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Car Airbags: कितने दमदार हैं कारों में लगने वाले एयरबैग? जानें अमेरिका में लाखों कारें क्यों होंगी रिकॉल

सालाना होने वाली लाखों सड़क दुर्घटनाओं में इंसानी गलतियों के अलावा वाहनों में इस्तेमाल किए जाने वाले कलपुर्जों में खामियों का भी बड़ा हाथ रहता है।

Car Airbags safety tips why millions of cars will be recalled in America

Car Airbags: सड़क दुर्घटना की वजह से हर दिन कई लोगों की जान चली जाती है। सिर्फ भारत में ही पिछले साल डेढ़ लाख से भी ज्यादा लोगों का सड़क दुर्घटनाओं में निधन हो गया। जिसकी वजह से कंपनियों पर उनके वाहनों को अत्याधुनिक सेफ्टी फीचर्स के साथ मार्किट में उतारने का दवाब बना हुआ है। इन सेफ्टी फीचर्स में एंटी ब्रेकिंग सिस्टम, एयरबैग्स, ट्रैक्शन कंट्रोल आदि शामिल हैं। पहले प्रीमियम गाड़ियों में ही एयरबैग्स दिए जाते थे, जिसे अब सभी सेगमेंट की कारों में अनिवार्य कर दिया गया है। यह एयरबैग्स, दुर्घटना के दौरान चालक और यात्रियों की जान बचाने में बेहद उपयोगी साबित होते हैं। कार क्रैश होने पर ये एयरबैग्स खुल जाते हैं और कार में सवार लोगों को गंभीर तौर पर घायल होने से बचाते हैं।

6.7 करोड़ एयरबैग्स में खराबी

इन्हीं एयरबैग्स से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिकी रेगुलेटर्स ने एयरबैग्स में इस्तेमाल होने वाले 67 मिलियन (6.7 करोड़) इंफ्लेटर्स को रिकॉल करने का आदेश जारी किया है। रेगुलेटर्स के मुताबिक, ये इंफ्लेटर्स तकनीकी तौर पर खराब हैं, जिसकी वजह से क्रैश के समय एयरबैग्स में धमाका हो सकता है और चालक की जान जा सकती है। नेशनल हाइवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) ने जांच में पाया कि इन एयरबैग्स को कई महंगी गाड़ियों में इस्तेमाल किया गया है। रेगूलेटर्स के मुताबिक, 2009 से अब तक हुई सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की वजह एयरबैग्स के पार्ट्स में पायी गयी यह खामी है।

ARC ऑटोमोटिव नाम की कंपनी एयरबैग्स के ये पार्ट्स बनाती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद रेगुलेटर्स ने फौरन इन एयरबैग्स को रिकॉल करने का आदेश जारी किया है। इन एयरबैग्स का इस्तेमाल हाल में लॉन्च हुई दर्जनों कारों में किया गया है, जिनमें जनरल मोटर्स कंपनी (GM), स्टेलांटिसस एनवी, फॉक्सवैगन एजी और ह्यूंडई मोटर कंपनी की गाड़ियां शामिल हैं। रेगुलेटर्स के आदेश के बाद जनरल मोटर्स ने 2014 से लेकर 2017 के बीच लॉन्च हुई कम से कम एक मिलियन यानी 10 लाख गाड़ियों को रिकॉल करने का फैसला किया है। इन गाड़ियों में खामी वाले ARC द्वारा बनाए गए इंफ्लेटर्स लगे हैं।

पहले भी किए गए रिकॉल

ARC के एयरबैग में आई यह खामी Takata रिकॉल की याद दिलाता है, जो अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े रिकॉल में से एक है। 2014 से लेकर अब तक ताकाटा के एयरबैग्स से लैस लाखों गाड़ियों को वापस बुलाया जा चुका है। जापानी कंपनी एयरबैग्स की खामी के अलावा सीट बेल्ट में आई खामी की वजह से भी लाखों गाड़ियों को वापस बुला चुकी है। भारत में भी साल 2012 से लेकर अब तक 5 मिलियन यानी 50 लाख से ज्यादा गाड़ियां वापस बुलाई जा चुकी हैं, जिनमें टोयोटा मोटर्स, बीएमडब्लू आदि ब्रांड्स की कारें शामिल हैं। कार बनाने वाली कंपनियों ने मार्केट से ये गाड़ियां वॉलेंटियरली यानी स्वतः वापस बुलाई थी।

नेशनल हाइवे ट्रांसपोर्ट सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन ने ARC द्वारा बनाए गए पार्ट्स इस्तेमाल करने वाली ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ-साथ गाड़ियों के मॉडल भी नहीं बताए हैं। जनरल मोटर्स ने ARC पार्ट्स वाले एयरबैग से लैस 9,94,763 गाड़ियां वापस बुलाई हैं, जिनमें बूइक इनक्लेव, शेवरोले ट्रावर्स और जीएमसी अकाडिया शामिल हैं। कंपनी ने इन गाड़ियों को 2014 से लेकर 2017 के बीच बनाया था। इसकी वजह से जनरल मोटर्स के शेयर में भी थोड़ी गिरावट आई थी।

पार्ट्स बनाने वाली कंपनी असहमत

एयरबैग के पार्ट्स बनाने वाली कंपनी इस आदेश से बिलकुल सहमत नहीं है। कंपनी का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर रिकॉल करना एक बचकाना निर्णय है। साथ ही, कंपनी ने कहा है कि वो रेगुलेटर्स को जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे। नेशनल हाइवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन इसे एक सेफ्टी रिकॉल कह सकते हैं, लेकिन वह इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जा सकते हैं। ARC ने स्टेटमेंट जारी करके बताया कि जिन पार्ट्स में खामी की वजह से एयर बैग्स वापस लिए जाने की बात कही जा रही है वो पिछले 18 सालों से गाड़ियों में इस्तेमाल हो रहे हैं।

उसने अमेरिकी इतिहास में हुए सबसे बड़े रिकॉल और इस रिकॉल में अंतर बताते हुए कहा कि उसकी वजह से केवल अमेरिका में 25 मौतें और 400 से ज्यादा लोग गंभीर तौर पर घायल हुए थे। वहीं, रेगूलेटर्स का कहना है कि 2018 तक बने ARC इंफ्लेटर्स की वेल्डिंग में खामी है, जो क्रैश के दौरान एयरबैग्स में गैस भर जाता है। जब चैनल बंद हो जाता है, तो यह इंफ्लेटर के अंदर अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है और संभावित रूप से धातु के टुकड़ों को स्प्रे कर सकता है, जिसकी वजह से चालक को गंभीर चोटें आ सकती हैं।

एक ड्राइवर की जा चुकी है जान

NHTSA द्वारा की गई जांच में एयरबैग इंफ्लेटर में आई 9 खामियों में 7 अमेरिका और दो कनाडा में सामने आए हैं। इसकी वजह से मिशिगन के एक ड्राइवर की जान भी जा चुकी है। यही नहीं, ऑथोरिटी ने टर्की और कनाडा के ARC इंफ्लेटर्स की भी जांच की है, जिनमें ड्राइवर की जानें गई हैं। इन मामलों में 2015 से 2017 के बीच बनी चेवी ट्रावर्स एसयूवी की गाड़ियों में यह इंफ्लेटर इस्तेमाल हुआ है।

वहीं, टाकाटा रिकॉल में डिफेक्टिव पार्ट्स में इस्तेमाल किए जाने वाला प्रोपेलेंट अमोनियम नाइट्रेट पर आधारित था। यह एक ऐसा केमिकल एक्सप्लोसिव है, जो स्टेबल नहीं रह सकता है। रेगूलेटर्स के प्रयासों के बाद भी अमेरिकी सड़कों पर अभी भी 8 मिलियन टाकाटा इंफ्लेटर्स वाली गाड़ियां सड़कों पर मौजूद हैं। गाड़ियों के पार्ट्स में लगातार निकल रही खामियां कार चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। कई बड़ी महंगी और प्रीमियम ब्रांड्स की गाड़ियों में इस्तेमाल किए जाने वाले दोयम दर्जे के पार्ट्स चिंता का विषय है।

भारतीय कारों में एयरबैग्स की स्थिति

दुनिया में सबसे पहली बार एयर बैग का इस्तेमाल 1950 के दशक में किया गया था। भारत में 2019 से सभी गाड़ियों में एयर बैग अनिवार्य कर दिया गया। केन्द्र सरकार ने 2019 में सभी कार कंपनियों के लिए एयर बैग लगाना अनिवार्य कर दिया। सड़क दुर्घटना के मामले में भारत सबसे अव्वल नंबर पर आता है। पिछले साल सितंबर में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 90 प्रतिशत गाड़ियों में 6 से कम एयरबैग्स लगे हैं।

पिछले साल जनवरी 2022 में केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कारों में 6 एयर बैग लगाए जाने की योजना के बारे में भी बताया था। हालांकि, यह नियम अब तक लागू नहीं किया जा सका है। इसके लिए कार निर्माता कंपनियां फिलहाल तैयार नहीं है। इसका असर गाड़ियों की कीमत पर भी पड़ेगा, जिनसे कार कंपनियों का बिजनेस प्रभावित होगा। इस समय सभी कार में कम से कम 2 एयर बैग्स होना अनिवार्य है, जबकि कई प्रीमियम ब्रांड्स अपनी गाड़ी में 10 एयरबैग्स तक ऑफर करती हैं।

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