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Budget Deficit: क्या होता है डेफिसिट यानि घाटा, जिसका बजट में बार-बार जिक्र ?

डेफिसिट जिसे हिंदी में ‘घाटा’ कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें खर्चे, आय से अधिक हो जाते है। इसका परिणाम यह होता है कि सरकार का अकाउंट बैलेंस नकारात्मक हो जाता है, जिसे शॉर्टफॉल भी कहा जाता है।

budget 2023 what is Budget Deficit and Concept of shortfall in budget revenues and expenses

Budget Deficit: घाटा या डेफिसिट कई कारणों की वजह से हो सकता है जैसे खर्च में बढ़ोतरी, आय में कमी, या दोनों के मेल से। यानि जब खर्चे, आय से ज्यादा हो जाए; एसेट्स से ज्यादा लायबिलिटीज हो जाए; निर्यात से ज्यादा आयात हो जाए, तो उस स्थिति को डेफिसिट या घाटा कहा जाता है। इस शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर सरकार या देश की वित्तीय स्थिति का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। डेफिसिट अकसर अर्थव्यवस्था की निगेटिव हेल्थ को दर्शाता है, क्योंकि इससे कर्ज, महंगाई और अन्य आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। भारत में आम तौर पर छह प्रकार के डेफिसिट की चर्चा होती है।

बजट डेफिसिट या बजट घाटा

बजट डेफिसिट या बजट घाटा का मतलब होता है कि सरकार के खर्च उसकी आय से कम है। ज्यादा खर्च और कम आय के बीच के अंतर को ही बजट डेफिसिट बोलते है। जब बजट घाटे को उधार लेकर फाइनेंस किया जाता है, तो यह सरकार के कर्ज को बढ़ाता है। अगर बजट घाटा लंबे समय तक रहता है, तो यह महंगाई को बढ़ाकर करेंसी के मूल्य और आर्थिक विकास को कमजोर कर सकता है।

रेवेन्यू डेफिसिट या राजस्व घाटा

रेवेन्यू डेफिसिट या राजस्व घाटा तब होता है जब एक वित्तीय वर्ष में सरकार के कुल राजस्व व्यय, राजस्व प्राप्तियों से ज्यादा हो जाते हैं। विभिन्न करों एवं अन्य साधनों से सरकार की कुल आय और सरकार के दिन-प्रतिदिन के कामकाज के अलावा सब्सिडी व ब्याज पर खर्च होने वाले धन के बीच के अंतर को राजस्व घाटा कहते हैं। रेवेन्यू डेफिसिट संसाधनों का उचित उपयोग न करने का संकेत देता है, और इससे सरकार की उधारी बढ़ सकती है।

फिस्कल डेफिसिट या राजकोषीय घाटा

फिस्कल डेफिसिट या राजकोषीय घाटा एक वित्तीय वर्ष में सरकार के कुल खर्च और उधार सहित कुल आय के बीच के अंतर को बताता है। राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार का कुल खर्च उसकी कुल आय से अधिक हो जाता है, जिसकी वजह से सरकार को धन उधार लेना पड़ता है।

प्राइमरी डेफिसिट या प्राथमिक घाटा

प्राइमरी डेफिसिट या प्राथमिक घाटा एक वित्तीय वर्ष में सरकार के कुल खर्च (पुराने लोन पर ब्याज भुगतान को छोड़कर) के कुल आय (उधार को छोड़कर) से अधिक होने को बताता है। प्राइमरी डेफिसिट का मतलब यह है कि सरकार अपनी आय से अपने खर्च पूरा करने में असमर्थ है और अपने कार्यों को पूरा करने के लिए उसे उधार लेना पड़ रहा है।

इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट या प्रभावी राजस्व घाटा

इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट या प्रभावी राजस्व घाटा वह है जब कुल राजस्व घाटे में से कैपिटल एसेट्स के लिए अनुदान (ग्रांट्स) को राजस्व व्यय में से अलग कर दिया जाए। इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट यह बताता है कि सरकार अपने रेवेन्यू से अपने रेवेन्यू एक्सपेंडिचर को पूरा नहीं कर पा रही और सरकार को इसे पूरा करने के लिए उधार लेना पड़ रहा है।

मोनेटाइज्ड फिस्कल डेफिसिट या मुद्रीकृत राजकोषीय घाटा

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    मोनेटाइज्ड फिस्कल डेफिसिट या मुद्रीकृत राजकोषीय घाटा नई करेंसी छापकर सरकार के फिस्कल डेफिसिट को फाइनेंस करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। ऐसा तब होता है जब भारतीय रिजर्व बैंक सरकार के खर्चो को फाइनेंस करने के लिए बॉन्ड जैसी सरकारी सिक्योरिटीज को खरीदता है और उसके एवज में करेंसी को छापता है।

    यह भी पढ़ें: Budget 2023: क्या होता है वित्तीय घाटा और कैसे सरकार करती है कमाई?

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