CBI vs Cbi पर मचे घमासान के बीच जानिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के बारे में ये जरूरी बातें
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में मचा घमासान अब देश की सबसे बड़ी अदालत के दर पर पहुंच गया है, छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और एक एनजीओ द्वारा दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीवीसी से अपनी जांच अगले 2 हफ्ते में पूरी करने को कहा है तो वहीं इस मामले ने सियासी रूप भी धारण कर लिया है। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और डिप्टी, विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को फोर्स लीव पर भेजे जाने को लेकर कांग्रेस आज सीबीआई मुख्यालय समेत देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रही है, आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी है।
चलिए विवादों में उलझे सीबीआई के बारे में जानते हैं कुछ बेहद ही खास बातें

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो या सीबीआई भारत सरकार की प्रमुख जांच एजेंसी है जो कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के अधीन कार्य करती है। इसके अधिकार और कार्य दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन अधिनियम (Delhi Special Police Establishment Act 1946) के तहत ही संचालित है और सीबीआई ही भारत के लिये इंटरपोल की आधिकारिक इकाई है।

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की उत्पत्ति
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की उत्पत्ति भारत सरकार द्वारा सन् 1941 में विशेष पुलिस प्रतिष्ठान से हुई है। उस समय विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का कार्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय युद्ध और आपूर्ति विभाग में लेन-देन में घूसखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना था।

दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट ऐक्ट
युद्ध के बाद दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट ऐक्ट, 1946 के प्रावधानों के तहत इस एजेंसी का संचालन होता रहा, 1963 में गृह मंत्रालय ने एक प्रस्ताव के माध्यम से स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट का नाम बदलकर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी सीबीआई कर दिया गया।

सीबीआई की दो शाखाएं
1987 में सीबीआई की दो शाखाएं बनीं, एक शाखा का नाम भ्रष्टाचार निरोधी (ऐंटि करप्शन) डिविजन है और दूसरी का नाम स्पेशल क्राइम डिविजन है। तीन स्पेशल डायरेक्टर्स सीबीआई के क्षेत्रीय कार्यालयों पर नजर रखते हैं।
संस्थापक निदेशक
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के संस्थापक निदेशक श्री डी.पी. कोहली थे, जिन्होंने 01 अप्रैल, 1963 से 31 मई, 1968 तक इसका कार्यभार संभाला । कोहली को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 1967 में 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया था ।












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