Ashes Cricket: एक व्यंग की वजह से हुई थी एशेज ट्रॉफी की शुरुआत, जानिये इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य
Ashes Cricket: एशेज, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट मैचों की एक श्रृंखला का नाम है। इस वर्ष यह श्रृंखला 16 जून से 31 जुलाई 2023 तक चलेगी। श्रृंखला में पांच मैच होंगे। पहला और दूसरा मैच जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 से बढ़त ले ली है। अब तीसरा मैच 6 जुलाई से 10 जुलाई तक और चौथा मैच 19 जुलाई से 23 जुलाई तक होगा। पांचवा एवं अंतिम मैच 27 जुलाई से 31 जुलाई तक ओवल में होगा।
द एशेज की शुरुआत
द एशेज 1882-83 के बाद से इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली एक टेस्ट क्रिकेट सीरीज है। इस सीरीज को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा आयोजित कराया जाता है। इस सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के नाम है। उन्होंने इस सीरीज में 5,028 रन जड़े हैं। इस सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट का रिकॉर्ड भी ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न के पास है। उन्होंने इस सीरीज में कुल 195 विकेट चटकाए थे।

कहां से पड़ा एशेज का नाम?
'एशेज' नाम ब्रिटिश समाचार पत्र द स्पोर्टिंग टाइम्स में प्रकाशित एक व्यंग्यात्मक लेख से लिया गया है। यह लेख तब लिखा गया था जब इंग्लैंड 29 अगस्त 1882 को ओवल में घरेलू धरती पर पहली बार ऑस्ट्रेलिया से टेस्ट मैच हार गया था। लेखक रेजिनाल्ड शर्ली ब्रूक्स ने समाचार पत्र में लिखा था कि इंग्लिश क्रिकेट की मृत्यु हो गयी है। शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया और राख को ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया है। ब्रूक्स की इस बात ने क्रिकेट जगत में सनसनी फैला दी। जब इंग्लैंड 1882-83 क्रिकेट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हुआ, तो इंग्लैंड के कप्तान इवो ब्ली ने घोषणा की कि वह इस राख को फिर से लाने जा रहे है।
एशेज की ट्रॉफी
एशेज की ट्रॉफी जिसे एशेज अर्न (Urn) कहा जाता है, एक छोटा टेराकोटा कलश है जिसमें राख भरी हुई है। एशेज अर्न लगभग 10.5 सेंटीमीटर अर्थात लगभग 4.1 इंच लंबा है। 1883 में जब इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए गयी थी और इंग्लैंड के कप्तान ने बोला था कि वह राख फिर से लेकर आएंगे। तब दौरे के दौरान ऑस्ट्रेलिया के सनबरी की रूपर्ट्सवुड हवेली में आयोजित मैत्रीपूर्ण मैचों में से एक के बाद इंग्लैंड के कप्तान ब्ली को व्यक्तिगत उपहार के रूप में कलश भेंट किया गया। जो उस राख का प्रतीक था जिसे वापस पाने के लिए वह ऑस्ट्रेलिया गए थे।
एशेज की ट्रॉफी में किस चीज की राख
एशेज अर्न की सामग्री काफी अटकलों का विषय रही है, कुछ का मानना है कि इसमें जली हुई क्रिकेट गेंद की राख है। जबकि अन्य का मानना है कि यह जली हुई क्रिकेट गेंद और स्टंप है। 'फन फैक्ट्स अबाउट' का दावा है कि एशेज अर्न में वास्तव में राख है। खैर इसमें राख है या कुछ और, यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन आमतौर पर इसे लॉर्ड्स के एमसीसी संग्रहालय में प्रदर्शन के लिए रखा जाता है। 1929 के बाद से इसे केवल दो बार ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया है। सबसे पहले 1988 में और फिर 2006-07 में ले जाया गया था।
नकली ट्रॉफी के लिए खेला जाता है एशेज
एशेज अर्न कभी भी एशेज श्रृंखला की आधिकारिक ट्रॉफी नहीं रही है, यह इंग्लैंड के कप्तान इवो ब्लीग को एक व्यक्तिगत उपहार था। जब उनकी टीम ने ऑस्ट्रेलिया में 1882-83 श्रृंखला जीती थी। एशेज श्रृंखला में अपनी जीत के प्रतीक के रूप में विजयी टीमों द्वारा अक्सर असली एशेज अर्न की रेप्लिका को उठाया जाता है। 1998-99 एशेज श्रृंखला के बाद से, एशेज अर्न को एशेज श्रृंखला के विजेताओं को उस श्रृंखला की आधिकारिक ट्रॉफी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मूल कलश को स्थायी रूप से लंदन के लॉर्ड्स में रखा गया है, जबकि दोनों टीमें कलश के रेप्लिका के लिए मुकाबला खेलती हैं।
एशेज में होते है पांच टेस्ट मैच
एशेज श्रृंखला 1882-83 से खेली जा रही है और पारंपरिक रूप से इसमें पांच टेस्ट होते हैं, जो हर दो साल में कम-से-कम एक बार इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित किए जाते हैं। एशेज श्रृंखला में सामान्यतः पांच टेस्ट मैच खेले जाते हैं। हालांकि इसमें कुछ अपवाद भी है जैसे दो बार चार मैचों की श्रृंखला 1938 और 1975 में खेली गयी थी। आठ बार छह मैचों की श्रृंखला 1970-71, 1974-75, 1978-79, 1981, 1985, 1989, 1993 और 1997 में आयोजित हुई। दो एशेज श्रृंखलाओं के बीच का अंतर आमतौर पर 18 से 30 महीनों का होता है।
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने कितनी-कितनी बार जीता एशेज
2021-22 तक द एशेज श्रृंखला 72 बार खेली जा चुकी है। जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने 34 बार और इंग्लैंड ने 32 बार जीत हासिल की है। शुरुआत से लेकर अब तक यह श्रृंखला छह बार ड्रॉ भी हुई है। यदि सीरीज ड्रॉ हो जाती है तो आखिरी सीजन में जिस देश ने एशेज ट्रॉफी जीती होती है ट्रॉफी उस देश के पास बरकरार रहती है। छह ड्रॉ में से पांच मौकों पर ऑस्ट्रेलिया ने एशेज बरकरार रखी है। इंग्लैंड ने एक बार सीरीज ड्रा रहने के बाद एशेज अपने पास बरकरार रखी थी। 1883 के बाद से 138 वर्षों में, ऑस्ट्रेलिया ने लगभग 82.5 वर्षों तक और इंग्लैंड ने 55.5 वर्षों तक एशेज पर कब्जा किया है।
महिलाओं का भी होता है एशेज
महिला एशेज इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीमों के बीच खेली जाने वाली एक क्रिकेट श्रृंखला है। यह श्रृंखला पहली बार 1934-35 में खेली गयी थी, लेकिन 1998 तक इसे एशेज के नाम से नहीं पुकारा जाता था। लॉर्ड्स स्टेडियम की वेबसाइट के मुताबिक महिलाओं की एशेज ट्रॉफी एक खोखली लकड़ी की गेंद होती है जिसमें ऑस्ट्रेलियाई और इंग्लैंड दोनों टीमों द्वारा हस्ताक्षरित एक छोटे बल्ले की राख होती है। यह श्रृंखला पहली महिला टेस्ट श्रृंखला थी और 1934-35 में खेली गई थी। महिला एशेज का आयोजन भी लगभग पुरुष एशेज के साथ-साथ ही होता है।












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