देर कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च, 2022 में बीजिंग ने एलान किया था कि सरकार नियम को बदलकर रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने वाली है।
चीन का पेंशन बजट गड़बड़ाया
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन में बुजुर्ग लोगों की आबादी इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि सरकार के पास पोस्ट रिटायरमेंट जिंदगी बिता रहे लोगों को देने के लिए फंड की कमी हो गई है। बल्कि पेंशन स्कीम समेत दूसरी कल्याणकारी योजनाएं फंड के अभाव में चरमरा गई हैं। मौजूदा नीति के मुताबिक चीन में हर रिटायर कर्मचारी को पांच कर्मचारियों के योगदान द्वारा पेंशन दी जाती है।
चीन की इकोनॉमी और सोशल मुद्दों पर लिखने वाली लुना सुन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में रिटायरमेंट की उम्र दुनिया भर में सबसे कम है। चीन में पुरुष कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 60 वर्ष, तो महिला कर्मचारियों के लिए 55 वर्ष है। खेतों, फ़ैक्ट्रियों और निर्माण क्षेत्र की महिला श्रमिकों के लिए यह उम्र 50 वर्ष है। आंकड़ों के मुताबिक चीन में इस साल 2.8 करोड से ज्यादा कर्मचारी रिटायर होंगे, इसलिए चीन में पेंशन स्कीम को लेकर आशंकाएँ गहरा रही हैं।
एक तरफ चीन बूढ़ा हो रहा है दूसरी तरफ लाख प्रयास के बावजूद चीन में जन्म दर नहीं बढ़ रही है। साल 1963 में सबसे अधिक लोगों का जन्म (बेबी बूम) हुआ था, लेकिन पिछले छह दशकों में बहुत कम बच्चे पैदा हुए हैं। मौजूदा नियम के अनुसार चीन में अगले कुछ और वर्षों तक रिटायर होने वाले कर्मचारियों की संख्या 2 करोड़ से ऊपर या आसपास ही रहेगी। इसलिए बीजिंग के नीतिगत सलाहकारों का कहना है कि नए नियमों में भी सभी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट की उम्र एक समान नहीं हो सकती। क्योंकि आने वाले कुछ ही वर्षों में रिटायरमेंट की उम्र को लेकर चीन को नए संकटों से जूझना पड़ सकता है।
रोजगार और रिटायरमेंट पर पॉलिसी पैरालिसिस
साउथ एशिया में चीन की इकोनॉमी, पॉलिसी और वेलफेयर स्कीम्स की समझ रखने वाले जानकारों का मानना है कि मौजूदा हालात ड्रैगन के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। ऐसे दौर में चीन को एक अधिक लचीली रोजगार प्रणाली की जरूरत है जो देश के आर्थिक और समाजिक विकास में बुजुर्ग लोगों का बेहतर उपयोग कर सके। इसमें रिटायर्ड कर्मचारियों को मेडिकल और एडुकेशन जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में योगदान करने की इजाजत देना भी शामिल है।
हालांकि, चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय के सलाहकार और रेनमिन यूनिवर्सिटी के उपाध्यक्ष डु पेंग रिटायरमेंट की उम्र में देरी को एक वैश्विक प्रवृत्ति बताते हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि इस वर्ष चीन में कॉलेज ग्रैजुएट की संख्या 11 मिलियन से अधिक हो गई है, इसलिए रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाने का दृष्टिकोण सभी के लिए एक समान या एक साथ फिट होने वाला नहीं हो सकता है।
उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को नई वास्तविकता के अनुसार फोकस्ड और लचीले उपाय करने चाहिए। क्योंकि आजकल कई बुजुर्ग लोग बेहतर शिक्षित और काम के लायक हैं। रिटायर्ड कर्मचारियों को बोझ या अनुपयोगी नहीं माना जा सकता, क्योंकि वे अनुभवी हैं। इसलिए उन्हें सामुदायिक प्रशासन से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
विवाह और जन्म दर बढ़ाने के लिए इनाम
रेनमिन यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ जेरोन्टोलॉजी के प्रमु डू पेंग ने साफ तौर पर कहा है कि चीन में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करके ही कोई नीति बनानी होगी। वर्ष 2022 के अंत में 28 करोड़ से अधिक लोग यानी चीन में लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे, जबकि 1.41 बिलियन आबादी में से लगभग 15 प्रतिशत 65 वर्ष से अधिक उम्र के थे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष चीन में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 30 करोड़ लोग होंगे। इनमें से बड़ी आबादी 50 और 55 वर्ष की आयु में रिटायर हो चुकी होगी। डू पेंग के मुताबिक चीन में 2050 तक 38 प्रतिशत से अधिक आबादी 60 वर्ष से अधिक उम्र की होने की उम्मीद है। एक अनुमान के मुताबिक आने वाले दशकों में चीन में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 40 करोड़ के आंकड़े को छू सकती है।
चीन में ऐसी संभावित परिस्थिति को सिल्वर सुनामी नाम दिया गया है। इससे पेंशन फंड, बुजुर्ग देखभाल सुविधाओं और मेडिकल सेवाओं पर दबाव और बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के प्रभाव से बचने के लिए चीन सिर्फ जन्म दर को बढ़ावा देने पर निर्भर नहीं रह सकता है। हां, यह एक कारगर कदम हो सकता है। क्योंकि पिछले साल छह दशकों में पहली बार चीन की जनसंख्या कम हो गई है और जन्म और विवाह दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गई है। खासकर 1980 से 2015 तक लागू वन चाइल्ड पॉलिसी के कारण चीन में आबादी बेहद स्थिर और कम होने लगी। चीन सरकार ने विवाह और जन्म दर को बढ़ावा देने के लिए 25 वर्ष या उससे कम उम्र की लड़की की शादी पर जोड़ों के लिए नकद इनाम देने की घोषणा भी की है।
बुजुर्गों की देखभाल के मामले में 52वें नंबर पर
साल 1960 के दशक में चीन में लोगों की औसत उम्र 44 साल हुआ करती थी। यह बढ़कर साल 2021 में 78 साल हो गई है है। साल 2050 तक इसके 80 साल से भी ज्यादा होने की उम्मीद है। इसी अनुपात में बुजुर्ग लोगों के सामने बीमारियों के बढ़ने के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। इस तरह गंभीर जनसांख्यिकीय बदलावों से गुजर रहे चीन में पहले से ही कमजोर हो रही अर्थव्यवस्था के लिए कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
लंबे समय तक कोविड-19 महामारी और उसके चलते लागू लॉकडाउन के बाद लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए संघर्ष कर रहा चीन सामरिक तौर पर भी दुनिया के कई देशों के साथ उलझा हुआ है। इन सब वजहों से बुर्जुगों की बेहतर देखभाल और उनको दी जाने वाली सुविधाओं के मामले में ग्लोबल एज वॉच इंडैक्स में चीन 52वें नंबर पर है।
ऐसे में चीन को अपने बुजुर्ग समुदाय की देखभाल और उनकी सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए अन्य देशों से बहुत कुछ सीखने की जरूरत भी है। जैसे जर्मनी और जापान में बुजुर्गों की देखभाल के बेहतर नेटवर्क हैं। सिंगापुर प्रशासन वयस्क बच्चों को अपने बुजुर्ग माता-पिता के करीब रहने के लिए प्रोत्साहित कर उनकी अधिक सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है। वहीं, ब्रिटेन और आयरलैंड में भी बुजुर्गों के लिए सरकार की ओर से कई गतिविधियां चलाई जाती हैं।
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