China and Japan: जापान की मछली से चीन की तौबा

China and Japan: चीन को जापान से दूसरे विश्व युद्ध के समय से खुन्नस है। टोक्यो भी लगातार अमेरिका के साथ मिलकर चीन के खिलाफ मोर्चा सम्हाले हुए है। अब चीन को मौका मिला है कि वह जापान को कुछ झटका दे। बहाना है जापान द्वारा परमाणु दूषित पानी को समुद्र में छोड़ना।

जापान ने सोमवार तक 4,200 टन से अधिक परमाणु-दूषित अपशिष्ट जल प्रशांत महासागर में छोड़ दिया है। चीन ने पहले तो इस पर बहुत शोर मचाया, लेकिन उसकी बात जब नहीं सुनी गयी तो उसने जापान से मछली समेत सभी समुद्री खाद्य पदार्थों के आयात पर बैन लगा दिया। 24 अगस्त को, चीनी सीमा शुल्क ने खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए जापानी जलीय उत्पादों के सभी आयात पर व्यापक प्रतिबंध लगा दिया था।

china surrounds japan over release Fukushima water

हांगकांग ने भी फुकुशिमा और नौ अन्य प्रान्तों से जापानी सी-फूड पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब उससे भी मन नहीं भरा तो उसने किसी न्युट्रल एजेंसी से जापान के दावे की सच्चाई की जाँच कराने की मांग कर दी है, जिसमें यह कहा गया है कि जापान ने परमाणु दूषित पानी का ट्रीटमेंट कर उसे हानिकारक नहीं रहने दिया। जापानियों ने विश्वास दिलाने के लिए फिश फीस्ट का विशेष आयोजन किया था।

चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने मुद्दे को बल देने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सार्वजनिक स्वास्थ्य और संक्रामक रोग चिकित्सक का एक साक्षात्कार किया और उससे कहलाया कि जापान का पिछला जल परीक्षण अधूरा और अप्रमाणिक था। फिर तुरंत एक स्वतंत्र तृतीय पक्ष द्वारा जाँच की मांग कर दी।

यह अलग बात है कि अभी तक चीन की इस मांग पर किसी ने तवज्जो नहीं दी है। ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि कुछ देश और संगठन जापान की डंपिंग पर चुप इसलिए हैं कि आधे से अधिक अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित उनकी परमाणु सुविधाओं का कचरा भी प्राकृतिक वातावरण में ही छोड़ा जाता है, जिसमें भारी मात्रा में ट्रिटियम भी छोड़ा जाता है।

24 अगस्त को डंपिंग शुरू करने के बाद से, जापान ने पिछले सोमवार तक 4,200 टन से अधिक परमाणु-दूषित पानी को ट्रीट कर डंप कर दिया था। जापान लगातार दुनिया भर के स्पेशलिस्ट और पत्रकारों को बुला कर डंपिंग साइट का निरीक्षण करने की सुविधा दे रहा है। फ्रांसीसी पत्रकार, जिसे TEPCO ने अन्य विदेशी मीडिया के साथ शनिवार को डिस्चार्ज सुविधा का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया था, ने भी किसी पर्यावरण समूह या विशेषज्ञ जैसे तीसरे पक्ष को बुलाने की जरुरत से इंकार किया था।

अब टोक्यो ने समुद्र में परमाणु-दूषित अपशिष्ट जल के कथित मनमाने ढंग से डंपिंग का बहाना बना कर जापानी समुद्री भोजन पर चीन के प्रतिबंध के जवाब में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चीन के खिलाफ अपील कर दी है। उल्लेखनीय है कि चीन-जापान संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। जापानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि रेडियोधर्मी अपशिष्ट जल डंपिंग की आड़ में जापानी समुद्री भोजन पर चीन का प्रतिबंध "पूरी तरह से अस्वीकार्य" है, और उसने चीन से इसको तुरंत रद्द करने का आग्रह किया है। चीन के रुख के बाद यह साफ दिख रहा है कि दोनों देशों के बीच टकराव के अन्य मुद्दों के साथ यह मछली व्यापार भी जुड़ जायेगा।

एक तरफ टोक्यो डब्ल्यूटीओ में चीन को घसीटने की तैयारी में है, दूसरी तरफ जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने जापानी समुद्री भोजन पर प्रतिबंध से प्रभावित निर्यातकों की मदद के लिए 20.7 बिलियन येन (141 मिलियन डॉलर) के आपातकालीन कोष की घोषणा की है। क्योंकि चीन के प्रतिबंध से जापान के समुद्री भोजन निर्यात क्षेत्र को गंभीर झटका लग रहा है। चीन उसके लिए एक बड़ा बाजार है। जापानी मत्स्य पालन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में चीन जापान के समुद्री भोजन आयात का सबसे बड़ा स्रोत था।

वहीं चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के रिसर्च फेलो जियांग हाओयू का कहना है कि "जापान की डब्ल्यूटीओ अपील का कोई व्यावहारिक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। यह चीन की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास है।"

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