कौन हैं BJP नेता महेश केवट? MP राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने क्यों लगाया इनपर दांव! खतरे में कांग्रेस की सीट
MP Rajya Sabha Chunav Mahesh Kevat: मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव अब सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा राजनीतिक मुकाबला बनता जा रहा है जिस पर पूरे देश की नजर टिक गई है। भारतीय जनता पार्टी ने दो उम्मीदवारों की जीत लगभग सुनिश्चित मानने के बाद तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
इस फैसले ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अब तीसरी सीट पर गणित और राजनीति दोनों की परीक्षा होने वाली है। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रख पाएगी या फिर क्रॉस वोटिंग का कोई बड़ा खेल चुनाव का परिणाम बदल देगा।

🔷तीसरी सीट का गणित क्या कहता है?
मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान समय में 228 प्रभावी विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत पड़ती है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 प्रभावी वोट बताए जा रहे हैं।
सीधी गणना करें तो भाजपा अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से राज्यसभा भेज सकती है। दो सीटों के लिए जरूरी वोट देने के बाद भी उसके पास 48 अतिरिक्त वोट बचते हैं। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए उसे लगभग 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। यहीं से राजनीतिक रोमांच शुरू होता है। भाजपा को उम्मीद है कि उसे कुछ अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है, जबकि कांग्रेस अपनी संख्या बचाने की रणनीति बनाने में जुट गई है।
🔷आखिर बीजेपी ने महेश केवट पर क्यों लगाया दांव?
भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट को उतारा है, जो मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक चुनावी फैसला नहीं बल्कि सामाजिक संदेश भी है।
महेश केवट लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं। उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से 1984 से माना जाता है। छात्र राजनीति के दौर में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में जिम्मेदारियां संभालीं और बाद में भाजपा संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष से लेकर जिला और प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियों तक, उन्होंने संगठनात्मक राजनीति में लंबा सफर तय किया है। भाजपा का मानना है कि उनका नाम मछुआरा समाज और संगठन दोनों को मजबूत संदेश देगा।
🔷कौन हैं महेश केवट? (Who is Mahesh Kevat?)
- मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है।
- वर्तमान में महेश केवट मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष (चेयरमैन) हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी उम्मीदवारी के जरिए भाजपा ने मछुआरा समाज को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
- महेश केवट का जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से चार दशक से अधिक पुराना है। वे वर्ष 1984 से संघ की गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
- छात्र राजनीति के दिनों में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में ब्लॉक संयोजक के रूप में काम किया और संगठनात्मक स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
- वर्ष 1995 से वे भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं और पार्टी संगठन में लगातार विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं।
- साल 2000 में महेश केवट पहली बार पार्षद निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
- संगठन में उन्होंने जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।
- चुनावी प्रबंधन और संगठन विस्तार में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। भाजपा ने उन्हें कई अहम चुनावों में विशेष जिम्मेदारियां सौंपी थीं।
- महेश केवट ने हरियाणा विधानसभा चुनाव, शहडोल लोकसभा उपचुनाव, तथा चित्रकूट, मुंगावली और पृथ्वीपुर विधानसभा उपचुनावों में पार्टी की ओर से महत्वपूर्ण चुनावी जिम्मेदारियां निभाई हैं।
- लंबे संगठनात्मक अनुभव, जमीनी पकड़ और सामाजिक प्रतिनिधित्व को देखते हुए भाजपा ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में अपना तीसरा उम्मीदवार बनाया है।
🔷कांग्रेस की चिंता आखिर क्यों बढ़ गई?
कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। संख्या बल के हिसाब से उनके पास जीत के लिए जरूरी 58 वोटों से कुछ अधिक समर्थन मौजूद है। लेकिन चुनौती सिर्फ गणित की नहीं, बल्कि एकजुटता की भी है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा को कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे और एक बसपा विधायक का समर्थन मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो भाजपा की जरूरत और कम हो जाएगी। इसके बाद मुकाबला कांग्रेस विधायकों के संभावित क्रॉस वोटिंग पर आकर टिक जाता है। भाजपा को अपनी रणनीति सफल बनाने के लिए कांग्रेस के कुछ विधायकों का अतिरिक्त समर्थन चाहिए होगा। इसी वजह से कांग्रेस सतर्क हो गई है।
🔷Cross Voting Fear: क्या विधायकों को दूसरे राज्यों में भेज सकती है कांग्रेस?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कुछ दिनों के लिए दूसरे राज्यों में भेज सकती है। अतीत में कई राज्यों में ऐसी रणनीति अपनाई जा चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व तेलंगाना या कर्नाटक जैसे राज्यों में विधायकों को रखने के विकल्प पर विचार कर सकता है ताकि किसी तरह की हार्स ट्रेडिंग या राजनीतिक दबाव की संभावना कम हो। हालांकि कांग्रेस के भीतर से यह भी दावा किया जा रहा है कि पार्टी के विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और किसी तरह की टूट की संभावना नहीं है।
🔷History Factor: कांग्रेस का पुराना रिकॉर्ड क्यों बना चिंता की वजह?
राजनीति में सिर्फ मौजूदा संख्या ही मायने नहीं रखती, बल्कि इतिहास भी असर डालता है। पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस कई राज्यों में अपने विधायकों की टूट का सामना कर चुकी है।
मध्य प्रदेश खुद इसका बड़ा उदाहरण रहा है। यही कारण है कि तीसरी राज्यसभा सीट के चुनाव को लेकर विपक्षी खेमे में अतिरिक्त सतर्कता दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आठ विधायकों की एक साथ क्रॉस वोटिंग आसान नहीं होगी, लेकिन भारतीय राजनीति में कुछ भी पूरी तरह असंभव भी नहीं माना जाता।
🔷BJP Candidates: भाजपा के बाकी उम्मीदवार कौन हैं?
भाजपा पहले ही राज्यसभा चुनाव के लिए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों नेताओं ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है और उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। तीसरी सीट पर महेश केवट की एंट्री ने चुनाव को सीधा मुकाबला बना दिया है। अब पूरा फोकस इसी सीट पर है।
🔷Karnataka Connection: कर्नाटक में भी बीजेपी का ऐलान
मध्य प्रदेश के साथ-साथ भाजपा ने कर्नाटक में भी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। पार्टी ने डॉ. एम. नागराज को उम्मीदवार बनाया है। नागराज लंबे समय से संगठनात्मक कार्यों से जुड़े हुए हैं और पार्टी के इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से संबंधित जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इसके अलावा कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के लिए भी भाजपा ने लिंगराज पाटील और रघु कौटिल्य के नामों की घोषणा की है।
🔷Political Bottom Line: तीसरी सीट पर किसका पलड़ा भारी?
राज्यसभा की तीसरी सीट का चुनाव अब केवल संख्या का खेल नहीं रह गया है। यह राजनीतिक प्रबंधन, संगठनात्मक ताकत और विधायकों की एकजुटता की परीक्षा बन चुका है।
भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर साफ संकेत दिया है कि वह मुकाबला छोड़ने के मूड में नहीं है। वहीं कांग्रेस के लिए यह सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। 18 जून को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि भाजपा का जोखिम भरा दांव सफल होता है या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखकर तीसरी सीट बचाने में कामयाब रहती है।














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