Amrit Kaal: अमृतकाल के आलोक में जानें 5 अगस्त से 15 अगस्त के दिन क्यों है खास
आजादी का अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) संपन्न होने के साथ देश अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। हम सबके पास हमारे सबसे प्रमुख राष्ट्रीय पर्व को लेकर बचपन से अब तक की सभी स्मृतियों को ताजा करने का समय यानी स्वतंत्रता दिवस भी बस आने ही वाला है। इसके साथ ही अगस्त माह के ये दस दिन (6 अगस्त से 15 अगस्त) कई स्मरणीय, प्रेरक और समारोहपूर्ण दिवसों को भी समाहित किए हुए हैं।

केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष हर घर तिरंगा अभियान (Har Ghar Tiranga Abhhiyan) को उत्साह से मनाने की शुरुआत की थी। इसके पीछे भी देश के आम लोगों तक स्वतंत्रता से जुड़े राष्ट्रीय विचार पहुंचाए जाने का ही आदर्श भाव था। अगस्त माह में वैसे भी स्वतंत्रता दिवस से 10 दिन पहले ही उत्सव की तैयारी प्रारंभ हो ही जाती है। केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही विभिन्न राजनीतिक-गैर राजनीतिक संगठन और संस्थाएं भी निजी तौर पर पहल कर देशभक्ति और जागरूकता फैलाने वाले कार्यक्रम मनाने आगे आते हैं।
बहुत लंबा चला था स्वतंत्रता हेतु संघर्ष
10 मई 1857 को प्रारंभ हुए प्रथम व्यापक स्वतंत्रता संग्राम से पहले भी देश के कई प्रांतों में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कई तरह प्रकट और गुमनाम संघर्ष से जुड़े तथ्य पिछले वर्ष भर हम लोगों के सामने आते रहे हैं। हां, देश भर में स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा और संगठित संघर्ष का स्वरूप 1857 में दुनिया के सामने आया। तब से लेकर 15 अगस्त 1947 के स्वतंत्रता हासिल करने तक भारत के सपूतों ने हर मोर्चे पर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। देश के कोने-कोने से लोगों ने स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
आइए, हम 5 से 15 अगस्त के बीच देश की आजादी से पहले और बाद की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में सिलसिलेवार तरीके से जानने की कोशिश करें। इन ऐतिहासिक दिनों के साथ हमारी कौन-कौन सी महान स्मृतियां जुड़ी हुई हैं और क्यों देश और देशवासियों के लिए इन्हें जानना जरूरी है।
5 अगस्त 2019
धरती के स्वर्ग और देश के मुकुट जम्मू एवं कश्मीर को धारा 35-A और अनुच्छेद-370 के बोझ से मुक्ति मिल गई। लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद भवन में पूर्ण बहुमत से जम्मू कश्मीर को विशेष अलगाववादी दर्जे से देश के अन्य भागों की तरह अभिन्न अंग बना दिया। मोदी सरकार के सबसे बड़े फैसले को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिल गई और गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इसकी घोषणा कर दी। इसके साथ ही 14 मई 1954 को जारी राष्ट्रपति के आदेश में सुधार दर्ज हो गया। इसके अलावा अमित शाह ने दूसरी घोषणा में बताया था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे।
5 अगस्त 2020
अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के पुनर्निर्माण का विधि-विधान से श्रीगणेश हो गया। 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन किया और इसकी आधारशिला रखी। लगभग 500 वर्षों के संघर्षों को शांतिपूर्वक सुलझाते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने 9 नवंबर 2019 को राम मंदिर निर्माण के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इसके साथ ही अयोध्या का विवाद समाप्त हो गया। अब कुछ ही महीनों में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर मानवता को समर्पित होने वाला है।
7 अगस्त 1905
बंग भंग के विरोध में ब्रितानी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया गया था। हालांकि, साल 1905 में बंग भंग विरोधी आंदोलन से काफी पहले देश में स्वदेशी अपनाने और विदेशी उत्पादों का बहिष्कार करने की मुहिम चल रही थी। 1871-72 में पंजाब में नामधारी सिखों ने अंग्रेजी कपड़े का बहिष्कार किया था। राम सिंह कूका ने अंग्रेजी कपड़ों के अलावा अंग्रेजी शिक्षा और अदालतों का विरोध करते हुए हथकरघा के कपड़े खद्दर को प्रचारित किया था। इसके कई वर्षों बाद 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में पहली बार विदेशी खासकर ब्रितानी कपड़े समेत विभिन्न उत्पादों के बहिष्कार के साथ ही स्वदेशी आंदोलन का सूत्रपात हुआ था।
8 अगस्त 1942
अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन का प्रारंभ। इस आंदोलन को भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का टर्निंग प्वाइंट यानी निर्णायक क्षण माना जाता है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अनुकूल अवसर जानकर भारत को ब्रितानी दासता से आजाद कराने के लिए देशवासियों ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन का शंखनाद किया था। इसके अलावा इस आंदोलन के दौरान ही अंग्रेजों का सबसे क्रूर दमन चक्र भी खुलकर दुनिया के सामने आया। देश भर में इस आंदोलन की गूंज हुई और इसमें सबसे ज्यादा स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार किया गया। लगभग वर्ष भर चलने वाले इस आंदोलन को आंशिक तौर पर सफल भी माना गया। स्वतंत्रता की पृष्ठभूमि को तात्कालिक तौर पर तैयार करने में इसका काफी महत्व है।
9 अगस्त 1942
भारतीय क्रांति दिवस या अगस्त क्रांति दिवस और गांधी जी के प्रसिद्ध प्रेरक नारे 'करो या मरो' का जन्म। अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के अगले ही दिन आंदोलन में कई महत्वपूर्ण संकल्प किए गए। जमीनी स्तर पर आंदोलन के तेज होने के चलते 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस (August Kranti Diwas) के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन पूरा देश एक सूत्र में बंधकर आंदोलन के साथ खड़ा हो गया था। अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में देशवासियों ने बड़े पैमाने पर एकता, सक्रियता, साहस, धैर्य और सहनशीलता की शानदार मिसाल पेश की थी।
9 अगस्त 1925
काकोरी में क्रांतिकारी प्रयास। साल 1925 में 9 अगस्त को मशहूर काकोरी घटना को अंजाम दिया गया था। ब्रिटिश राज के खिलाफ संघर्ष के लिए शाहजहांपुर में राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में स्वतंत्रता सेनानियों ने एक मीटिंग में चलती ट्रेन से ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूटने की योजना बनाई थी। हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के केवल दस सदस्यों ने इस घटना को सफलता से अंजाम दिया था। इनमें शाहजहांपुर से राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, मुरारी शर्मा और बनवारी लाल, राजेंद्र लाहिडी, शचींद्रनाथ बख्शी और केशव चक्रवर्ती, औरैया से चंद्रशेखर आजाद, मन्मथनाथ गुप्ता और मुकुंदी लाल जैसे क्रांतिकारी शामिल थे।
9 अगस्त 1947
स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मुस्लिम लीग की अराजकता से 9 अगस्त 1947 को कलकत्ता में दंगे भड़के थे। इसके बाद महात्मा गांधी वहां चले गए थे और आजादी के दिन भी वहीं रुके रहे थे। इस जघन्य घटना के बारे में हर जागरूक भारतीय को जरूर पढ़ना चाहिए।
11 अगस्त 1908
महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस को फांसी दी गई। महान स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस (03 दिसम्बर 1889- 11 अगस्त 1908) देश की आजादी के लिये अपने जीवन के 19वें साल में हाथ में भगवद गीता लेकर हँसते-हँसते फाँसी के फन्दे पर झूल गए थे। कुछ इतिहासकार उनको स्वतंत्रता संघर्ष का सबसे युवा बलिदानी मानते हैं। हालांकि, इससे पहले 17 जनवरी 1872 को 68 कूकाओं के सार्वजनिक नरसंहार के समय 13 वर्ष का एक कूका बालक भी बलिदान हुआ था।
13 अगस्त 1951
भारत में निर्मित पहले विमान हिंदुस्तान ट्रेनर 2 ने पहली उड़ान भरी थी। 13 अगस्त 1951 को पहले स्वदेशी विमान हिंदुस्तान ट्रेनर 2 ने पहली उड़ान भरी। भारतीय वायु सेना और नौ सेना के लिए इस दो सीट वाले विमान का उत्पादन 1953 में शुरू हुआ। आजादी मिलने के लगभग चार साल बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स द्वारा इस विमान को डिजाइन करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि और देश के लिए तोहफा था।
14 अगस्त 1947
भारत विभाजन, लगभग 2 करोड़ लोगों का पलायन, और भीषण रक्तपात। ब्रिटेन की संसद में 4 जुलाई 1947 को पेश और 18 जुलाई 1947 को स्वीकार किए गए भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आधार पर 14 अगस्त 1947 को भारत का बंटवारा कर दिया गया था। अचानक किए गए भारत के विभाजन से करोड़ों लोग प्रभावित हुए। देश विभाजन के दौरान हुई हिंसा में करीब 10 लाख लोग मारे गए और करीब 1.46 करोड़ शरणार्थियों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा।
14 अगस्त 2021
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day) घोषित। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभाजन के दर्द को याद करते हुए 14 अगस्त 2021 को पहली बार 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मनाया। इस दौरान केंद्र में सत्तारुढ़ पार्टी बीजेपी ने देश भर में मौन यात्राए निकाली थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भारत सरकार का राजपत्र यानी गजट जारी कर कहा गया कि भारत सरकार, भारत की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा सही गई यातना और वेदना का स्मरण दिलाने के लिए 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवसके रूप में घोषित करती है। पीएम मोदी ने इस दिवस की शुरुआत करते हुए कहा था कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
15 अगस्त 1854
15 अगस्त 1854 को कलकत्ता से हुगली के बीच 37 किलोमीटर की दूरी में देश की पहली यात्री ट्रेन चली थी। हालांकि औपचारिक तौर पर इसका उद्घाटन 1885 में किया गया था। देश अब रेल के मामले में स्वदेश निर्मित ऑटोमेटेड सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस तक पहुंच गया है और जल्द ही बुलेट ट्रेन का लक्ष्य हासिल करने वाला है।
15 अगस्त 1872
प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और योगी श्रीअरविंद का जन्म। श्रीअरविंद (15 अगस्त 1872 - 5 दिसंबर 1950) एक विलक्षण भारतीय दार्शनिक, योगी, कवि, लेखक, पत्रकार, संपादक, शिक्षक, राष्ट्रवादी क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से देश की आजादी के लिए आंदोलन में शामिल होने के बाद 1910 तक देश के प्रभावशाली नेताओं में रहे। उन्होंने वंदे मातरम जैसे समाचार पत्र का संपादन किया। अलीपुर बम कांड में जेल से बाहर आने के बाद एक आध्यात्मिक सुधारक के रूप में उन्होंने मानव विकास में अपना योगदान दिया। पुदुच्चेरी में उनका विश्वविख्यात आश्रम है।
15 अगस्त 1947
इसी दिन लंबे संघर्ष के बाद भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था। इस दिन के महत्व से शायद ही कोई भी भारतीय नागरिक अपरिचित हो। प्रतिवर्ष इस दिन दुनिया भर में फैले भारतीय पूरे उत्साह और उमंग के साथ समारोह मनाते हैं।
15 अगस्त 1972
भारतीय डाक सेवा ( India Post) के इतिहास में भी 15 अगस्त एक खास कारण से दर्ज है। 15 अगस्त 1972 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ही देश में 'पोस्टल इंडेक्स नंबर' यानी पिन कोड (Pin Code) लागू किया गया था। इससे देश के सुदूर इलाके में भी अलग पिन कोड होने से डाक पहुंचने में सुविधा होने लगी थी।
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