शारीरिक उत्पीड़न ही नहीं मानसिक आघात भी है 'घरेलू हिंसा', पढ़ें विस्तार से
नई दिल्ली। हमारे देश की बहुत सारी महिलाएं रोज अपने घर में किसी ना किसी रूप में प्रताड़ित होती हैं लेकिन उन्हें खबर ही नहीं होती कि वो सभी घरेलू हिंसा की शिकार हो रही है।

इसलिए आईये आज आपको बताते हैं घरेलू हिंसा और उससे जुड़े कानून के बारे में...
- 'घरेलू हिंसा' का मतलब आप घर के अंदर प्रताड़ना के शिकार।
- इसके अंतरगत शारीरिक क्षति, यौन उत्पीड़न, भावनात्मक और मानसिक दुर्व्यवहार, मौखिक दुर्व्यवहार, लोगों को हिंसक धमकियाँ, पीछा करना, आपके पैसे को नियंत्रित करना, आपकी सम्पत्ति और आपके सामान को नुकसान पहुँचाना आता है।
- अगर कोई महिला अपने अंतरंग साथी अथवा जीवन साथी के साथ दुर्व्यवहार की शिकार होती है तो वो उसके इसके तहत केस दर्ज करा सकती है।
- घरेलू हिंसा विपरीत लिंगी अथवा समलैंगिक संबंधों में भी हो सकती है।
- सामान्यतः पत्नी अथवा महिला साथी घरेलू हिंसा की शिकार अधिक होती है हालांकि इसका शिकार पुरुष साथी अथवा दोनों एक दूसरे के खिलाफ घरेलू हिंसा का शिकार हो सकते हैं।
कैसे करें काम?
अगर आप लोग घरेलू हिंसा के शिकार हो रहे हैं या हो रही हैं तो आप जल्द ही फैमिली वाइलेंस वर्कर (घरेलू हिंसा कार्यकर्ता) से मिले या नजदीक के पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करायें।
कैसे अपने आप को करें सुरक्षित
Women's Domestic Violence Crisis Service (WDVCS) (महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा संकटकाल सेवा) से संपर्क करें।
कैसे पायें कानून से सहायता
- आप पुलिस की सहायता से इंटरवेन्शन आर्डर (मध्यवर्तन आदेश) पा सकते हैं।
- आप मजिस्ट्रेट कोर्ट से इंटरवेन्शन आर्डर (मध्यवर्तन आदेश) भी प्राप्त कर सकते/सकती हैं।
- आप फैमिली कोर्ट से भी मदद ले सकते हैं।
महिला घरेलू हिंसा निवारण कानून 2006
इस कानून के अंतर्गत पत्नियां, मां, सास, बहनें, बेटियां यहां तक कि गोद ली हुई महिला भी अपने साथ हो रही हिंसा के खिलाफ़ कानूनी गुहार लगा सकती हैं। यह कानून उन्हें शारीरिक, बोल-चाल और यौन उत्पीड़न से तो बचाएगा ही साथ ही उन्हें निवास और आर्थिक स्वतन्त्रता का अधिकार दिलाने में भी मददगार है।
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