Thalapathy Vijay Story: 8 साल पहले ही 'Sarkar' बना चुके थे थलापति? अब तमिलनाडु में असली 'राज तिलक'!
Thalapathy Vijay Story: तमिलनाडु की राजनीति में 'विजय' शब्द अब सिर्फ सिनेमाघरों का नहीं, बल्कि विधानसभा का भी हकीकत बन चुका है। थलापति विजय की मात्र दो साल पुरानी पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम (TVK) ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीत ली हैं। बहुमत से सिर्फ 10 सीट कम, लेकिन इतिहास रचने के लिए काफी। 7 मई को विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं।
लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह नहीं है कि एक अभिनेता मात्र दो साल में सत्ता तक पहुंच गया। सबसे दिलचस्प यह है कि यह सब 8 साल पहले उनकी ही फिल्म 'सरकार' (2018) की कहानी से मेल खाती है। आइए जानते हैं असल में क्या था फिल्म में?

'Sarkar' की कहानी और Vijay की असल जिंदगी, जहां स्क्रिप्ट और सच्चाई एक हो गए
2018 में रिलीज हुई फिल्म 'सरकार' एआर मुरुगदॉस के निर्देशन में बनी थी। ₹110 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर ₹253 करोड़ का कारोबार किया था। विजय के साथ कीर्ति सुरेश और वरलक्ष्मी सरथकुमार मुख्य भूमिकाओं में थीं। योगी बाबू, तुलसी और राधा रवि ने यादगार किरदार निभाए थे।
फिल्म का हीरो सुंदर रामास्वामी (विजय) एक सफल NRI बिजनेसमैन है। वह सिर्फ वोट डालने के लिए भारत लौटता है। लेकिन पोलिंग बूथ पर पहुंचकर पता चलता है कि उसका वोट पहले ही किसी और ने डाल दिया है। यहीं से शुरू होती है कहानी, चुनावी धोखाधड़ी, राजनीतिक भ्रष्टाचार और सिस्टम के खिलाफ एक आम आदमी की जंग।
फिल्म के अंत तक सुंदर रामास्वामी न सिर्फ अपने वोट की लड़ाई लड़ता है, बल्कि पूरे भ्रष्ट तंत्र को चुनौती देता है। वह पेशेवर राजनेताओं के खिलाफ खड़ा होता है, अपनी कंपनी से इस्तीफा दे देता है और स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ता है। शुरुआत में लोग उसे 'कॉर्पोरेट वाला' कहकर हंसते हैं। लेकिन एक ज़ोरदार भाषण में वह अपना सफर सुनाता है, मछुआरे के बेटे से बड़े बिजनेसमैन बनने तक का संघर्ष, गरीबी से अमीरी तक का सफर। उस भाषण के बाद जनसमर्थन का सैलाब आ जाता है। फिल्म का क्लाइमेक्स ठीक वैसा ही है, जैसा तमिलनाडु चुनाव के नतीजों में हमने देखा। एक सिस्टम-चेंजर का उदय। आज जब थलापति विजय TVK के बैनर तले 108 सीटें जीतकर मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, तो फिल्म के संवाद और सीन रियल लगने लगे हैं।
MGR से लेकर विजय तक, द्रविड़ राजनीति का नया अध्याय
तमिलनाडु में यह पहली बार नहीं है जब कोई सुपरस्टार राजनीति में आया हो। एमजी रामचंद्रन (MGR) ने 1972 में AIADMK की स्थापना की और 1977 से 1987 तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने भी सिनेमा से सीधे सत्ता तक का सफर तय किया था। अब 51 साल के थलापति विजय उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन एक फर्क के साथ। MGR की पार्टी को बनाने में दशकों लगे, जबकि TVK को सिर्फ दो साल हुए हैं।
विजय ने राजनीति में आने का ऐलान 2024 में किया था। कोई पुराना संगठन नहीं, कोई गठबंधन नहीं, सिर्फ एक नई पार्टी और युवाओं-महिलाओं का भरोसा। 2026 के चुनाव में TVK ने DMK के पारंपरिक गढ़ को तोड़ा, AIADMK-BJP गठबंधन को पीछे छोड़ा और 108 सीटों पर कब्जा कर लिया।
फिल्म 'सरकार' में भी सुंदर रामास्वामी ठीक यही करता है, बिना किसी पुराने सिस्टम के, नई सोच के साथ सत्ता की लड़ाई। फिल्म में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग थी, रियल लाइफ में TVK का मेनिफेस्टो भी महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए आकर्षक वादों से भरा था कि ₹2500 मासिक भत्ता, 6 फ्री LPG सिलेंडर, 8 ग्राम सोना जैसी स्कीम्स। दोनों जगह एक ही थीम, सिस्टम को बदलो, सत्ता को जनता के पास लाओ।
क्या तमिलनाडु में 'सरकार' का नया दौर शुरू हो गया?
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और AIADMK के वर्चस्व वाले राज्य में TVK की ये जीत सिर्फ एक पार्टी की जीत नहीं है। यह नई राजनीति की जीत है, जहां सिनेमा का करिश्मा, युवाओं का जोश और महिलाओं का समर्थन मिलकर पुरानी पार्टियों को पीछे छोड़ गया।
DMK का 'वुमेन कार्ड' फेल हो गया, BJP गठबंधन बिखर गया, जबकि TVK ने महिलाओं को 23 टिकट दिए और 13 जिता दिए। ठीक वैसे ही जैसे फिल्म 'सरकार' में सुंदर रामास्वामी ने आम लोगों को अपनी लड़ाई का हिस्सा बनाया।
तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब कोई पार्टी सिर्फ दो साल में 108 सीटें जीतकर सत्ता के करीब पहुंच गई है। 7 मई को जब थलापति विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, तो न सिर्फ तमिलनाडु, बल्कि पूरे दक्षिण भारत की राजनीति की दिशा बदल जाएगी।
8 साल पहले 'सरकार' फिल्म में विजय ने स्क्रीन पर जो सपना दिखाया था, आज उसी को रियल लाइफ में जी रहे हैं। थलापति अब सिर्फ सुपरस्टार नहीं, बल्कि तमिलनाडु के सबसे युवा और सबसे चर्चित मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।













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